स्पेनिश क्षेत्र सेउटा में भीषण सीमा संकट के बाद फंसे हजारों प्रवासी, यूरोपीय संसद में उठा 100 मौतों का मुद्दाओडिशा में 73 साल के सुकदेव नाहक ने टूटी टांग के साथ 3 दिन ट्राइसाइकिल चलाकर तय किया 150 किलोमीटर का सफर, ब्रह्मपुर के अस्पताल में भर्तीमूलांक 2 अंकराशि 7 अगस्त 2026: पैसों के मामले में मिलेगी राहत, आपसी तालमेल से संवरेंगे कामगुलाबी नगरी में जुटा वैश्विक आर्थिक मंच, पीयूष गोयल की मौजूदगी में ब्रिक्स देशों ने एमएसएमई और सौर ऊर्जा पर बनाई साझा रणनीतिसीनियर आईपीएस का ऑफिशियल लंच बायकॉट करने पर सीआरपीएफ के 8 असिस्टेंट कमांडेंट फंसे, मुख्यालय ने मांगा जवाबजॉर्जिया से लेकर बेटाउन तक, फ्लॉक सेफ्टी के प्रचार वीडियो में दिखने वाले पुलिस महकमों पर लगे दुरुपयोग के आरोपकुआलालंपुर से कोच्चि आ रही बाटिक एयर की फ्लाइट में यात्री ने 35000 फीट की ऊंचाई पर इमरजेंसी गेट खोलने की कोशिश कीDPL 2026 में आउटर दिल्ली वॉरियर्स की बड़ी जीत, यजस शर्मा के आक्रामक पचासे और नवदीप सैनी के घातक स्पेल से साउथ दिल्ली ढेरटाइगर श्रॉफ की नई एक्शन फिल्म में मुकेश गुप्ता की एंट्री, रेमो डिसूजा के निर्देशन में 1 अगस्त से मुंबई में शुरू हुई शूटिंगविज्ञापन खर्च पर अखिलेश यादव का हमला, 7000 करोड़ रुपये खर्च करके भी सरकार नहीं सुधार सकती अपनी छवि
आईआईएमयूएन सम्मेलन में डॉ. मोहन भागवत बोले, युवाओं का असंतोष जायज और शिक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यकमहाराष्ट्र
6 अग॰ 2026, 7:09 pm (7 घंटे पहले)· 0

आईआईएमयूएन सम्मेलन में डॉ. मोहन भागवत बोले, युवाओं का असंतोष जायज और शिक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक

मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने देश के 2,000 से अधिक हाई स्कूल छात्रों से संवाद करते हुए युवाओं की तार्किक सोच और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर बल दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं की आकांक्षाओं और उनके असंतोष को पूरी तरह जायज करार दिया है। मुंबई के प्रसिद्ध नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित आईआईएमयूएन सम्मेलन के दौरान उन्होंने देश की भावी पीढ़ी के साथ संवाद स्थापित किया। डॉ. भागवत ने कहा कि वर्तमान समय के युवा तार्किक जवाब चाहते हैं और पुरानी मान्यताओं को बिना प्रश्न किए स्वीकार करने के बजाय सवाल पूछते हैं, इसलिए उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

युवाओं के असंतोष को बताया जायज और आंदोलन को संवाद का माध्यम

कार्यक्रम के दौरान बातचीत करते हुए डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि जब युवाओं की बात नहीं सुनी जाती है, तो आंदोलन भी अभिव्यक्ति और संवाद का एक माध्यम बन जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को युवाओं से समय रहते चर्चा करनी चाहिए। यदि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुनवाई न हो, तो शांतिपूर्ण आंदोलन तक जाना अनुचित नहीं है। उनका मानना है कि जेन ज़ेड और जेन अल्फा का असंतोष बेबुनियाद नहीं है, बल्कि वह उनकी सजगता और सुधार की मांग को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें

शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव और तार्किक समाधान की मांग

देश की वर्तमान शैक्षणिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधारों की सख्त जरूरत है। पहले के समय में बड़ों द्वारा कही गई बातों को बिना तर्क मान लिया जाता था, लेकिन आधुनिक दौर में जेन ज़ेड और जेन अल्फा के युवा हर विषय पर स्पष्ट और तार्किक उत्तर की अपेक्षा रखते हैं। शैक्षणिक ढांचे को इस प्रकार तैयार करना होगा कि वह युवाओं की जिज्ञासाओं और आधुनिक आवश्यकताओं का समाधान कर सके।

100 से अधिक शहरों के 2,000 छात्र बने कार्यक्रम का हिस्सा

इस वृहद कार्यक्रम में देश के 100 से ज्यादा शहरों से आए 15 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 2,000 हाई स्कूल विद्यार्थी शामिल हुए। आईआईएमयूएन के मंच से युवाओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर सीधे सवाल पूछे, जिनका उत्तर देते हुए डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं को देश के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

सवाल-जवाब

डॉ. मोहन भागवत ने जेन ज़ेड के असंतोष को लेकर क्या कहा?
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जेन ज़ेड का असंतोष जायज है और modern युवा हर विषय पर तर्कसंगत उत्तर चाहते हैं।
आईआईएमयूएन सम्मेलन कहां आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम मुंबई स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित हुआ था।
इस सम्मेलन में कितने विद्यार्थियों ने भाग लिया?
देश के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2,000 हाई स्कूल छात्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
आंदोलन को लेकर आरएसएस प्रमुख के क्या विचार थे?
उन्होंने कहा कि आंदोलन भी संवाद का ही एक रूप है और यदि सामान्य तरीके से बात न सुनी जा रही हो तो आंदोलन का मार्ग चुनना अनुचित नहीं है।
शिक्षा व्यवस्था के संबंध में क्या सुझाव दिया गया?
डॉ. मोहन भागवत ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताई ताकि युवाओं की तार्किक जिज्ञासाओं का सही समाधान हो सके।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR