अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल इस समय दो विपरीत ताकतों के बीच फंसी हुई नजर आ रही है। एक तरफ वैश्विक स्तर पर आधिकारिक क्षेत्र यानी केंद्रीय बैंकों की मजबूत और निरंतर खरीदारी पीली धातु को ऊंचे स्तरों पर भी ढांचागत सहारा दे रही है, तो दूसरी तरफ तकनीकी चार्ट्स पर बनावट बिगड़ने से बिकवाली का दबाव हावी हो रहा है। तकनीकी पैमाने पर 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के ऊपर टिकने में मिली नाकामी के बाद कई महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर खतरा मंडराने लगा है, जिससे बाजार में गिरावट का जोखिम बढ़ गया है।
केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी बनी बाजार का आधार
कमोडिटी विश्लेषकों वारेन पैटरसन और एवा मोंथे के नेतृत्व वाली आईएनजी की टीम का आकलन है कि आधिकारिक क्षेत्र की लगातार मांग मौजूदा सोने के बाजार की रीढ़ साबित हो रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से साफ पता चलता है कि अगस्त महीने में केंद्रीय बैंक शुद्ध खरीदार बने रहे। इस दौरान उन्होंने अपने भंडारों में कुल 39 टन सोना जोड़ा, जिसके साथ ही वर्ष की शुरुआत से अब तक की कुल शुद्ध खरीदारी का आंकड़ा 170 टन पर पहुंच गया है।
अगस्त के खरीद आंकड़ों में चीन ने 20 टन सोने की खरीदारी के साथ सबसे बड़ी भूमिका निभाई। इसके साथ ही चीन की लगातार खरीदारी का यह सिलसिला अब 22 महीनों तक खिंच चुका है। इसी महीने पोलैंड और उजबेकिस्तान दोनों ने भी अपने-अपने विदेशी मुद्रा भंडारों में 8-8 टन सोना जोड़कर इस मांग को गति दी।
विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों का यह कदम किसी अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह उनकी दीर्घकालिक रणनीतिक योजना का हिस्सा है। उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने भंडारों में विविधीकरण लाने के उद्देश्य से सोना जमा कर रहे हैं। आईएनजी के अनुसार, यह आधिकारिक मांग आने वाले महीनों में भी सोने की कीमतों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सहारा बनी रहेगी और तेज गिरावट के समय एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगी।
तकनीकी चार्ट पर $4,095 और $3,940 के स्तरों का इम्तिहान
ढांचागत मांग के विपरीत चार्ट आधारित तकनीकी विश्लेषण कमजोर रुझान की ओर इशारा कर रहा है। सोने की कीमतें हालिया सत्रों में फिसलकर दबाव में कारोबार कर रही हैं। लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक गोल्ड फ्यूचर्स $4,139 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले बंद भाव $4,187 के मुकाबले 1.14% की गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा $3,901 से $5,586 के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिन के औसत का 0.32 गुना दर्ज किया गया है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 34 के स्तर पर है, जो कमजोरी दिखा रहा है। एमएसीडी -69.92 पर है जो सिग्नल लाइन -53.09 से नीचे रहकर मंदी का रुझान स्पष्ट कर रहा है। मूविंग एवरेजेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए $4,270, 50-दिवसीय ईएमए $4,325 और 200-दिवसीय ईएमए $4,439 पर है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए $4,372 और 200-दिवसीय एसएमए $4,550 पर मौजूद है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे आने के कारण चार्ट पर डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। बोलिंगर बैंड्स $4,088 से $4,492 के बीच फैले हैं और 14-दिवसीय एटीआर 90.30 पर है। पिवट पॉइंट $4,157 के पास है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस $4,180 और दूसरा $4,220 पर है, जबकि सपोर्ट स्तर $4,117 और $4,095 पर बने हुए हैं।
सोसाइटी जेनेराल के चार्ट विश्लेषण के अनुसार, यदि बाजार $4,095 के अहम सपोर्ट को बचाने में असमर्थ रहता है, तो बिकवाली की रफ्तार $4,000 की तरफ बढ़ सकती है। इसके बाद जून और जुलाई के निचले स्तर यानी $3,960 से $3,940 का दायरा खुल सकता है। यह क्षेत्र कई महीनों के कारोबारी दायरे की निचली सीमा है। आईएनजी और सोसाइटी जेनेराल दोनों ही केंद्रीय बैंकों की मांग को अहम मानते हैं, लेकिन उनके नजरिये में फर्क है। आईएनजी का मानना है कि मजबूत भौतिक मांग भारी गिरावट को सीमित रखेगी, जबकि सोसाइटी जेनेराल का कहना है कि तकनीकी ब्रेकडाउन के आगे भौतिक मांग गिरावट की रफ्तार धीमी तो कर सकती है, पर निकट अवधि में कीमतों की दिशा चार्ट पैटर्न्स ही तय कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक करेंसी बाजारों का रुख
सोने पर यह दबाव व्यापक वित्तीय परिदृश्य में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच देखने को मिल रहा है। निवेशक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के विवरण यानी एफओएमसी मिनट्स के जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। इस अनिश्चितता के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने डॉलर को निचले स्तरों पर खरीदारों का समर्थन दिलाया है, जिससे सोने में मंगलवार को दर्ज की गई बढ़त बुधवार को धुल गई और यह $4,180 के स्तर से फिसलकर $4,120 के नीचे पहुंच गया।
मुद्रा बाजार में भी डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं पर दबाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के नीचे दबाव में रही, जहां रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी सख्त नीतिगत उम्मीदों के बावजूद बॉन्ड यील्ड की तेजी हावी रही। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर के पास बनी रही, जहां बैंक ऑफ जापान के नरम बयानों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के उछाल ने डॉलर को बल दिया।
भारतीय रुपये में भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद डॉलर-रुपया (USD/INR) उछलकर 96.72 के करीब पहुंच गया, जो चार महीनों का उच्चतम स्तर है। इस बैठक में आरबीआई ने अपनी रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है। वहीं यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक कठिन दुविधा से जूझ रहा है, जहां मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी चल रही है और बॉन्ड मार्केट पहले ही वित्तीय परिस्थितियों को सख्त कर रहा है। क्रिप्टो बाजार में भी मंदी का दबाव बढ़ा है, जहां डॉगकॉइन 5% से अधिक टूटकर $0.090 के करीब आ गया है और शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।




















