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100 डॉलर कच्चे तेल के संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने 80 से अधिक देशों पर लगाया नया टैरिफ, शेयर बाजार में गिरावटबाज़ार
24 जुल॰ 2026, 2:46 pm (3 घंटे पहले)· 0

100 डॉलर कच्चे तेल के संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने 80 से अधिक देशों पर लगाया नया टैरिफ, शेयर बाजार में गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत सहित 80 से अधिक देशों पर नए आयात शुल्क लगाने और अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने से वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट देखी गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 80 से अधिक देशों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ लगाने के नए फैसले ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में जल्द सुधार की उम्मीदों को करारा झटका दिया है। इस फैसले ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर दिया है, जो पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच विनाशकारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से परेशान थे। इस दोहरे संकट ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

भारत पर पड़ा नए आयात शुल्क का असर

इस व्यापारिक कार्रवाई की आंच भारत तक भी पहुंच गई है। अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारतीय सामानों के उत्पादन में कथित तौर पर फोर्स्ड लेबर यानी बंधुआ मजदूरी के इस्तेमाल को लेकर उपजी चिंताओं के कारण भारत पर 10% का टैरिफ लगाया गया है। यह नया फैसला शुक्रवार सुबह से लागू हो रहा है। विशेष बात यह है कि यह नया टैक्स ठीक उसी समय प्रभावी हो रहा है, जब सभी देशों से होने वाले आयात पर लगाया गया अतिरिक्त 10% का पिछला शुल्क समाप्त होने में केवल एक दिन का समय बचा था।

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घरेलू शेयर बाजार में गिरावट और फार्मा सेक्टर को झटका

अलग-अलग देशों पर लगाए गए इन टैरिफ की दरें 10% से लेकर 12.5% के बीच तय की गई हैं। हालांकि भारत को इस कर व्यवस्था के सबसे निचले पायदान यानी 10% वाले ब्रैकेट में रखा गया है, फिर भी भारतीय शेयर बाजार इस झटके से अछूता नहीं रहा। देश के प्रमुख सूचकांक Nifty 50 और Sensex दोनों में गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान दवा बनाने वाली कंपनियों यानी फार्मा सेक्टर को उठाना पड़ा। भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 2:30 बजे डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में लगभग 1% की गिरावट देखी गई, जबकि सन फार्मा का शेयर भी तकरीबन 0.6% तक नीचे फिसल गया।

आखिर शेयर बाजार और निवेशकों के लिए क्यों मायने रखते हैं टैरिफ?

व्यापारिक शुल्कों में की जाने वाली यह बढ़ोतरी शेयर बाजारों को व्यापक रूप से प्रभावित करती है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम करते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की कड़ियों को आपस में जोड़ते हैं।

पहला कारण वैश्विक कारोबारी ताने-बाने का आपस में जुड़ा होना है। आज के दौर में दुनिया भर के व्यवसाय एक-दूसरे पर निर्भर हैं। जब किसी भी देश पर आयात शुल्क लगाया जाता है, तो कंपनियों की परिचालन लागत यानी ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका सीधा असर दूसरे देशों से होने वाले आयात और निर्यात पर पड़ता है, जिससे एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है।

दूसरा महत्वपूर्ण कारण इन्फ्लेशन यानी महंगाई का बढ़ना है। जब कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ता है, तो वे इसका भार ग्राहकों पर डाल देती हैं। वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने से बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है। महंगाई बढ़ने का सीधा और सबसे तीखा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।

तीसरा कारण सेंट्रल बैंक की नीतियां हैं। दुनिया के अधिकांश प्रमुख केंद्रीय बैंकों के पास महंगाई को एक निश्चित दायरे में रखने की जिम्मेदारी होती है। उदाहरण के लिए, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का लक्ष्य महंगाई दर को 2% से ठीक नीचे रखना है, जबकि भारत में भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI का लक्ष्य इसे 2 से 6% के बीच बनाए रखना है। बढ़ती लागत के कारण केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में बढ़ोतरी जैसे कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

यही वजह है कि निवेशक आयात शुल्क से जुड़े फैसलों पर बेहद पैनी नजर रखते हैं। अगर इन टैक्सों के कारण कंपनियों का मुनाफा कम होता है, तो उनकी बैलेंस शीट और इनकम स्टेटमेंट दोनों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। इससे बाजार की धारणा कमजोर होती है और शेयर बाजार में बिकवाली का दौर शुरू हो जाता है।

क्या है अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301?

इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 यानी सेक्शन 301 कानून है। यह कानून अमेरिकी सरकार को विदेशी व्यापारिक तौर-तरीकों की जांच करने और उन पर टैक्स या आर्थिक दंड लगाने का असीमित अधिकार देता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन देशों की हरकतों पर लगाम लगाना है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का उल्लंघन करते हैं या अमेरिकी कंपनियों के हितों को नुकसान पहुंचाते हैं।

यह कानून मुख्य रूप से तीन चरणों में काम करता है

  • जांच की शुरुआत: अमेरिकी कंपनियों से शिकायत मिलने पर यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी USTR इस कानून के तहत जांच शुरू कर सकता है।
  • बातचीत का जरिया: USTR बातचीत और आपसी समझौतों के माध्यम से संबंधित देश को उन नियमों या नीतियों को बदलने के लिए राजी करने की कोशिश करता है जिन्हें वह अनुचित मानता है।
  • दंडात्मक कार्रवाई: अगर द्विपक्षीय बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अंतिम कदम के रूप में अमेरिका उस देश के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ या जुर्माना लगा देता है।

यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने इस कानून का सहारा लिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान साल 2018 में चीन के खिलाफ इसी धारा 301 का इस्तेमाल करते हुए भारी दंडात्मक शुल्क लगाए थे।

भविष्य में और बड़े झटके की आशंका

आने वाले दिनों में वैश्विक व्यापार पर टैरिफ का बोझ और बढ़ सकता है। USTR वर्तमान में दुनिया के ऐसे 16 देशों की जांच कर रहा है, जिनकी हिस्सेदारी अमेरिका में होने वाले कुल आयात में लगभग 70% है। अमेरिकी प्रशासन को संदेह है कि ये देश बहुत बड़ी मात्रा में माल का उत्पादन और निर्यात कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी बाजार में कीमतें कृत्रिम रूप से नीचे गिर रही हैं और घरेलू अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है। इस चल रही जांच के नतीजों के आधार पर भविष्य में कई और कड़े टैरिफ लगाए जा सकते हैं, जो वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल को और बढ़ा सकते हैं।

सवाल-जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति ने नए टैरिफ क्यों लगाए हैं?
डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार नीतियों में बदलाव के तहत भारत सहित 80 से अधिक देशों पर 10% से 12.5% के बीच नए आयात शुल्क लगाए हैं।
भारत पर 10% का टैरिफ क्यों लगाया गया है?
अमेरिका ने यह टैरिफ भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों के निर्माण में बंधुआ मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) के इस्तेमाल की चिंताओं को लेकर लगाया है।
इस टैरिफ का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर हुआ?
इस घोषणा के बाद Nifty 50 और Sensex में गिरावट आई, जिसमें फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। डॉ. रेड्डीज लगभग 1% और सन फार्मा 0.6% गिर गए।
अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 क्या है?
यह 1974 का एक अमेरिकी कानून है जो सरकार को दूसरे देशों की अनुचित व्यापार नीतियों की जांच करने और उन पर दंडात्मक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का इस स्थिति से क्या संबंध है?
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है, जिसने नए टैरिफ के साथ मिलकर बाजार की चिंताओं को दोगुना कर दिया है।
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