ग्लोबल फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में इस समय मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। एक तरफ विकसित अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर सख्त मौद्रिक नीति का दबाव बना हुआ है, तो दूसरी तरफ जापान को छोड़कर एशियाई बाजारों को कच्चे तेल की कीमतों में मिली राहत से सहारा मिल रहा है। अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक मंगलवार से शुरू हो रही है, जिससे ठीक पहले निवेशकों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। इसी वजह से अमरीकी डॉलर वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अपने एक महीने के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है।
फेडरल रिजर्व की नीति और अप्रत्याशित ब्याज दर वृद्धि की संभावना
मुद्रा बाजार के रणनीतिकारों और निवेशकों का मुख्य ध्यान अमरीकी केंद्रीय बैंक के आगामी कदमों पर केंद्रित है। वायदा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, निवेशक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श की अध्यक्षता में होने जा रही दूसरी एफओएमसी बैठक में ब्याज दरों में अचानक बढ़ोतरी की 38 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। मौद्रिक नीति में इस संभावित अप्रत्याशित बदलाव की संभावना ने वित्तीय बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह अमरीका में महंगाई और आर्थिक स्थिति को लेकर बनी चिंताओं को दर्शाती है।
अगर अमरीकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने का यह अप्रत्याशित फैसला लिया जाता है, तो इसका असर डॉलर सूचकांक पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। वित्तीय विश्लेषणों के मुताबिक, यदि ब्याज दरों में यह सरप्राइज हाइक होता है, तो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमरीकी मुद्रा की ताकत को मापने वाला DXY बास्केट दबाव में आ सकता है और इसमें गिरावट देखने को मिल सकती है। इस स्थिति को देखते हुए संस्थागत निवेशक और ट्रेडर्स केंद्रीय बैंक के फैसले से पहले अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने में जुटे हुए हैं।
यूरो और पाउंड पर अमरीकी डॉलर की मजबूती का असर
अमरीकी डॉलर की लगातार बनी हुई मजबूती के कारण मंगलवार को यूरोपीय ट्रेडिंग सेशन के दौरान प्रमुख करेंसी पेयर्स पर गिरावट का दबाव देखा गया। ब्रिटिश पाउंड और अमरीकी डॉलर का जोड़ (GBP/USD) 1.3300 के स्तर के आसपास रक्षात्मक स्थिति में कारोबार कर रहा है। फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक के परिणाम सामने आने से पहले निवेशक नए बड़े सौदे करने से बच रहे हैं, जिससे पाउंड में किसी भी बड़े सुधार की गुंजाइश सीमित हो गई है।
दूसरी ओर, यूरो और अमरीकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) भी अपने एक महीने के निचले स्तर के पास स्थिर होने की कोशिश कर रही है। मंगलवार की सुबह यूरोपीय बाजारों में यह करेंसी पेयर 1.1300 के मध्य स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा था। अमरीकी डॉलर की मजबूत मांग के कारण यूरो में बढ़त दर्ज नहीं हो पा रही है। ट्रेडर्स एफओएमसी की दो दिवसीय बैठक का आधिकारिक परिणाम आने तक किसी भी दिशा में आक्रामक रुख अपनाने से कतरा रहे हैं।
विकसित और एशियाई बाजारों में अलग-अलग रुझान
रातों-रात हुए वैश्विक कारोबार में विकसित देशों और जापान को छोड़कर अन्य एशियाई देशों की मुद्राओं के बीच अलग-अलग थीम देखने को मिली। जहां विकसित देशों की करेंसी पर केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों का असर रहा, वहीं एशिया-एक्स जापान क्षेत्र में कच्चे तेल के दामों में आई कमी से स्थानीय बाजारों को राहत मिली। कच्चे तेल की सस्ती दरों ने ऊर्जा आयातक एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को अमरीकी डॉलर की मजबूती से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचाया है।
मंगलवार को फेडरल रिजर्व की बैठक शुरू होने के साथ ही करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव एक सीमित दायरे में रहने का अनुमान है। जब तक अमरीकी केंद्रीय बैंक भविष्य की ब्याज दरों के संबंध में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता, तब तक वैश्विक मुद्रा बाजार में अमरीकी डॉलर का दबदबा कायम रहने की संभावना है।



















