वैश्विक ऊर्जा पारगमन मार्गों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई जोरदार तेजी ने कनाडाई डॉलर जैसी ऊर्जा-निर्यात आधारित मुद्राओं को नया मजबूती का आधार प्रदान किया है, जबकि अमरीकी डॉलर पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स के भाव हालिया कारोबारी सत्रों के दौरान 92.34 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुँच जाने के कारण ऊर्जा बाजार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संभावित संकट और आपूर्ति में होने वाली बाधाओं को ध्यान में रखकर ट्रेडिंग कर रहे हैं। कनाडा चूंकि दुनिया के प्रमुख पेट्रोलियम निर्यातकों में शामिल है, इसलिए कच्चे तेल के ऊंचे दामों से देश के व्यापार संतुलन को सीधे तौर पर लाभ मिलता है। दूसरी ओर, अमरीका में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े जारी होने से पहले अमरीकी डॉलर में नरमी का रुख बना हुआ है, जिससे USD/CAD करेंसी पेयर में गिरावट दर्ज की गई है।
कच्चे तेल में तेजी और ऊर्जा निर्यात लाभ से कनाडाई डॉलर को मिला समर्थन
विदेशी मुद्रा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और कनाडाई डॉलर के बीच का संबंध एक बार फिर मुख्य भूमिका में आ गया है। कच्चे तेल का भाव पिछले बंद भाव 91.48 डॉलर से 0.94 प्रतिशत बढ़कर 92.34 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है, जो एक महीने से अधिक समय के उच्चतम स्तर 92.25 डॉलर के बेहद करीब है। यह स्तर इससे पहले 8 जून को देखा गया था। तेल की कीमतों में आई यह हालिया रैली मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने या वहां उत्पन्न होने वाले तनाव के कारण लंबी अवधि तक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से प्रेरित है। कनाडा जैसी शुद्ध ऊर्जा निर्यातक अर्थव्यवस्थाओं के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि करती हैं, जिससे कनाडाई डॉलर को विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक बढ़त हासिल होती है और यह न्यूजीलैंड डॉलर जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है।
USD/CAD पेयर का तकनीकी ढांचा और लाइव मार्केट संकेतक
तकनीकी विश्लेषण के दृष्टिकोण से, USD/CAD करेंसी पेयर दैनिक चार्ट पर मंदी का रुझान प्रदर्शित कर रहा है। यह पेयर मई के निचले स्तर 1.3550 और जून के उच्च स्तर 1.4248 के बीच बने 61.8 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 1.3817 के ऊपर टिकने में विफल रहा। वर्तमान में यह पेयर 1.3783 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो इसके 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 1.3865 के नीचे स्थित है। जब तक यह विनिमय दर अपने 20-दिवसीय EMA के नीचे बनी रहती है, तब तक हर मामूली सुधार पर बिकवाली का दबाव बनने की संभावना बनी हुई है।
मोमेंटम संकेतकों की बात करें तो 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 39 के स्तर के आसपास बना हुआ है, जो 50 के मध्य रेखा से नीचे स्थित है। RSI का यह स्तर किसी ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत देने के बजाय लगातार बने हुए मंदी के दबाव को दर्शाता है। वहीं दूसरी ओर, WTI क्रूड ऑयल (CL=F) के लाइव तकनीकी संकेतक एक मजबूत तेजी के रुझान का संकेत दे रहे हैं। कच्चे तेल का 14-अवधि RSI 67 पर स्थित है, जबकि MACD इंडिकेटर 2.49 पर अपनी सिग्नल रेखा 1.71 से ऊपर कारोबार कर रहा है, जिसका हिस्टोग्राम 0.78 के साथ बुलिश रुख प्रदर्शित करता है।
WTI क्रूड के मूविंग एवरेज चार्ट पर एक स्पष्ट दीर्घकालिक अपट्रेंड दिखाई देता है, जिसमें 50-दिवसीय EMA (84.44 डॉलर) 200-दिवसीय EMA (77.04 डॉलर) से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है, जो कि गोल्डन क्रॉस स्थिति को दर्शाता है। 20-दिवसीय EMA 86.53 डॉलर पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय SMA 81.42 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 78.97 डॉलर पर है। बोलिंजर बैंड की ऊपरी सीमा 92.89 डॉलर और निचली सीमा 79.00 डॉलर पर है, जिसका मध्य स्तर 85.95 डॉलर है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 3.62 पर स्थित है जो दैनिक अस्थिरता को मापता है। इंट्राडे पिवट बिंदु 92.65 डॉलर पर है, जिसमें निकटतम सपोर्ट S1 90.56 डॉलर और S2 88.79 डॉलर पर स्थित है, जबकि रेसिस्टेंस R1 94.42 डॉलर और R2 96.51 डॉलर पर चिन्हित है, जो कि 54.98 से 119.48 डॉलर के 52-सप्ताह के दायरे में आता है।
अमरीकी महंगाई आंकड़ों से पहले अमरीकी डॉलर सूचकांक में सुस्ती
