मणिपुर सरकार ने खेल जगत को बढ़ावा देने और राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से एक नई खेल भर्ती नीति की घोषणा की है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शनिवार को इंफाल के खुमान लांपक इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह के दौरान इस नीति का ऐलान किया। इस कार्यक्रम में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में देश और राज्य का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया, जिसमें स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू भी शामिल थीं जो विशेष तौर पर इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वापस लौटी थीं।
पदक विजेताओं और प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार
युवा मामले और खेल विभाग की ओर से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में पदक विजेताओं पर जमकर पुरस्कारों की बरसात की गई। सरकार की पुरस्कार योजना के तहत ग्लासगो खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 20 लाख रुपये और प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा, रजत पदक विजेताओं को 15 लाख रुपये और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 10 लाख रुपये की राशि सौंपी गई। केवल पदक जीतने वाले ही नहीं, बल्कि उन एथलीटों को भी खाली हाथ नहीं लौटना पड़ा जिन्होंने बिना पदक जीते इन खेलों में हिस्सा लिया था; ऐसे प्रत्येक प्रतिभागी को 4 लाख रुपये और प्रमाण पत्र दिए गए। साथ ही, खिलाड़ियों को इस मुकाम तक पहुंचाने वाले उनके कोचों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सरकारी नौकरियों और नियुक्ति पत्रों का वितरण
समारोह के दौरान सिर्फ सम्मान ही नहीं किया गया, बल्कि खिलाड़ियों को रोजगार के पक्के अवसर भी सौंपे गए। इस अवसर पर कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। जानकारी के अनुसार, 36वें और 37वें राष्ट्रीय खेलों के कुल 71 स्वर्ण पदक विजेताओं को युवा मामले और खेल विभाग के तहत शारीरिक शिक्षा शिक्षक (फिजिकल एजुकेशन टीचर) के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, गृह विभाग के अंतर्गत चार एथलीटों को नियुक्ति पत्र दिए गए, जबकि तीन एशियाई खेल पदक विजेताओं को भी इसी विभाग के माध्यम से सरकारी सेवा में शामिल किया गया है।
नई भर्ती नीति से रजत और कांस्य विजेताओं को भी लाभ
युमनाम खेमचंद सिंह ने नई खेल भर्ती नीति की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि सरकार ने एथलीटों के लिए रोजगार के दायरे को काफी हद तक फैला दिया है। पूर्व की व्यवस्थाओं में सरकारी नौकरियों के लिए मुख्य रूप से केवल स्वर्ण पदक विजेताओं पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता था, लेकिन अब नई नीति के लागू होने से रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी नौकरी में पूरी प्राथमिकता और विचार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन करने वाले मणिपुर के सभी एथलीटों की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस खेल संस्कृति को जिंदा रखने में खिलाड़ियों के परिवारों, स्थानीय खेल क्लबों, कोचों और खुद एथलीटों की कड़ी मेहनत का बहुत बड़ा योगदान है।
खेल से पुराना नाता और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
अपने संबोधन के दौरान अपनी पुरानी खेल यात्रा को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उनका ताइक्वांडो से गहरा नाता रहा है और वह पांचवें डैन ब्लैक बेल्ट रह चुके हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में इस खेल को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका भी निभाई थी। कार्यक्रम में उपमुख्यंत्री लोसी दिखो ने भी शिरकत की और मणिपुर की खेल प्रतिभाओं की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के युवा लगातार अपनी उपलब्धियों से सभी को गौरवान्वित कर रहे हैं। मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने उन एथलीटों पर गर्व व्यक्त किया जिन्होंने मणिपुर और पूरे देश का प्रतिनिधित्व किया है, और राज्य की पुरानी खेल परंपरा को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम में कई विधायक, प्रशासनिक अधिकारी, कोच और खिलाड़ी मौजूद रहे, जिनमें राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के कुलपति दलजीत सिंह चौधरी और युवा मामले एवं खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।





















