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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, नीट प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर हुईं रद्दभारत
1 सित॰ 2026, 3:14 pm (51 मिनट पहले)· 2

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, नीट प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर हुईं रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर देश भर में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत ने परीक्षा से जुड़े मामलों में मुआवजे के लिए तीन महीने के भीतर नीति तैयार करने का भी निर्देश दिया है।

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश की राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र आंदोलनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और राहत भरा आदेश जारी किया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने विशेष विशेषाधिकार यानी अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज तमाम प्राथमिकियों को खारिज करने का निर्देश दिया है। इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष पूरी हुई।

देशभर में दर्ज प्राथमिकियों पर गिरी गाज

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े और स्पष्ट निर्देश के बाद दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में छात्र-छात्राओं के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर स्वतः समाप्त हो जाएंगी। हालांकि, न्यायालय ने यह भी साफ किया है कि दिल्ली पुलिस केवल उन 2873 लोगों के खिलाफ प्राथमिकियों को जारी रख सकती है, जिन पर पहले से ही किसी भी प्रकार के आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, मुख्य न्यायाधीश ने यह भी हिदायत दी है कि यदि किसी अन्य राज्य में भी ऐसी कोई प्राथमिकी मौजूद है जिसकी आधिकारिक जानकारी अभी तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई है, तो संबंधित राज्य सरकारें उन मामलों को बंद करने की मांग का विरोध बिल्कुल नहीं करेंगी।

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भविष्य में किसी भी नई प्राथमिकी पर लगी रोक

न्यायालय ने अपनी कार्यवाही के दौरान यह भी रेखांकित किया कि वे इन तमाम आवेदनों को स्वीकार करते हुए यह व्यवस्था दे रहे हैं कि यदि किसी भी अन्य राज्य में भी इन्हीं प्रकरणों से जुड़ी कोई अन्य प्राथमिकी दर्ज है, तो उस पर तत्काल प्रभाव से पुलिसिया जांच रोक दी जाए। सर्वोच्च अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में इस बात को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया कि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की प्रमुख मांग को लेकर नीट परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन की राह चुनने वाले विद्यार्थियों के विरुद्ध अब भविष्य में कोई भी नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।

आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा

अपने इस ऐतिहासिक आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि नीट परीक्षा, 2026 के भारी तनाव और परिणामों के चलते अपनी जान गंवाने वाले या आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा दिए जाने के संबंध में एक सुदृढ़ नीति बनाई जाए। अदालत को इस बात से अवगत कराया गया है कि इस विषय पर एक व्यापक नीति अगले तीन महीनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि निर्धारित तीन महीने की समयावधि के भीतर ही इस नीति को अमलीजामा पहनाते हुए प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि वितरित की जाए।

जंतर-मंतर के आंदोलन और पुलिसिया कार्रवाई का ब्योरा

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने विस्तार से उल्लेख किया कि किस प्रकार बीती 20 से 25 जुलाई के बीच राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में हजारों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे थे और उग्र प्रदर्शन में अपनी हिस्सेदारी निभाई थी। इस पूरे आंदोलन के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा कुल 13 प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं। अदालत के समक्ष दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों से जुड़े हुए कई औपचारिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें इन सभी एफआईआर का पूरा विवरण और कच्चा-चिट्ठा शामिल है। अदालत ने दोहराया कि दिल्ली पुलिस पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले केवल 2,873 विशिष्ट व्यक्तियों के खिलाफ ही अपनी जांच और कार्रवाई जारी रखेगी, जबकि इसके अलावा किसी भी छात्र के खिलाफ कोई नया मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने किस शक्ति का इस्तेमाल करके एफआईआर रद्द की हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करके यह आदेश दिया है।
किन-किन राज्यों में दर्ज छात्रों के खिलाफ एफआईआर रद्द हुई हैं?
दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दी गई हैं।
क्या पुलिस अभी भी कुछ लोगों के खिलाफ मामले जारी रखेगी?
हाँ, दिल्ली पुलिस केवल उन 2,873 लोगों के खिलाफ मामले जारी रखेगी जिन पर पहले से ही आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज हैं।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे को लेकर क्या निर्देश दिए गए हैं?
अदालत ने निर्देश दिया है कि परीक्षा के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के मुआवजे के लिए तीन महीने के भीतर एक नीति बनाई जाए।
क्या भविष्य में इन प्रदर्शनों को लेकर कोई नया केस दर्ज होगा?
नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन प्रदर्शनों के सिलसिले में अब छात्रों के खिलाफ कोई भी नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 मिनट पहले

सर्वोच्च अदालत द्वारा अनुच्छेद 142 के तहत छात्रों पर दर्ज मुकदमों को खारिज करना और भविष्य में नई एफआईआर पर रोक लगाना न्याय व्यवस्था का एक अनूठा कदम है। हालांकि, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2873 लोगों पर जांच जारी रखने और तीन महीने के भीतर मुआवजे की नीति तैयार करने के निर्देश से यह साफ है कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अभी लंबी चलेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 मिनट पहले

अनुच्छेद 142 के इस असाधारण उपयोग ने छात्र आंदोलनों और राज्य तंत्र के बीच के टकराव में एक बड़ा संवैधानिक संतुलन पेश किया है। हालांकि, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2873 व्यक्तियों पर जांच का जारी रहना यह स्पष्ट करता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां व्यवस्था और सुरक्षा के मोर्चे पर कोई ढील नहीं देंगी। वहीं, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों के लिए तीन महीने के भीतर मुआवजे की नीति तैयार करने का निर्देश शासन प्रणाली और नीति-निर्माताओं के लिए जवाबदेही तय करने की एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है, जिसका दूरगामी असर देश की प्रशासनिक संस्कृति पर पड़ेगा।

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