ऊर्जा क्षेत्र की मजबूती से कनाडाई मुद्रा को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन अमरीकी डॉलर को आगामी आर्थिक आंकड़ों के कारण सतर्कता का सामना करना पड़ रहा है। छह प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की मजबूती को मापने वाला अमरीकी डॉलर सूचकांक (DXY) 0.11 प्रतिशत घटकर 98.80 के स्तर के पास कारोबार कर रहा है। निवेशकों की यह सतर्कता अगस्त महीने के लिए गुरुवार को जारी होने वाले उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और शुक्रवार को जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के कारण है। बाजार प्रतिभागी इन आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं ताकि फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीतिगत फैसलों का आकलन किया जा सके।
अमरीकी डॉलर की ऐतिहासिक भूमिका और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
अमरीकी डॉलर के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक ढांचे को जानना आवश्यक है। अमरीकी डॉलर न केवल अमरीका की आधिकारिक मुद्रा है, बल्कि यह विश्व की प्रमुख आरक्षित मुद्रा के रूप में भी कार्य करता है। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात अमरीकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड का स्थान लिया और दुनिया की प्राथमिक रिजर्व करेंसी बन गया। वर्ष 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के अंत तक अमरीकी डॉलर का मूल्य सोने के भंडार से तय होता था। वर्ष 2022 के बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के कुल कारोबार में 88 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी अमरीकी डॉलर की है, जिसका दैनिक औसत लेनदेन 6.6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।
अमरीकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व का मुख्य लक्ष्य 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर के साथ मूल्य स्थिरता बनाए रखना और पूर्ण रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। जब अमरीका में मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जाने लगती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। उच्च ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को अमरीकी संपत्तियों में निवेश के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे डॉलर का मूल्य बढ़ता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति कम होती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तब ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है।
अत्यधिक गंभीर आर्थिक स्थितियों में फेडरल रिजर्व क्वांटिटेटिव इजिंग (QE) जैसी असाधारण नीतियों का उपयोग करता है। QE के अंतर्गत केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर अमरीकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे डॉलर का मूल्य आमतौर पर कमजोर होता है। यह कदम वर्ष 2008 के महान वित्तीय संकट (GFC) के दौरान उठाया गया था। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रीय बैंक बॉन्ड की खरीद बंद कर देता है और अपनी संपत्ति को कम करता है, जो अमरीकी डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार का परिदृश्य: AUD, JPY, सोना और डीजल का रिकॉर्ड स्तर
एशिया-प्रशांत क्षेत्र और कमोडिटी बाजारों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD 0.7200 के स्तर से ऊपर बना रहा, जो 14 मई के बाद का उच्चतम स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और जापानी येन की मजबूती ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन दिया, हालांकि चीन के मिश्रित व्यापार आंकड़ों ने इसकी बढ़त को सीमित रखा।
दूसरी ओर, USD/JPY 153.50 के आसपास छह महीने के निचले स्तर पर आ गया। जापान में वेतन वृद्धि के मजबूत आंकड़ों और दूसरी तिमाही के GDP संशोधनों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को मजबूत किया, जिससे जापानी येन को जबरदस्त बढ़त मिली।
कीमती धातुओं में, सोने की कीमतों ने दो दिनों की गिरावट का सिलसिला समाप्त करते हुए बढ़त दर्ज की। अमरीकी डॉलर में आई गिरावट और येन की मजबूती से सोने को समर्थन मिला, हालांकि फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण बिना ब्याज वाली इस धातु की बढ़त सीमित रही।
शोधित ऊर्जा उत्पाद बाजार में भी असाधारण मजबूती देखी जा रही है। अमरीका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल और WTI क्रूड ऑयल के बीच का अंतर यानी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102.00 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया। यह रिकॉर्ड स्तर मिडिल डिस्टिलेट की भारी किल्लत को दर्शाता है, जो ऊर्जा बाजार में तेजी के रुख को और मजबूत करता है।



















