राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित जवाहरलाल नेहरू अस्पताल यानी JLN अस्पताल परिसर उस समय भारी हंगामे का केंद्र बन गया जब एक महिला ने वहां के चिकित्सा स्टाफ पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। घटना बाल चिकित्सा आईसीयू यानी PICU यूनिट से जुड़ी हुई है, जहां एक परिवार अपने बीमार बच्चे के बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचा था। बताया जा रहा है कि यह पीड़ित परिवार अजमेर जिले के ही किशनगढ़ इलाके से ताल्लुक रखता है, जो अपने नौनिहाल की बीमारी से आहत होकर इस बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान में आया था। लेकिन अस्पताल के भीतर जो कुछ हुआ, उसने चिकित्सा पेशे की गरिमा और वहां आने वाले मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब बच्चे को PICU वार्ड में भर्ती कराया गया था, उसी दौरान वहां तैनात एक रेजिडेंट डॉक्टर ने बच्चे की देखभाल में जुटी मां के साथ अभद्र टिप्पणियां और अश्लील हरकतें कीं। परिजनों का यह भी आरोप है कि इस अनुचित व्यवहार में केवल अकेला डॉक्टर ही नहीं, बल्कि अस्पताल का एक अन्य कर्मचारी भी शामिल था, जिसने महिला के साथ गलत तरीके से पेश आने में साथ दिया। इस तरह की घटना से आहत और गुस्से में आए परिजनों ने तुरंत इसकी शिकायत अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई, ताकि आरोपी चिकित्सक के खिलाफ फौरन अनुशासनात्मक कदम उठाया जा सके।
लेकिन विवाद तब और बढ़ गया जब परिजनों की शुरुआती शिकायतों पर अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कोई त्वरित या ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न्याय न मिलने से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर के भीतर ही जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भारी हंगामा खड़ा हो गया, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं कुछ देर के लिए लड़खड़ा गईं। हंगामे की भनक लगते ही स्थानीय कोतवाली थाना पुलिस का जाब्ता तुरंत हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए। पुलिस ने नाराज परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराने की कोशिश की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई।
बढ़ते दबाव और हंगामे को देखते हुए आखिरकार अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी ने फौरन सक्रिय होते हुए घटना से जुड़े तमाम पहलुओं और प्राथमिक साक्ष्यों की पड़ताल शुरू की। जांच के दायरे में अस्पताल के भीतर लगे क्लोज-सर्किट टेलीविजन यानी CCTV कैमरों की फुटेज को भी खंगाला गया, जिसमें सामने आए तथ्यों ने आरोपों को बल दिया। शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गठित कमेटी ने रेजिडेंट डॉक्टर शुभम को इस मामले में दोषी करार दिया है।
प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों के बाद अस्पताल प्रशासन ने इस आरोपी चिकित्सक के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उसके निलंबन यानी सस्पेंशन की संस्तुति उच्चाधिकारियों के पास भेजने की बात कही है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि जांच कमेटी की अंतिम और पूर्ण रिपोर्ट आना अभी बाकी है, जिसके बाद ही आगे की प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस बीच, यह बात भी सामने आई है कि विवाद बढ़ने और हंगामा शुरू होने के बाद आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर मौके से फरार हो गया था और वहां से चला गया था।
दूसरी ओर, पीड़ित महिला के परिजनों ने अस्पताल के उच्च प्रबंधन पर मामले को दबाने और उन्हें डराने-धमकाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का साफ कहना था कि यदि उनकी शिकायत पर शुरुआती स्तर पर ही मुस्तैदी दिखाते हुए समय रहते कार्रवाई कर दी जाती, तो उन्हें अस्पताल परिसर के अंदर विरोध प्रदर्शन करने की नौबत ही नहीं आती। पुलिस और अस्पताल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चली लंबी बातचीत के बाद आखिरकार मामला किसी तरह शांत हुआ। परिजनों ने स्थानीय पुलिस थाने में भी इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही है, जिसके आधार पर पुलिस विभिन्न बिंदुओं पर गहराई से तफ्तीश कर रही है。
इस संपूर्ण घटनाक्रम के बाद एक बार फिर अजमेर के JLN अस्पताल में मरीजों और उनके साथ आने वाले तीमारदारों की सुरक्षा, सम्मान और अस्पताल के माहौल पर बहस छिड़ गई है। दूर-दराज के इलाकों से अपने बीमार बच्चों को लेकर आने वाले परिवार पहले से ही मानसिक तनाव और लाचारी के दौर से गुजर रहे होते हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में यदि किसी मां के साथ इस तरह की अभद्रता का मामला सामने आता है, तो अस्पताल प्रशासन की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक जांच और पुलिसिया कार्रवाई समानांतर रूप से चल रही है, लेकिन आम जनता के बीच इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है।



















