महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने गैर-मराठी चालकों को मराठी सीखने के लिए 1 साल की मोहलत दी है। इस फैसले के बाद ऑटो और टैक्सी चालकों में खुशी का माहौल है, लेकिन इस निर्णय को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेवा के अध्यक्ष अमित ठाकरे ने सरकार के इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने अमित ठाकरे के आक्रामक बयानों पर पलटवार करते हुए कानून का पालन करने की सख्त हिदायत दी है।
अमित ठाकरे की चेतावनी और यूपी चुनाव का आरोप
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेवा के प्रमुख और राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा समय सीमा बढ़ाने के फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मराठी भाषा को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। अमित ठाकरे ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने मराठी भाषा की अनिवार्यता से जुड़े फैसले को आगे बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए आंदोलनों और यूपी के राजनीतिक समीकरणों के कारण सरकार ने यह कदम उठाया है।
बातचीत के दौरान अमित ठाकरे ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि चालकों को मराठी सीखनी ही होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने मनमानी या सीना जोरी करने की कोशिश की, तो उनके साथ मारपीट की जाएगी। अमित ठाकरे ने संवाद के बुनियादी स्वरूप पर सवाल उठाते हुए कहा कि यात्रियों के साथ होने वाली सामान्य बातचीत में केवल दिशा पूछने, बाईं या दाईं तरफ मुड़ने और ओटीपी बताने जैसे साधारण शब्द शामिल होते हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि इतने सरल संवाद को सीखने के लिए 1 साल का अतिरिक्त समय क्यों चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यात्रियों पर हिंदी या अन्य भाषा बोलने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए और मराठी में ही बातचीत की जानी चाहिए।
बीजेपी मंत्री आशीष शेलार का पलटवार और कानून व्यवस्था की बात
अमित ठाकरे की बयानबाजी पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र में किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आशीष शेलार ने स्पष्ट किया कि बीजेपी भी मानती है कि महाराष्ट्र में रहने वाले सभी लोगों को मराठी भाषा आनी चाहिए और मराठी अस्मिता का सम्मान होना चाहिए। हालांकि, जो गैर-मराठी चालक ईमानदारी से भाषा सीखना चाहते हैं, उन्हें उचित अवसर दिया जाना आवश्यक है।
कैबिनेट मंत्री ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि चालकों की व्यावहारिक कठिनाइयों और मांगों को ध्यान में रखकर ही 1 साल की राहत दी गई है। उन्होंने इस फैसले को राज्य सरकार का एक संवेदनशील और सराहनीय कदम बताया। शेलार ने कहा कि सरकार भाषा के सम्मान के साथ-साथ चालकों के हितों और जनसुविधाओं का संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उद्धव और आदित्य ठाकरे के कार्यकाल पर उठाए सवाल
आशीष शेलार ने अमित ठाकरे पर निशाना साधते हुए अतीत के प्रशासनिक फैसलों की याद दिलाई। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य में महाविकास आघाड़ी की सरकार थी और अमित ठाकरे के चाचा उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद पर थे, जबकि उनके भाई आदित्य ठाकरे कैबिनेट मंत्री थे, तब मराठी भाषा के इस नियम को लागू कराने के लिए क्या कदम उठाए गए थे। शेलार ने कहा कि अमित ठाकरे को दूसरों को सलाह देने या धमकी भरे लहजे में बात करने से पहले अपने परिवार के वरिष्ठ नेताओं से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने कहा कि आघाड़ी सरकार के दौरान इस विषय पर चुप्पी साधे रखने वाले नेताओं को अब मराठी मुद्दे पर बयानबाजी करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
विरोध प्रदर्शन से लेकर हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाए जाने का मुद्दा लंबे समय से तूल पकड़ रहा है। इससे पहले गैर-मराठी चालकों ने राज्य प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया था और काम बंद कर प्रदर्शन किया था। चालकों का आरोप था कि भाषा के नाम पर उनके खिलाफ राजनीति की जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। विवाद बढ़ने के बाद ऑटो रिक्शा और कैब चालकों के संगठनों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अनिवार्य मराठी भाषा के नियम को चुनौती दी। चालकों की इन्हीं व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने 1 साल का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया, जिस पर अब राजनीतिक जंग छिड़ गई है।



















