वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) आगामी 10 सितंबर की बैठक में अपनी मुख्य ब्याज दर बढ़ाने की ओर कदम बढ़ा रहा है। हाल ही में 65 प्रमुख अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, विशेषज्ञों की स्पष्ट सहमति है कि यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक अपनी डिपॉजिट दर में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) का इजाफा करेगा। इस वृद्धि के बाद केंद्रीय बैंक की डिपॉजिट दर बढ़कर 2.50% के स्तर पर पहुंच जाएगी। इसके साथ ही सर्वेक्षण में शामिल लगभग 90% अर्थशास्त्रियों ने यह अनुमान व्यक्त किया है कि इस वर्ष के अंत तक डिपॉजिट दर 2.5% के स्तर पर ही स्थिर बनी रहेगी।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की संरचना और प्राथमिक मौद्रिक जनादेश
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) यूरोज़ोन के 20 सदस्य देशों के लिए रिजर्व बैंक के रूप में कार्य करता है। यह संस्थान पूरे यूरोज़ोन क्षेत्र के लिए ब्याज दरें तय करने और मौद्रिक नीति का संचालन करने के लिए जिम्मेदार है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का प्राथमिक मौद्रिक जनादेश मूल्य स्थिरता यानी मूल्य सूचकांक में स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मुख्य लक्ष्य मुद्रास्फीति (महंगाई दर) को 2% के आसपास सीमित रखना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक का सबसे प्रमुख हथियार ब्याज दरों में बढ़ोतरी या कटौती करना है। वित्तीय सिद्धांतों के अनुसार, जब यूरोपीय सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करता है, तो आमतौर पर यूरो मुद्रा मजबूत होती है, जबकि ब्याज दरों में कटौती से यूरो कमजोर पड़ता है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की शासकीय परिषद यानी गवर्निंग काउंसिल वर्ष में आठ बार मौद्रिक नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए बैठकें आयोजित करती है। इस उच्च स्तरीय निर्णय लेने वाली संस्था में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के गवर्नर और छह स्थाई सदस्य शामिल होते हैं। इन छह स्थाई सदस्यों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक की वर्तमान अध्यक्ष क्रिस्टीन लागार्ड भी शामिल हैं, जो वैश्विक मौद्रिक नीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
असाधारण मौद्रिक नीतियां: क्वांटिटेटिव ईज़िंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग
सामान्य परिस्थितियों से इतर, अत्यधिक आर्थिक संकट के समय यूरोपीय सेंट्रल बैंक क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) नामक एक विशेष नीतिगत उपाय का सहारा लेता है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत यूरोपीय सेंट्रल बैंक नए यूरो जारी करता है और उनका उपयोग व्यावसायिक बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से संपत्तियों, मुख्य रूप से सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, को खरीदने के लिए करता है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में लिक्विडिटी यानी नकदी प्रवाह बढ़ाना होता है। हालांकि, QE के कारण बाजार में यूरो की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे आमतौर पर यूरो की विनिमय दर में गिरावट आती है और मुद्रा कमजोर होती है।
क्वांटिटेटिव ईज़िंग को एक अंतिम उपाय माना जाता है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से मूल्य स्थिरता का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाता। यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने 2009-11 के महान वित्तीय संकट के दौरान, वर्ष 2015 में जब मुद्रास्फीति लगातार निचले स्तर पर बनी हुई थी, और हाल ही में कोविड महामारी के दौर में इस QE नीति का व्यापक स्तर पर उपयोग किया था।
इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) क्वांटिटेटिव ईज़िंग की एकदम उल्टी प्रक्रिया है। QT को तब लागू किया जाता है जब अर्थव्यवस्था में रिकवरी यानी सुधार शुरू हो जाता है और मुद्रास्फीति बढ़ने लगती है। जहाँ QE के दौरान यूरोपीय सेंट्रल बैंक बॉन्ड्स खरीदकर नकदी प्रदान करता है, वहीं QT के दौरान बैंक नए बॉन्ड्स खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद मैच्योर यानी परिपक्व हो चुके बॉन्ड्स के मूलधन का पुनर्निवेश करना भी रोक देता है। यह प्रक्रिया बाजार में मुद्रा आपूर्ति को सीमित करती है और आमतौर पर यूरो के लिए सकारात्मक या बुलिश यानी तेजी लाने वाली मानी जाती है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार: जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के घटनाक्रमों के साथ-साथ वैश्विक करेंसी मार्केट यानी फॉरेक्स में भी व्यापक उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। गुरुवार के कारोबारी सत्र के दूसरे हिस्से में जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर लगातार बिकवाली के दबाव में रहा और USD/JPY मुद्रा जोड़ी 156.00 के स्तर का परीक्षण करती दिखी। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति यानी हॉकिश रुख अपनाए जाने की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप यानी हस्तक्षेप जोखिम की संभावनाओं के कारण जापानी येन को लगातार समर्थन मिल रहा है। इस बीच, निवेशक अमेरिका से आने वाले अगस्त महीने के ISM सर्विसेज PMI आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) पिछले दिन के लगभग दो हफ्ते के निचले स्तर से आई रिकवरी को आगे बढ़ाने में संघर्ष करता दिख रहा है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान यह जोड़ी 0.7150 के स्तर से ऊपर एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। ऑस्ट्रेलिया के निराशाजनक व्यापारिक आंकड़ों ने चीन के सकारात्मक रेटिंगडॉग सर्विसेज PMI आंकड़ों के प्रभाव को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मजबूत होती उम्मीदों के कारण अमेरिकी डॉलर में गिरावट थम गई है, जिससे AUD/USD की बढ़त पर सीमा लग गई है।
कीमती धातुएं: सोने की कीमतों में सुधार और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक तेजी का रुझान बना हुआ है, हालांकि यह $4,450 के स्तर से नीचे ही कारोबार कर रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट और बुधवार को जारी हुए कमजोर अमेरिकी ADP रोजगार रिपोर्ट के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना है, जिससे सोने को अपने लगभग चार हफ्ते के निचले स्तर से उभरने में मदद मिली है। इसके बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण उपजने वाले मुद्रास्फीति के जोखिमों के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को नीचे से सहारा मिल रहा है, जो सोने की ऊपरी तेजी को सीमित कर सकता है।
अमेरिकी सेवा क्षेत्र और ऊर्जा बाजार में ऐतिहासिक रिकॉर्ड
अमेरिका के सेवा क्षेत्र की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) गुरुवार को 14:00 GMT पर अगस्त महीने के सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़े जारी करने जा रहा है। बाजार आम सहमति का अनुमान है कि यह सूचकांक जुलाई के 54.1 से मामूली सुधरकर 54.3 पर पहुंच सकता है। यदि यह आंकड़ा अनुमान के अनुरूप रहता है, तो यह अमेरिकी सेवा क्षेत्र की मजबूती को रेखांकित करेगा और व्यापक अर्थव्यवस्था में निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा।
दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में भले ही क्रूड ऑयल की कीमतें ऊपर से शांत दिख रही हों, लेकिन डीजल बाजार एक बिल्कुल अलग और गंभीर संकेत दे रहा है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी WTI क्रूड ऑयल वायदा के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम, हाल ही में इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह प्रीमियम $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गया, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बनी दबाव की स्थिति को दर्शाया है।



















