मणिपुर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी एनआरसी को अपडेट करने के लिए वर्ष 1951 को बेस ईयर बनाए जाने की योजना पर काम चल रहा है। राज्य के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजाम ने विधानसभा सत्र के दौरान यह अहम जानकारी साझा की। विपक्ष के विधायक के. मेघचंद्र सिंह की तरफ से पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार इस पूरे विषय को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएगी ताकि इसे आगे बढ़ाया जा सके। यह कदम राज्य विधानसभा द्वारा पहले पारित किए गए विभिन्न संकल्पों के अनुरूप ही उठाया जा रहा है।
सरकार की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि साल 1951 के एनआरसी से जुड़े मूल दस्तावेजों को खोजने के प्रयास लगातार जारी हैं। हालांकि, गृह मंत्री ने सदन को यह भी याद दिलाया कि राज्य सरकार भारत सरकार की औपचारिक मंजूरी के बिना अपने बलबूते पर एनआरसी की प्रक्रिया को पूरी तरह लागू नहीं कर सकती है। इस संवेदनशील विषय को बेहद सावधानी से संभालने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने असम का विशेष उदाहरण भी दिया। असम में एनआरसी की प्रक्रिया पूरी तो की गई थी, लेकिन अदालत में मामला लंबित होने की वजह से उसकी अंतिम सूची को सार्वजनिक नहीं किया जा सका। मणिपुर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके यहां का प्रशासनिक कदम किसी कानूनी उलझन में न फंसे।
विधानसभा के प्रस्ताव और केंद्र के साथ पत्राचार
राज्य सरकार ने इस दिशा में कई बार अपने कदम आगे बढ़ाए हैं। इससे पहले 1 मार्च 2024 को विधानसभा में एक संकल्प पारित किया गया था जिसके जरिए पुराने फैसले को दोहराते हुए केंद्र के समक्ष इस मामले को उठाया गया था। इसके बाद 2 सितंबर 2026 को एक बार फिर विधानसभा ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई। इसके अतिरिक्त, राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति की निगरानी के लिए 5 अगस्त 2022 को पारित हुए विधानसभा प्रस्ताव के आधार पर मणिपुर स्टेट पॉपुलेशन कमीशन का गठन भी पहले ही किया जा चुका है। सरकार का यह प्रयास है कि राज्य की डेमोग्राफी को सुरक्षित रखते हुए कानूनी दायरे में रहकर ही सभी कदम उठाए जाएं।
इस बीच, राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान का एक बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है। विपक्ष के एक अन्य विधायक थ. लोकेश्वर सिंह के सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने सदन को बताया कि मणिपुर में अब तक कुल 24,475 अवैध प्रवासियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से सबसे अधिक 14,370 लोग चंदेल जिले में पाए गए हैं। इसके अलावा कामजोंग जिले में 6,545 और तेंगनौपाल जिले में 3,560 अवैध प्रवासियों का पता चला है। सरकार इनमें से कई लोगों को कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से उनके गृह देशों में वापस भेजने का काम कर रही है, जबकि बाकी लोग अभी राज्य के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं।
अवैध प्रवासियों की पहचान और कमेटियों का गठन
अवैध रूप से आ रहे लोगों की पहचान और नए गांवों के अनियोजित विकास की जांच के लिए सरकार ने समय-समय पर कई महत्वपूर्ण कमेटियों का गठन किया है। इसी कड़ी में 7 अगस्त 2024 को एक 12 सदस्यीय समिति बनाई गई थी जिसकी कमान अवंगबो न्यूमई को सौंपी गई थी। इस समिति का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और नए बस्तियों के प्रसार पर रोक लगाना था। इससे पहले 16 फरवरी 2023 को लेपपाओ हाओकिप की अध्यक्षता में एक कैबिनेट सब-कमेटी भी बनाई गई थी जिसमें अवंगबो न्यूमई और थ. बसंत कुमार सिंह बतौर सदस्य शामिल थे। इसके बाद गृह विभाग ने 24 मार्च 2023 को कमिश्नर एस. चौरसिया की अगुवाई में एक आधिकारिक कार्यकारी समिति का गठन किया था।
इस कार्यकारी समिति में आईजीपी के. कबीब के साथ-साथ विभिन्न जिलों के डिप्टी कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक, सब-डिविज़नल ऑफिसर और पुलिस अधिकारी शामिल किए गए थे। इस प्रशासनिक अमले की जिम्मेदारी अवैध प्रवासियों के सत्यापन का काम तेजी से पूरा करना और कैबिनेट सब-कमेटी की मदद करना थी। हालांकि, गृह मंत्री ने सदन में यह भी बताया कि यह सत्यापन अभियान उस समय गंभीर रूप से प्रभावित हो गया जब 3 मई 2023 को राज्य में जातीय हिंसा और संकट की स्थिति भड़क उठी। इसके बावजूद प्रशासन अपनी तरफ से लगातार जरूरी कदम उठाने का प्रयास कर रहा है।
वापस भेजे गए लोग और बनाए गए शेल्टर
पहचान किए गए कुल 24,475 अवैध प्रवासियों में से अब तक 14,992 लोगों को उनके मूल स्थानों पर वापस खदेड़ा जा चुका है। कामजोंग जिले की बात करें तो वहां मिले 6,545 प्रवासियों में से 5,378 लोगों को वापस भेज दिया गया है, जबकि बचे हुए 1,167 लोगों को कम्युनिटी हॉलों में बने सरकारी शेल्टर कैंपों में रखा गया है। ये लोग नामली, वोंगली, काका, जोरो, इको, स्किपी, हुइमिन थाना और फाईकोह जैसे इलाकों में ठहरे हुए हैं। वहीं तेंगनौपाल जिले में चिन्हित 3,560 लोगों में से केवल 14 को ही वापस भेजा जा सका है, जबकि बाकी 3,546 लोगों के बायोमेट्रिक आंकड़े दर्ज करने के बाद उन्हें संबंधित डिप्टी कमिश्नर की निगरानी में रखा गया है ताकि वे इधर-उधर न जा सकें। इन लोगों को साडांग गांव के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक आश्रय दिया गया है।
चंदेल जिले में स्थिति का जायजा लें तो वहां कुल 14,370 में से 9,600 प्रवासियों को म्यांमार वापस धकेल दिया गया है। शेष 4,770 लोगों में से 1,308 की बायोमेट्रिक डिटेल जुटा ली गई है, और उन्हें मोलचम, गम्फाजोल, खांगतुंग, एल. नम्पाओ, याइंगोल, बोंगजांग, खेलजांग, न्यू लाजांग और आसपास के गांवों में अस्थायी शिविरों में रखा गया है। सरकार ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन सभी अवैध प्रवासियों को स्थानीय भारतीय समुदायों से पूरी तरह अलग रखा जाए ताकि किसी भी तरह की सामाजिक समस्या पैदा न हो।



















