वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में जूझता हुआ नजर आया। पिछले सत्रों में हल्की रिकवरी दर्ज करने के बावजूद यह करेंसी पेयर 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आए नए उछाल ने ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया है, जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर लगातार दबाव बना हुआ है। बाजार के प्रतिभागी अब आने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC की बैठक के ब्योरे पर टिकी निगाहों के साथ अपनी पोजीशन बना रहे हैं।
तकनीकी स्तर और 24 घंटे का कारोबारी परिदृश्य
कीमतों के अल्पकालिक दायरे पर नजर डालें तो पिछले कारोबारी दिन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 0.6972 पर बंद हुआ था। शुरुआती अनुमानों में यह संकेत मिले थे कि तेजी की गति इतनी मजबूत नहीं है जो लगातार टिकाऊ उछाल दे सके। उस समय संभावना जताई गई थी कि यह मुद्रा 0.6945 से 0.6985 के दायरे में सीमित रहेगी और 0.6985 के ऊपर स्पष्ट ब्रेकआउट मिलना कठिन होगा। हालांकि, बाजार की वास्तविक हलचल उम्मीद से थोड़ी अलग रही। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बढ़त दर्ज करते हुए 0.6990 तक पहुंचा और अंततः 0.18 प्रतिशत की दैनिक तेजी के साथ 0.6984 के स्तर पर बंद हुआ।
फिलहाल तेजी की गति अभी भी बेहद सतर्क बनी हुई है। आने वाले 24 घंटों में यह अपेक्षा की जा रही है कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6965 से 0.6995 के दायरे में हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर सकता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, यह पेयर 0.6969 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि इसका पिछला बंद 0.6967 था जो 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान इसका दायरा 0.6422 से 0.7277 रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 34 के स्तर पर है, जबकि MACD हिस्टोग्राम नकारात्मक बना हुआ है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय EMA 0.7035, 50-दिवसीय EMA 0.7065 और 200-दिवसीय EMA 0.6968 पर स्थित हैं। इसके अलावा 50-दिवसीय SMA 0.7091 और 200-दिवसीय SMA 0.7033 दर्ज किए गए हैं, जो दीर्घकालिक चार्ट पर गोल्डन क्रॉस संरचना को दर्शाते हैं। बोलिंजर बैंड्स 0.6891 से 0.7225 के बीच बने हैं और पिवट स्तर 0.6974 पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 0.6981 तथा दूसरा रेजिस्टेंस 0.6993 है, जबकि सपोर्ट स्तर क्रमशः 0.6962 और 0.6956 पर मौजूद हैं।
लंबी अवधि का दृष्टिकोण: मंदी से तटस्थ रुख की ओर बदलाव
एक से तीन सप्ताह के मध्यमकालिक नजरिए पर विचार करें तो पिछले महीने के मध्य से बना नकारात्मक रुझान अब धीरे-धीरे धीमा पड़ चुका है। बीते शुक्रवार यानी 02 अक्टूबर को, जब हाजिर भाव 0.6930 पर था, तब यह संकेत मिले थे कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में किसी भी तरह की संभावित गिरावट 0.6866 के अहम सपोर्ट स्तर से पहले ही थम सकती है। इसके बाद 06 अक्टूबर को, जब भाव 0.6970 पर था, नीचे की ओर दबाव कमजोर पड़ता दिखाई दिया और यह माना गया कि यदि भाव 0.6985 के कड़े रेजिस्टेंस को तोड़ता है तो 0.6866 का स्तर पहुंच से बाहर हो जाएगा।
इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने 0.6985 का रेजिस्टेंस पार करते हुए 0.6990 का उच्चतम स्तर छू लिया। इस रुकावट के टूटने के साथ ही मध्यमकालिक नजरिया मंदी से बदलकर अब पूरी तरह तटस्थ हो चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि अब यह करेंसी पेयर व्यापक रूप से 0.6935 से 0.7020 के विस्तृत दायरे में झूलता रहेगा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों के बावजूद अमेरिकी डॉलर में निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से इस पेयर की बढ़त सीमित हो रही है।
जापानी येन, सोना और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
वैश्विक करेंसी बाजार में अन्य मुद्राओं में भी डॉलर की मजबूती का सीधा असर देखा जा रहा है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में USD/JPY पेयर डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर 158.50 के करीब बना रहा। बैंक ऑफ जापान यानी BoJ की ओर से आए नरम बयानों और अमेरिकी यील्ड में ताजा तेजी ने डॉलर की मांग बढ़ाई है, जिसके चलते तेजी के पक्षधर निवेशक 200-दिवसीय SMA की बाधा को पार करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कमोडिटी बाजार में सोने पर भी डॉलर की मजबूती का गहरा असर पड़ा है। यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक सोने में इंट्राडे मंदी का रुख बना रहा और कीमतें पिछले दिन छुए गए दो महीने के निचले स्तर 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास मंडराती नजर आईं। अमेरिकी डॉलर में मंगलवार की सुधारात्मक गिरावट के बाद लौटी नई खरीदारी ने बहुमूल्य धातुओं पर दबाव बनाए रखा है, और निवेशक आगामी FOMC मिनट्स से मिलने वाले नीतिगत दिशा-निर्देशों पर नजरें गड़ाए हुए हैं। दूसरी तरफ, क्रिप्टो बाजार में डॉगकॉइन पर बिकवाली हावी रही और यह 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर 0.090 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा, जहां शॉर्ट पोजीशंस एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने से तकनीकी संकेतक आगे और नुकसान का अंदेशा जता रहे हैं।
भारतीय रुपया और केंद्रीय बैंकों के सामने नीतिगत चुनौतियां
एशियाई बाजारों में भारतीय रुपये में भी अमेरिकी डॉलर के सामने तेज कमजोरी दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की बुधवार को संपन्न हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रुपये की प्रतिक्रिया सुस्त रही और USD/INR पेयर उछलकर 96.72 के करीब पहुंच गया, जो बीते चार महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इस नीतिगत बैठक में RBI ने रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया, जो फरवरी 2023 के बाद की गई पहली ब्याज दर वृद्धि है। इसके बावजूद डॉलर इंडेक्स में लौटी मजबूती ने रुपये पर दबाव बनाए रखा।
यूरोप की बात करें तो यूरोपियन सेंट्रल बैंक यानी ECB एक जटिल नीतिगत असमंजस का सामना कर रहा है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति अपने तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो केंद्रीय बैंक का स्वाभाविक कदम ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन मौजूदा दौर में बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती का एक बड़ा हिस्सा खुद लागू कर चुका है, जिससे ECB के नीति-निर्माताओं के सामने आर्थिक स्थिरता और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन साधने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
























