भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाए जाने वाले कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल रहता है। हरिद्वार और अन्य क्षेत्रों में इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बहुत ही दुर्लभ योग के बीच मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण का जन्म इसी अष्टमी तिथि की आधी रात को हुआ था, जिसके चलते श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात्रि के बारह बजने की प्रतीक्षा करते हैं।
जन्मोत्सव की परंपरा और भोग
रात के बारह बजते ही शंख और घंटियों की गूंज के साथ लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर भगवान को माखन मिश्री के अलावा पंजीरी, पंचामृत और मौसमी फलों का भोग अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस वर्ष का जन्मोत्सव एक विशिष्ट नक्षत्र और वार के मेल में आ रहा है, जिससे भक्तों को इसका अत्यधिक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होगा।
रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का दुर्लभ संयोग
हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का यह अद्भुत मिलन बेहद शुभ और फलदायी है। ठीक इसी तरह द्वापर युग में भगवान कृष्ण का अवतरण रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के संयोग में हुआ था। जब अष्टमी के साथ रोहिणी नक्षत्र का ऐसा योग बनता है, तो उस दौरान किए गए अनुष्ठान और व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इस पावन काल में विधि-विधान से लड्डू गोपाल की पूजा करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
शनिवार के दिन जन्मोत्सव का विशेष महत्व
पंडित श्रीधर का कहना है कि रात्रि बारह बजते ही शनिवार का दिन आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिवार का दिन कर्मफलदाता शनिदेव को समर्पित है, और भगवान श्रीकृष्ण को शनिदेव का आराध्य माना जाता है। शनिवार के दिन यदि श्रीकृष्ण के विशेष पाठ और उनकी आराधना की जाए, तो व्यक्ति को शनि के प्रकोप और कष्टों से बड़ी राहत मिलती है।
शनि दोषों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
शनिवार के इस खास दिन पर जन्म ले रहे लड्डू गोपाल की पूजा करने से जातकों को शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा समेत तमाम ग्रह जनित पीड़ाओं से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है। पंडित शास्त्री के अनुसार इस दिव्य संयोग में जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और ग्रह शांति का वास होता है।


















