ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीमापार आवाजाही पर लगी रोक के कारण परेशानी झेल रहे पाकिस्तानी हिंदू परिवारों को बड़ी राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित शदाणी दरबार ने लगभग 600 पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए विशेष वीजा की सिफारिश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाने वाली एक नई सूची तैयार की है। इससे पहले संस्थान के प्रयासों से अप्रैल से जून के बीच करीब 150 पाकिस्तानी हिंदू दुल्हनें भारत पहुँच चुकी हैं, जिनकी शादियां भारतीय नागरिकों से तय हुई थीं या हो चुकी थीं।
नई सूची में कौन-कौन शामिल हैं?
शदाणी दरबार द्वारा तैयार की गई 600 लोगों की इस दूसरी सूची में उन युवतियों को प्राथमिकता दी गई है जिनकी सगाई या विवाह भारत में तय हो चुका है। इसके अलावा, इस सूची में उनके निकट संबंधी तथा विभाजन के समय से दोनों देशों के बीच बंटे परिवारों के सदस्य भी शामिल हैं। संस्था के अनुसार, इस बार केवल सिंधी समुदाय के लोग ही नहीं, बल्कि मारवाड़ी, गुजराती, सरायकी और अन्य हिंदू समुदायों के नागरिक भी वीजा की प्रतीक्षा सूची में रखे गए हैं। सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है, जिसके बाद इसे मंजूरी के लिए सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपा जाएगा।
विभाजन के दशकों बाद भी बंटे परिवारों को जोड़ने की पहल
शदाणी दरबार के सचिव उदयलाल शदाणी के अनुसार, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी संस्था का ऐतिहासिक पीठ स्थित है। संस्थान के नौवें पीठाधीश संत युधिष्ठिरलाल, जो वर्ष 1968 से रायपुर में निवास कर रहे हैं, लगातार इन परिवारों की मदद के लिए प्रयासरत हैं। उनके मार्गदर्शन में ही पहली खेप के तहत 150 दुल्हनों का वीजा मामला गृह मंत्रालय के समक्ष उठाया गया था और उन्हें भारत आने की अनुमति मिली थी। संत युधिष्ठिरलाल ने बताया कि 1947 के विभाजन के कई दशक बीत जाने के बावजूद कई परिवारों के सदस्य दोनों देशों में अलग-अलग रह रहे हैं। किसी परिवार का एक सदस्य भारत में बस गया, तो उसके माता-पिता या भाई-बहन पाकिस्तान में ही छूट गए। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सीधी यात्रा ठप होने से इनका मिलना बेहद कठिन हो गया था, जिसे सुलभ बनाने के लिए यह पहल की जा रही है।
अटारी-वाघा सीमा बंद होने से वैकल्पिक हवाई मार्गों का सहारा
भारत और पाकिस्तान के बीच मुख्य सड़क मार्ग अटारी-वाघा सीमा बंद होने के कारण विशेष वीजा मिलने के बाद भी सीधे भारत में प्रवेश करना संभव नहीं है। यही कारण है कि पहली खेप में आई 150 दुल्हनों को भारत पहुँचने के लिए खाड़ी और एशियाई देशों के लंबे हवाई मार्गों का सहारा लेना पड़ा था। इन दुल्हनों ने मस्कट, ढाका, कोलंबो, दुबई और कतर जैसे तीसरे देशों के रास्ते भारत की यात्रा पूरी की थी। शदाणी दरबार के अधिकारियों का कहना है कि जब तक थल सीमा मार्ग नहीं खुल जाते, तब तक नई सूची के 600 लोगों को भी भारत आने के लिए इन्हीं वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों का उपयोग करना पड़ सकता है।




















