टेक्सटाइल सेक्टर की कंपनी आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड के शेयरों में गुरुवार सुबह के कारोबारी सत्र के दौरान जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एक बड़े फाइनल डिविडेंड की सिफारिश किए जाने के बाद निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इस घोषणा के असर से शेयर बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों में मजबूत लिवाली दर्ज की गई और लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे।
गुरुवार सुबह 9:41 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर आस्था स्पिनटेक्स का शेयर 9.91 प्रतिशत की बढ़त के साथ 88.37 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। शेयरों में आई इस तेजी के कारण कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 390.08 करोड़ रुपये हो गया। इंट्राडे ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में शेयर ने 88.4 रुपये प्रति शेयर का उच्चतम स्तर यानी इंट्राडे हाई और 88.35 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम स्तर यानी इंट्राडे लो छुआ। गुरुवार को बाजार खुलते ही शेयर करीब 9.9 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ ट्रेड करने लगा था।
शेयरों में तेजी का सिलसिला और पिछला प्रदर्शन
गुरुवार की यह तेजी बुधवार को शुरू हुए तेजी के सिलसिले का ही अगला चरण है। इससे पहले बुधवार के इंट्राडे कारोबारी सत्र के दौरान भी इस टेक्सटाइल शेयर में अपर सर्किट लगा था और यह 84.2 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया था। दो दिनों में लगातार आई इस तेजी से छोटी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न मिला है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो आस्था स्पिनटेक्स के शेयर ने पिछले एक हफ्ते में अपने निवेशकों को लगभग 20 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। वहीं अगर दो हफ्तों के समयांतराल की बात करें तो इस शेयर में करीब 18.7 प्रतिशत की कुल बढ़त दर्ज की गई है। शेयर की कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी की मुख्य वजह कंपनी द्वारा शेयरधारकों को डिविडेंड के रूप में पूंजी लौटाने का ऐलान है, जिससे बाजार में निवेशक काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
100 प्रतिशत फाइनल डिविडेंड प्रस्ताव का विवरण
शेयर की कीमतों में आए इस उछाल का मुख्य कारण आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लिया गया डिविडेंड संबंधी फैसला है। कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए 100 प्रतिशत तक के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश को मंजूरी दी है।
आस्था स्पिनटेक्स के एक इक्विटी शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। ऐसे में 100 प्रतिशत डिविडेंड का मतलब है कि पात्र शेयरधारकों को प्रति इक्विटी शेयर 10 रुपये तक का डिविडेंड दिया जाएगा। कंपनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स कंपनी की सफलता का एक हिस्सा रिजर्व और सरप्लस फंड से सीधे शेयरधारकों को लौटाना चाहता है। इसी उद्देश्य से इस डिविडेंड भुगतान का प्रस्ताव रखा गया है।
रिकॉर्ड डेट और शेयरधारकों की पात्रता के नियम
डिविडेंड भुगतान के लिए पात्र शेयरधारकों की पहचान करने के उद्देश्य से कंपनी के बोर्ड ने बुधवार, 9 सितंबर को रिकॉर्ड डेट तय किया है। रिकॉर्ड डेट वह कट ऑफ तारीख होती है जिस दिन तक कंपनी के शेयरधारक रजिस्टर में नाम होना अनिवार्य होता है।
जो निवेशक डिविडेंड का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें रिकॉर्ड डेट यानी 9 सितंबर से पहले कंपनी के शेयर अपने डिमैट खाते में खरीदने होंगे। 9 सितंबर या उसके बाद शेयर खरीदने वाले निवेशक इस डिविडेंड के हकदार नहीं होंगे। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 16 सितंबर 2026 को होने वाली आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से पहले पात्र निवेशकों की सूची तैयार करने के लिए ही 9 सितंबर की तारीख को रिकॉर्ड डेट घोषित किया गया है।
एजीएम की तारीख और मंजूरी की प्रक्रिया
यद्यपि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने डिविडेंड प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसका अंतिम भुगतान शेयरधारकों की सहमति पर निर्भर करेगा। कंपनी ने अपनी आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) की तारीख 16 सितंबर 2026 तय की है। इस बैठक में शेयरधारक बोर्ड द्वारा प्रस्तावित डिविडेंड पर अपनी अंतिम मंजूरी देंगे।
यदि 16 सितंबर 2026 को आयोजित एजीएम में शेयरधारक इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे देते हैं, तो कंपनी 9 सितंबर की रिकॉर्ड डेट के आधार पर तय किए गए सभी पात्र निवेशकों के खातों में डिविडेंड राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। कॉर्पोरेट नियमों के तहत बोर्ड की सिफारिश के बाद एजीएम में शेयरधारकों की मंजूरी मिलना एक आवश्यक कानूनी चरण होता है।
कंपनी अधिनियम और सेबी के नियम
प्रस्तावित डिविडेंड का वितरण देश के कॉर्पोरेट कानूनों और सेबी के दिशा-निर्देशों के तहत ही पूरा किया जाएगा। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि यह डिविडेंड भुगतान कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 123 के तहत वितरण योग्य लाभों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
इसके साथ ही, डिविडेंड की यह प्रक्रिया भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी के (LODR) नियमों के पूर्ण अनुपालन के अधीन होगी। इन कानूनी और नियामक शर्तों का पालन यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी अपने रिजर्व फंड से डिविडेंड बांटते समय सभी वित्तीय और कॉर्पोरेट मानकों को पूरा कर रही है।



















