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सोने में 4000 डॉलर के पार तेजी के बीच विशेषज्ञ बंटे, क्या 3500 डॉलर तक फिसलेगी पीली धातुबाज़ार
4 नव॰ 2026, 4:17 pm (4 मिनट पहले)· 0

सोने में 4000 डॉलर के पार तेजी के बीच विशेषज्ञ बंटे, क्या 3500 डॉलर तक फिसलेगी पीली धातु

बुधवार को सोना 4,000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक आंकड़ा पार कर गया, हालांकि 17.5 फीसदी की हालिया गिरावट के बाद विश्लेषकों में आगे की दिशा को लेकर भारी मतभेद देखने को मिल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बुधवार को उल्लेखनीय रिकवरी देखने को मिली और यह महत्वपूर्ण 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर निकलने में सफल रहा। इस उछाल से पहले बहुमूल्य धातु ने एक असहज तकनीकी पड़ाव को छुआ था, जब अपने अंतिम शीर्ष स्तर से मौजूदा गिरावट 17.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। तकनीकी रूप से यह गिरावट ठीक वैसी ही है जैसी 2013 के बड़े बाजार क्रैश से ठीक पहले दर्ज की गई थी। इसके बाद बाजार विश्लेषकों के बीच आगे के रुझान को लेकर राय दो स्पष्ट धड़ों में बंट गई है। एक आकलन के अनुसार यदि 2013 का ऐतिहासिक पैटर्न दोहराया गया तो सोना फिसलकर 3,500 डॉलर तक आ सकता है, जबकि अन्य विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों और ईटीएफ की रिकॉर्ड खरीदारी कीमतों को मजबूत सहारा देगी।

2013 का मंदी पैटर्न बनाम संस्थागत मांग

बाजार के भीतर यह गहरा मतभेद मुख्य रूप से अलग-अलग समय सीमाओं के तकनीकी और बुनियादी विश्लेषण पर आधारित है। विश्लेषक राडोम्स्की के 2013 के ऐतिहासिक मॉडल के आधार पर तैयार की गई रूपरेखा आगाह करती है कि कीमतों में ब्रेकडाउन का यह मौजूदा चरण अभी खत्म नहीं हुआ है। इस तकनीकी दृष्टिकोण के अनुसार, गिरावट का अगला पड़ाव 3,500 डॉलर का स्तर हो सकता है और सोने की कीमतों में वास्तविक स्थिरता 3,000 डॉलर के निचले दायरे में आने से पहले नहीं दिखेगी। 2013 के उस दौर में भी इसी तरह की 17.5 प्रतिशत की शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में बहुत भारी बिकवाली शुरू हुई थी, जिसने कई वर्षों तक बुलियन बाजार को दबाव में रखा था।

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दूसरी ओर, विश्लेषक दुआ और महारे का दृष्टिकोण इसके ठीक विपरीत है। वे इस गिरावट को एक ऐसे बाजार के रूप में देखते हैं जो भारी तकनीकी समायोजन के बीच भी रिकॉर्ड संरचनात्मक मांग को समाहित कर रहा है। उनका तर्क है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा बुलियन भंडारों की अभूतपूर्व खरीद और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में निरंतर हो रहा निवेश कीमतों को एक मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। इन विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बुनियादी मांग इतनी मजबूत है कि वह 2013 जैसी एकतरफा मंदी की पुनरावृत्ति को रोक सकती है। इसके साथ ही एक वर्ष का निचला स्तर यानी 3,870 डॉलर का स्तर बाजार के लिए एक निर्णायक तकनीकी तल के रूप में काम कर रहा है, जिस पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और राजनीतिक अनिश्चितता का प्रभाव

बुधवार के कारोबारी सत्र में सोने को मिले नए समर्थन के पीछे राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी की अहम भूमिका रही है। शुरुआती यूरोपीय कारोबार के दौरान पीली धातु अपने साप्ताहिक उच्च स्तर के करीब मजबूती से टिकी रही और 4,000 डॉलर के स्तर से ऊपर बनी रही। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती मतगणना रुझानों ने वॉशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की संभावना बढ़ा दी है। हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत के संकेतों ने सत्ता संतुलन में कड़े टकराव की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है।

