अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में जापानी येन (JPY) के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD) की मजबूती लगातार बनी हुई है। USD/JPY करेंसी पेयर 160.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है और 160.20 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले बंद स्तर 159.75 से 0.28 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। जुलाई के उत्तरार्ध (31 जुलाई) के बाद से यह इस जोड़ी का उच्चतम स्तर है। हालांकि एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 160.50 के स्तर के पास थोड़ी सुस्ती देखी गई, लेकिन व्यापक तेजी का रुझान अब भी बरकरार है। जापान की राजकोषीय चुनौतियों और बैंक ऑफ जापान (BoJ) तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बीच ब्याज दरों के व्यापक अंतर ने जापानी येन पर लगातार दबाव बनाए रखा है।
जापानी येन पर दबाव और कैरी ट्रेड की भूमिका
जापान और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का बड़ा अंतर निवेशकों को JPY कैरी ट्रेड की ओर आकर्षित कर रहा है। निवेशक कम ब्याज दर वाली करेंसी येन में कर्ज लेकर उच्च प्रतिफल वाली संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं, जिससे येन की विनिमय दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा निकट भविष्य में अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें डॉलर की ऊपरी बढ़त को कुछ हद तक सीमित कर रही हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारी शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फॉर्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व के अगले कदमों का संकेत मिलेगा।
तकनीकी संकेतक और मुख्य सपोर्ट व रेजिस्टेंस स्तर
तकनीकी चार्ट पर USD/JPY का रुझान काफी सकारात्मक बना हुआ है। 4-घंटे के चार्ट पर यह पेयर 200-पीरियड सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के ऊपर मजबूत स्थिति में है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 54 के स्तर पर बना हुआ है, जबकि 14-दिन का ADX 37 पर है, जो एक मजबूत ट्रेंड की ओर इशारा करता है। वहीं MACD इंडिकेटर -0.21 पर है, जो सिग्नल लाइन -0.44 के ऊपर और हिस्टोग्राम 0.23 के साथ बुलिश क्रॉसओवर प्रदर्शित कर रहा है। मूविंग एवेरजेज में 20-डे EMA 159.60, 50-डे EMA 160.04 और 200-डे EMA 157.83 पर स्थित है। 50-डे EMA का 200-डे EMA से ऊपर होना (गोल्डन क्रॉस) लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है।
गिरावट की स्थिति में USD/JPY के लिए 159.62 पर स्थित 50.0 प्रतिशत फिबोनाची (Fibo) रिट्रेसमेंट पहला मजबूत सपोर्ट जोन प्रदान करता है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो अगला सपोर्ट 38.2 प्रतिशत फिबोनाची स्तर यानी 158.59 के आसपास होगा। इसके बाद 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट का 157.32 का स्तर महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। ऊपर की ओर, तत्काल पिवट बिंदु 160.23 है, जबकि पहला रेजिस्टेंस R1 160.36 और R2 160.52 पर है। इस पेयर की 52-सप्ताह की रेंज 146.22 से 163.98 के बीच रही है।
जीबीपी और यूरो पर अमेरिकी डॉलर का दबाव
ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई तेजी का असर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर भी साफ देखा जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) दबाव में आकर 1.3500 के निचले स्तरों की ओर खिसक गया है, जो दो सप्ताह का निचला स्तर है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसी तरह, यूरो (EUR/USD) में भी गिरावट दर्ज की गई है। EUR/USD पेयर 1.1600 के प्रमुख सपोर्ट स्तर को तोड़कर नीचे आ गया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए मिश्रित आंकड़ों के बावजूद डॉलर में आई रिकवरी ने यूरो की विनिमय दर को प्रभावित किया है। पिछले 30 दिनों के मुद्रा प्रदर्शन सूचकांक के अनुसार जापानी येन न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूत रहा, लेकिन अमेरिकी डॉलर के सामने इसे लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
मध्य पूर्व में सैन्य तनाव और क्रूड ऑयल में रिकॉर्ड तेजी
विदेशी मुद्रा बाजार के अलावा ऊर्जा और जिंस बाजारों में भी बड़ा हलचल देखने को मिल रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन्य बलों ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के तहत केसम द्वीप (Qeshm Island), हॉर्मूज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास के क्षेत्रों और दक्षिणी ईरान में बड़े धमाकों की खबर है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज करते हुए 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। पिछले छह कारोबारी दिनों में से पांच दिन क्रूड ऑयल में सकारात्मक रुझान देखा गया है। वहीं, रिफाइनिंग सेक्टर में डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम) इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया और इंट्राडे ट्रेडिंग में $102.00 के रिकॉर्ड स्तर तक जा पहुंचा।
सोने की कीमतों में गिरावट और महंगाई की आशंका
सैन्य संघर्ष और महंगे ईंधन के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ने का जोखिम गहरा गया है। इस वजह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने या दरों में और वृद्धि करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। इसका सीधा असर सोने के बाजार पर पड़ा है।
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर लगभग चार सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया और $4,300 प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसलने की कगार पर पहुंच गया। निवेशक बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती को देखते हुए बुलियन मार्केट से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं में बिकवाली देखी जा रही है।



















