मुंबई में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर पिछले कई दिनों से आंदोलन चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार को अपनी लंबी भूख हड़ताल को आखिरकार समाप्त कर दिया है। लगातार बीस दिनों तक बिना खाए-पिए अनशन पर बैठने के बाद उन्होंने अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस कदम की घोषणा की। आंदोलन के दौरान उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी, जिसके चलते उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही थीं।
स्वास्थ्य कारणों से बदला आंदोलन का रुख
बीड जिले के पटोडा इलाके में देर रात करीब दो बजे हजारों की संख्या में जुटे अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी गंभीर शारीरिक कमजोरी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे उपवास के कारण उनका शरीर बुरी तरह थक चुका है और इस स्थिति में उनके लिए समर्थकों के विशाल काफिले के साथ मुंबई की तरफ पैदल मार्च करना संभव नहीं रह गया था। इसी भारी शारीरिक संकट और लोगों की लगातार अपील को ध्यान में रखते हुए उन्होंने फिलहाल आंदोलन के इस चरण को रोकने का निर्णय लिया है।
सरकार को दी गई तीन महीने की मोहलत
अपनी हड़ताल खत्म करते हुए उन्होंने राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार को मराठा आरक्षण की तमाम लंबित मांगों पर मुहर लगाने के लिए तीन महीने की सख्त मोहलत दी है। उन्होंने बहुत साफ शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि सरकार इस अवधि को समाज की कमजोरी या नरमी समझने की भूल बिल्कुल न करे। यदि निर्धारित समयावधि के भीतर आरक्षण से जुड़ा आधिकारिक राजपत्र यानी गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता है और समाज की मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो यह आंदोलन और भी अधिक आक्रामक तेवर के साथ दोबारा सड़कों पर लौट आएगा।
समर्थकों के लिए सख्त निर्देश और अपील
पटोडा से आगे की यात्रा के दौरान उन्होंने अपने समुदाय के लोगों से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे उनकी गाड़ी के पीछे गाड़ियों का लंबा काफिला लेकर न चलें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सीधे खोपोली में उनसे मुलाकात करें। उन्होंने यहां तक चेतावनी दी कि अगर अनुशासनहीनता हुई और काफिला उनके साथ चलता रहा, तो वे अपनी यात्रा बीच में ही रोक सकते हैं और या तो पटोडा में अपना धरना दोबारा शुरू कर देंगे या फिर अपने गृहक्षेत्र अंतरवाली सराटी वापस लौट जाएंगे।
मराठा समुदाय की राजनीतिक ताकत का जिक्र
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने समुदाय की एकजुटता और राजनीतिक ताकत पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्होंने अपने लोगों के बच्चों के भविष्य के लिए सत्ता से सीधा मुकाबला किया है। उन्होंने कहा कि भले ही इस संघर्ष का बुरा असर उनके शरीर पर पड़ा हो, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका समुदाय किसी भी पार्टी या सरकार से बहुत बड़ा है और उनके समाज में इतनी ताकत है कि वह किसी भी सरकार को सत्ता से गिरा भी सकती है और नई सरकार का गठन भी कर सकती है.
पुराने दस्तावेजों और गजट नोटिफिकेशन की मांग
आंदोलन की प्रगति पर बात करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले दिनों करीब अट्ठावन लाख पुराने रिकॉर्ड यानी नोंदी हाथ लगने के बाद इस मुहिम को एक ठोस दिशा मिली है। उनका दावा है कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों की मदद से मराठा समुदाय के लगभग ढाई करोड़ लोगों को आरक्षण का सीधा फायदा मिल सकता है। उन्होंने अपनी मुख्य मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार इन पुख्ता रिकॉर्ड्स को कानूनी मान्यता प्रदान करे और तत्काल प्रभाव से एक आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी करे ताकि समुदाय के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।



