वॉशिंगटन में संभावित नीतिगत गतिरोध और बढ़ती राजनीतिक उथल-पुथल ने वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने की भावना पैदा की, जिससे निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख करने लगे। इस रुझान ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर नीचे की ओर दबाव बनाया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई इस ताजा गिरावट ने ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर को कमजोर कर दिया, जिसका सीधा लाभ सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों को मिला और इसकी कीमतों को निचली सतह से ऊपर चढ़ने में मदद मिली।

मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और डॉलर की कमजोरी

अमेरिकी डॉलर के व्यापक दबाव में आने का असर केवल सोने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले भी इसका असर साफ दिखा। एशियाई सत्र में डॉलर एक महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया, जिसके चलते USD/JPY जोड़ी पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया और यह 158.00 के स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव की मतगणना से पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने येन के मुकाबले डॉलर को कमजोर बनाए रखा।

इसी तरह, AUD/USD जोड़ी दो सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए एशियाई सत्र के दौरान 0.6965 के आसपास स्थिर रही। हालांकि, डॉलर की सामान्य कमजोरी और सुरक्षित निवेश मांग ने इस जोड़ी को सहारा दिया, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित करने का काम किया। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों के बीच घटती यील्ड और राजनीतिक अस्थिरता ने मुद्रा बाजार में मिला-जुला माहौल तैयार कर दिया है।

रोजगार आंकड़े तय करेंगे बुलियन का अगला रुख

आने वाले दिनों में बुलियन बाजार का संतुलन किस ओर झुकेगा, इसका वास्तविक फैसला अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों से होगा। ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग (ADP) रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा अक्टूबर के निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़े जारी किए जाने हैं। बाजार की आम सहमति रोजगार सृजन में मध्यम गति की गिरावट का अनुमान लगा रही है, जहां ADP रोजगार बदलाव सितंबर के 90,000 से घटकर अक्टूबर में 69,000 नए निजी नौकरियों पर आने की उम्मीद जताई गई है।

इसके तुरंत बाद शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल (NFP) रिपोर्ट वह मुख्य निर्णायक बिंदु होगी जो तय करेगी कि दोनों विश्लेषक खेमों में से किसकी बात सही साबित होती है। यदि शुक्रवार की NFP रिपोर्ट श्रम बाजार में अप्रत्याशित मजबूती दर्शाती है, तो 3,870 डॉलर के स्तर के टूटने का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे 3,500 डॉलर की मंदी की थ्योरी को बल मिलेगा। इसके विपरीत, रोजगार में सुस्ती का संकेत मिलने पर केंद्रीय बैंक और ईटीएफ समर्थित तेजी का पक्ष मजबूत होगा, जिससे 4,000 डॉलर के ऊपर सोने की स्थिति और पक्की हो सकती है।

सवाल-जवाब

सोने की कीमत में 4000 डॉलर के पार उछाल क्यों आया?
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राजनीतिक गतिरोध की संभावना से पैदा हुई अनिश्चितता ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ाई, जिससे बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट आई और सोने को सहारा मिला।
सोने के 3500 डॉलर तक गिरने की आशंका क्यों जताई जा रही है?
विश्लेषक राडोम्स्की के अनुसार, अपने शीर्ष से 17.5 फीसदी की गिरावट 2013 के क्रैश की पुनरावृत्ति दर्शाती है, जिसका अगला गिरावट का लक्ष्य 3,500 डॉलर हो सकता है।
किन विश्लेषकों का मानना है कि सोने की गिरावट सीमित रहेगी?
विश्लेषक दुआ और महारे का मानना है कि केंद्रीय बैंकों और ईटीएफ की रिकॉर्ड खरीदारी बाजार में संरचनात्मक सहारा दे रही है, जिससे भारी मंदी टल सकती है।
सोने के लिए कौन सा निचला स्तर सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
बाजार विशेषज्ञ 3,870 डॉलर के एक वर्षीय निचले स्तर को एक महत्वपूर्ण तकनीकी सीमा मान रहे हैं, जो तय करेगा कि 2013 जैसा पतन दोहराया जाएगा या नहीं।
अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से क्या उम्मीदें हैं?
अक्टूबर के एडीपी निजी रोजगार आंकड़े में 69,000 नौकरियों की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो सितंबर के 90,000 के आंकड़े से कम है।
शुक्रवार की गैर-कृषि पेरोल (NFP) रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
शुक्रवार की एनएफपी रिपोर्ट यह पुष्टि करेगी कि क्या सोना मंदी के दबाव में 3,500 डॉलर की ओर बढ़ेगा या बुनियादी मांग के चलते मजबूती बनाए रखेगा।
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