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नासिक के बहुचर्चित धर्म परिवर्तन मामले में निदा खान को सशर्त जमानत, बिना इजाजत जिला छोड़ने पर रोकमहाराष्ट्र
21 अग॰ 2026, 9:54 am (2 घंटे पहले)· 1

नासिक के बहुचर्चित धर्म परिवर्तन मामले में निदा खान को सशर्त जमानत, बिना इजाजत जिला छोड़ने पर रोक

नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय ने टीसीएस से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन मामले में आरोपी निदा खान को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि वह जांच में सहयोग करेंगी और बिना पूर्व अनुमति नासिक जिला नहीं छोड़ेंगी।

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित प्रसिद्ध टीसीएस कार्यालय में कर्मचारियों पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के चर्चित मामले में नामजद आरोपी निदा खान को अदालत से बड़ी राहत प्राप्त हुई है। नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए आरोपी महिला को सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। मुंबई नाका पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के तहत यह फैसला सुनाया गया है, जिसमें अदालत ने आरोपी को 50 हजार रुपये का निजी मुचलका (बॉन्ड) जमा करने का निर्देश दिया है। हालांकि, न्यायिक राहत मिलने के साथ ही अदालत ने कई कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। आरोपी निदा खान को साफ तौर पर आदेश दिया गया है कि वे जारी जांच प्रक्रिया में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगी और तय समय-सीमा के अनुसार पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। इसके अलावा, अदालत की लिखित और पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना वे नासिक जिले की सीमाओं से बाहर नहीं जा सकती हैं। ध्यान रहे कि निदा खान के विरुद्ध पहला मामला देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज किया गया था, जिसमें उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।

जमानत के कड़े नियम और बचाव पक्ष की दलीलें

अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क प्रस्तुत किया कि आरोपी महिला पुलिस जांच में लगातार सहयोग कर रही हैं और जांच एजेंसियों के सवालों का जवाब दे रही हैं। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने अदालत को निदा खान की शारीरिक स्थिति के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि वे वर्तमान में गर्भवती हैं। इन मानवीय और कानूनी आधारों को ध्यान में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय ने सशर्त जमानत मंजूर करने का निर्णय लिया। जमानत मिलने के बावजूद आरोपी के लिए नासिक जिले से बाहर जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहेगा। अगर उन्हें किसी भी विशेष कारण से जिले से बाहर यात्रा करनी पड़ती है, तो इसके लिए कोर्ट की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी। साथ ही, मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में नियमित हाजिरी लगाने का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि मामले की आगे की जांच में कोई रुकावट न आए।

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कार्यस्थल पर धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप और दर्ज एफआईआर

यह पूरा विवाद नासिक स्थित टीसीएस दफ्तर के अंदर कथित रूप से चलाए जा रहे धार्मिक दबाव और उत्पीड़न की गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, संस्थान में कार्यरत कुछ कर्मचारियों पर नमाज अदा करने और विशेष धार्मिक रीति-रिवाजों को अपनाने का अनुचित दबाव डाला जाता था। इसके साथ ही हिंदू धर्म एवं देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने के गंभीर आरोप भी सामने आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई नाका पुलिस थाने में केस नंबर 166/2026 के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत किया गया। इस प्रकरण में पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं 75, 79, 299, 302, 3(5) और 328 के अंतर्गत विधिक कार्रवाई शुरू की। इस पूरी प्राथमिकी में निदा खान को आरोपी नंबर पांच के रूप में नामांकित किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि कंपनी के कुछ टीम लीडरों ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थ कर्मचारियों को मानसिक रूप से परेशान किया और उन पर धर्मांतरण के लिए अनुचित दबाव बनाया।

अंडरकवर पुलिस अभियान और आरोपी की गिरफ्तारी का घटनाक्रम

यह मामला पहली बार फरवरी 2026 में तब प्रकाश में आया था, जब नासिक पुलिस को एक निजी कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला कर्मचारी के संबंध में शिकायत मिली। शिकायत में उल्लेख किया गया था कि उक्त महिला रमजान के महीने में रोजे रख रही थी, जिसके पीछे कार्यस्थल पर दिए जा रहे दबाव की आशंका जताई गई। शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस प्रशासन ने त्वरित कदम उठाया और दफ्तर के भीतर चल रही वास्तविक गतिविधियों का पता लगाने के लिए एक अनूठा अंडरकवर ऑपरेशन चलाया। पुलिस विभाग ने अपनी महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में कंपनी परिसर में भेजा, जिन्होंने कई दिनों तक सफाई कर्मचारियों के रूप में कार्य करते हुए वहां की गतिविधियों और माहौल पर गुप्त रूप से नजर रखी। शुरुआत में दर्ज शिकायत में चार पुरुष आरोपियों के नाम शामिल थे, जिनमें तौसीफ बिलाल अत्तार, दानिश एजाज शेख, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी और रजा रफीक मेमन के नाम शामिल हैं।

25 दिनों की फरारी और संयुक्त पुलिस छापेमारी

जांच प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस के हाथ अतिरिक्त साक्ष्य लगे और निदा खान का नाम भी इस साजिश में सामने आया, जिसके बाद उन्हें आरोपी बनाया गया। मूल शिकायत पत्र में निदा खान का नाम शामिल नहीं था, बल्कि बाद की जांच में उनकी भूमिका चिन्हित की गई। मामला दर्ज होने और गिरफ्तारी के डर से निदा खान फरार हो गई थीं और लगभग 25 दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहीं। उनकी तलाश के लिए नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजी नगर पुलिस की एक संयुक्त विशेष टीम का गठन किया गया। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने नारेगांव क्षेत्र स्थित कैसर कॉलोनी के एक रिहायशी फ्लैट में छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने निदा खान को गिरफ्तार कर लिया, जहां वे अपने चार रिश्तेदारों के साथ छिपी हुई थीं। इस पूरे धर्मांतरण प्रकरण में पुलिस अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें सात पुरुष और एक महिला शामिल हैं। फिलहाल मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

सवाल-जवाब

निदा खान को किस शर्त पर जमानत मिली है?
अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर जमानत दी है और निर्देश दिया है कि वे जांच में सहयोग करें, नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाएं तथा बिना इजाजत नासिक जिला न छोड़ें।
यह मामला किस जगह और कब का है?
यह मामला नासिक स्थित टीसीएस कार्यालय से जुड़ा हुआ है, जो पहली बार फरवरी 2026 में सामने आया था।
निदा खान के खिलाफ कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
मुंबई नाका पुलिस थाने में दर्ज केस नंबर 166/2026 में उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 75, 79, 299, 302, 3(5) और 328 के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने जांच के दौरान क्या विशेष तरीका अपनाया था?
दफ्तर के अंदर की गतिविधियों पर नजर रखने और सुराग जुटाने के लिए पुलिस ने महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में कंपनी में तैनात किया था।
निदा खान की गिरफ्तारी कैसे और कहां से हुई थी?
करीब 25 दिनों तक फरार रहने के बाद नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजी नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने उन्हें नारेगांव स्थित कैसर कॉलोनी के एक फ्लैट से गिरफ्तार किया था।
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