महाराष्ट्र के बीड जिले से समाज को प्रेरणा देने वाली एक बेहद खूबसूरत और भावनात्मक खबर सामने आई है। यहां के दहिफले परिवार में पिछले पांच पीढ़ियों से किसी बेटी का जन्म नहीं हुआ था। लंबी प्रतीक्षा के बाद जब परिवार में एक नन्हीं बच्ची की किलकारी गूंजी, तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। इस यादगार अवसर को खास बनाने के लिए परिवार के सदस्यों ने नवजात बच्ची और उसकी मां का किसी महारानी की तरह स्वागत किया। ढोल-ताशों की गूंज और संगीत की धुनों के बीच मां और बच्ची को एक भव्य सजे हुए रथ में बैठाकर पूरे इलाके में जुलूस निकाला गया।
पांच पीढ़ियों का इंतजार खत्म, बीड में ढोल-ताशों के साथ मनाया गया जश्न
दहिफले परिवार में पिछली चार-पांच पीढ़ियों से केवल बेटों का ही जन्म हो रहा था, जिससे परिवार में लंबे समय से बेटी की कमी महसूस की जा रही थी। जैसे ही अस्पताल में बच्ची के जन्म की खबर मिली, परिवार में उत्सव जैसा माहौल बन गया। नवजात बच्ची और उसकी मां को अस्पताल से घर लाते समय एक विशेष रथ को फूलों और सजावटी वस्तुओं से सजाया गया। रथ के आगे ढोल-ताशे बज रहे थे और परिवार के सदस्य खुश होकर नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। इस अनूठे जुलूस ने पूरे बीड शहर और आसपास के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
अस्पताल में ही बना ली थी भव्य स्वागत की योजना
बच्ची के जन्म की घोषणा होते ही परिवार ने तय कर लिया था कि इस आगमन को साधारण तरीके से नहीं, बल्कि एक यादगार पर्व की तरह मनाया जाएगा। नवजात की दादी सुरेखा दहिफले ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि जैसे ही अस्पताल में डॉक्टर ने बेटी के जन्म की पुष्टि की, उसी क्षण पूरे परिवार ने एक सुर में फैसला किया कि घर वापसी पर बच्ची का जोरदार अभिनंदन किया जाएगा। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके घर में साक्षात लक्ष्मी का आगमन हुआ है, जिसने बरसों पुरानी मनोकामना पूरी कर दी है।
भावुक हुए दादा, कहा- बहुओं को हमेशा माना बेटियों जैसा
बच्ची के जन्म से सबसे ज्यादा भावुक उसके दादा लिंबाजी दहिफले नजर आए। उन्होंने अपने मनोभाव व्यक्त करते हुए कहा कि इतने दशकों से परिवार में बेटी का न होना एक गहरी कसक की तरह था। आज जब पोती के रूप में यह सौगात मिली है, तो ऐसा लगता है कि ईश्वर ने उनकी सबसे बड़ी इच्छा पूरी कर दी है। लिंबाजी ने बताया कि उन्होंने हमेशा अपनी दोनों बहुओं को अपनी सगी बेटियों की तरह प्यार दिया है, और अब पोती को गाजे-बाजे के साथ रथ में बैठाकर घर लाने पर उन्हें जो असीम आनंद मिला है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
बेटियों से होता है पिता का विशेष जुड़ाव, पिता ने दिया खास संदेश
नवजात के पिता ने भी इस ऐतिहासिक क्षण पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर समाज में लोग बेटों के जन्म की कामना करते हैं, लेकिन बेटी के पिता बनने का अनुभव और आनंद सबसे अलग और अनोखा होता है। पिता और बेटी का रिश्ता बहुत खास और भावनात्मक रूप से मजबूत होता है। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वे अपनी नन्हीं बेटी को एक नाजुक फूल की तरह संभालकर और हर खुशियां देकर बड़ा करेंगे। दहिफले परिवार के इस कदम ने समाज में यह मजबूत संदेश दिया है कि बेटी का जन्म शोक या चिंता का नहीं, बल्कि असीम खुशी और गर्व का विषय है।



















