मणिपुर के सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा बलों ने गश्त के दौरान एक अत्यंत खतरनाक विस्फोटक जाल का भंडाफोड़ किया है। कामजोंग जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके में करीब 8 किलोमीटर लंबे रास्ते पर 27 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) लगाए गए थे। भारतीय सेना और असम राइफल्स के जवानों ने त्वरित तालमेल दिखाते हुए इन सभी विस्फोटकों को खोज निकाला और बम निरोधक दस्ते ने उन्हें बिना किसी नुकसान के नष्ट कर दिया। एक रक्षा अधिकारी ने शुक्रवार को इस पूरे घटनाक्रम का विवरण साझा किया।
शांगखालोक-पिलोंग पहाड़ी मार्ग पर तलाशी
विस्फोटकों को शांगखालोक-पिलोंग मार्ग पर छिपाकर लगाया गया था। यह संकरा रास्ता म्यांमार सीमा के बेहद पास बसे दुर्गम पिलोंग गांव की तरफ जाता है। पहाड़ी इलाके की झाड़ियों में छिपाए गए इन देसी बमों को ढूंढ़ने के लिए खोजी कुत्तों की विशेष टुकड़ी भी तैनात की गई थी। करीब आठ किलोमीटर के फैलाव में जमीन के भीतर और झाड़ियों में इन विस्फोटकों का होना जवानों के लिए एक कठिन चुनौती बना हुआ था। सटीक जांच के बाद सेना के तकनीकी विशेषज्ञों ने हर विस्फोटक को निष्क्रिय कर मार्ग को सुरक्षित किया। हालांकि, इन्हें बिछाने वाले गिरोह या उनके मकसद के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
हालिया हिंसा के बाद चार दिन चला अभियान
इस संवेदनशील इलाके में बीते महीने गंभीर वारदात सामने आई थी। 24 सितंबर को पिलोंग गांव के आसपास संदिग्ध उग्रवादियों ने चार तांगखुल नागा नागरिकों की गोली मारकर जान ले ली थी। इस घटना के बाद इलाके में चौकसी बढ़ा दी गई थी, जिसके तहत 4 से 7 अक्टूबर तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया। अभियान के समापन के बाद असम राइफल्स ने गुरुवार रात सोशल मीडिया पर बताया कि इस समयबद्ध कार्रवाई ने क्षेत्र की शांति और व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश को विफल कर दिया है और सीमावर्ती ग्रामीणों की आवाजाही को सुरक्षित बनाया है।



















