महाराष्ट्र में कमर्शियल गाड़ियों के संचालन को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए गए हैं, जिसके तहत अब व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी सिलसिले में राज्य के परिवहन विभाग ने शुक्रवार को एक बड़ा जांच अभियान चलाया। इस विशेष अभियान के दौरान पूरे महाराष्ट्र में कुल 5211 कमर्शियल ड्राइवरों की मराठी भाषा की दक्षता का परीक्षण किया गया। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े चालक यात्रियों के साथ स्थानीय भाषा में संवाद कर सकें और किसी भी तरह की परेशानी को आसानी से समझ सकें। हालांकि, इस जांच के नतीजे चौंकाने वाले रहे और बड़ी संख्या में ड्राइवर तय मानकों पर खरे नहीं उतर पाए।
मुंबई क्षेत्र से सबसे ज्यादा ड्राइवर आए पकड़ में
परिवहन विभाग की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, टेस्ट में फेल होने वाले कुल 777 ड्राइवरों में से भारी भरकम हिस्सा अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र यानी MMR का है। अकेले इसी क्षेत्र से 722 ड्राइवर मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान की परीक्षा में असफल पाए गए। परिवहन विभाग की टीमों ने शुक्रवार को राजधानी मुंबई के अलावा राज्य के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में भी औचक और सुनियोजित निरीक्षण किए। अधिकारियों का कहना है कि कमर्शियल वाहनों के चालकों के लिए स्थानीय भाषा की जानकारी बेहद आवश्यक है ताकि वे सवारी से ठीक से बात कर सकें, उनकी दिक्कतों को समझ सकें और सफर को पूरी तरह से सुरक्षित व सुगम बना सकें। इस प्रकार कुल 5211 ड्राइवरों की जांच में से 4434 ड्राइवर सफल रहे और 777 ड्राइवर असफल घोषित किए गए।
किन गाड़ियों के चालकों पर लागू है यह नियम?
राज्य सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि यह नया नियम विशेष रूप से ऑटो-रिक्शा, पारंपरिक टैक्सी और कैब चलाने वाले ड्राइवरों पर लागू होता है। इसमें आधुनिक तकनीक पर आधारित ऐप आधारित कैब चलाने वाले चालक भी शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने गत 12 अगस्त को इस नियम को औपचारिक तौर पर लागू किया था। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस बात की जानकारी दी थी कि इसके लिए महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। इन संशोधनों के जरिए साल 1989 के पुराने नियमों में स्थानीय भाषा से जुड़ी शर्तों को और अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया गया है ताकि किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे।
नियम तोड़ने पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई
नए प्रावधानों के तहत यदि कोई भी कमर्शियल ड्राइवर मराठी का व्यावहारिक ज्ञान साबित करने में नाकाम रहता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस की अनुमति को शुरुआती तौर पर 3 महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके अलावा यदि कोई चालक बार-बार नियमों की अवहेलना करता है और सुधार नहीं दिखाता है, तो उसका ड्राइविंग परमिट स्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है। जिन 777 ड्राइवरों को नोटिस भेजा गया है, उन्हें एक महीने के भीतर अपनी मराठी सुधारने का मौका दिया गया है।
परताप सरनाईक और केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दो टूक शब्दों में कहा है कि कमर्शियल ड्राइवर अगर मराठी सीखने से इनकार करते हैं तो सरकार उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने दोहराया कि इन संशोधनों से नियमों की अस्पष्टता खत्म हुई है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि दूसरे राज्यों से रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र आने वाले लोगों को स्थानीय भाषा सीखने के लिए सरकार की तरफ से पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। गिरिराज सिंह के अनुसार रोजी-रोटी कमाने वालों को स्थानीय भाषा सीखनी चाहिए, लेकिन इसके वास्ते एक निश्चित समय सीमा तय होनी चाहिए ताकि उन्हें कठिनाई न हो।
ड्राइवरों के पास अब आगे क्या रास्ता बचा है?
परिवहन विभाग से नोटिस पाने वाले सभी 777 चालकों के पास अब सिर्फ एक महीने का समय है जिसमें उन्हें हर हाल में मराठी का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करना होगा। तय अवधि में शर्त पूरी न होने पर उनके लाइसेंस और परमिट पर गाज गिर सकती है। इस प्रकार महाराष्ट्र में कमर्शियल ड्राइविंग का पेशा अपनाने वालों के लिए अब स्थानीय भाषा जानना एक अनिवार्य कानूनी शर्त बन चुकी है।





















