महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों को बेहतर सड़क संपर्क तंत्र से जोड़ने की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राज्य कैबिनेट ने कल्याण और लातूर के बीच एक अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। करीब 450 किलोमीटर लंबे इस नए मार्ग के चालू होने के बाद कल्याण से लातूर जाने वाले मुसाफिरों को वर्तमान 11 घंटे के थकाऊ सफर से राहत मिलेगी और वे महज 4.5 से 5 घंटे में अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे।
रूट का पूरा खाका और प्रमुख कनेक्टिविटी
यह महत्वपूर्ण कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के हिस्से के रूप में बन रही बदलापुर टनल के उत्तर छोर से शुरू होगा। वहां से आगे बढ़ते हुए यह महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के करीब स्थित लातूर शहर तक पहुंचेगा। आने वाले वक्त में इस मार्ग को सीधे मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के साथ भी संबद्ध किया जाएगा, जो नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के करीब रहेगा। इस तरह मुंबई क्षेत्र के यात्री बिना किसी रुकावट के राज्य के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों की तरफ तेजी से बढ़ सकेंगे।
मलशेज घाट में बनेगी आठ किलोमीटर की सुरंग
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे विशिष्ट और चुनौतीपूर्ण कड़ी मलशेज घाट का इलाका है। पहाड़ी और दुर्गम इलाके को सुगम बनाने के लिए यहां आठ किलोमीटर लंबी टनल खोदी जाएगी। यह संरचना ठीक उसी तकनीक और तर्ज पर तैयार की जाएगी, जैसी समृद्धि एक्सप्रेसवे पर इगतपुरी के समीप ट्विन टनल का निर्माण किया गया है। दुर्गम घाटियों, खड़ी ढलानों और अंध मोड़ के कारण वाहनों की गति धीमी होने की समस्या को यह टनल पूरी तरह दूर कर देगी।
लागत और तकनीकी विशेषताएं
इस पूरे एक्सप्रेसवे परियोजना पर कुल 22 से 25 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आने का आकलन किया गया है। वाहनों के सुचारू प्रवेश और निकास के लिए पूरे 450 किलोमीटर के दायरे में कुल 17 इंटरचेंज स्थापित किए जाएंगे। परियोजना की अहमियत केवल दूरी नापने में नहीं है, बल्कि उस कठिन भौगोलिक परिदृश्य को भेदकर एक हाई-स्पीड कॉरिडोर उपलब्ध कराने में है जो अब तक भारी ट्रैफिक जाम और धीमी चाल के लिए जाना जाता था।
मल्टीमॉडल नेटवर्क और आर्थिक गलियारों से जुड़ाव
यह नया गलियारा दो अन्य बड़े एक्सप्रेसवे के साथ नेटवर्क को मजबूत करेगा। इसके साथ ही योजना के तहत इसे विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा। इस एकीकरण से नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु तक आवागमन बेहद आसान और निर्बाध हो जाएगा। इसके अलावा, यह मार्ग मराठवाड़ा क्षेत्र में निर्माणाधीन सूरत-चेन्नई इकनॉमिक कॉरिडोर के साथ भी लिंक होगा, जिससे औद्योगिक माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को असाधारण रफ्तार मिलेगी।



















