अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती रुझान सामने आने के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल बढ़ गई है, जिससे बुधवार के शुरुआती एशियाई कारोबार में अमेरिकी मुद्रा दबाव में आ गई। यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) टूटकर 101.25 के आसपास पहुंच गया और 101.30 के स्तर के पास बिकवाली के दबाव का सामना कर रहा है। कारोबारी अब वाशिंगटन की शक्ति संतुलन की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बाजार की आगे की दिशा तय हो सके। इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर केवल मुद्रा तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी प्रतिभूतियों के रिटर्न पर भी इसका सीधा असर देखने को मिला है।
बॉन्ड बाजार में यील्ड कर्व के हर हिस्से में नरमी दर्ज की गई। अल्पकालिक दरों से जुड़ा 2 साल का ट्रेजरी यील्ड पांच आधार अंक (bps) गिरकर 4.566% पर आ गया। वहीं, लंबी अवधि के वित्तीय रुझानों को दर्शाने वाला बेंचमार्क 10 साल का यील्ड छह आधार अंक घटकर 4.90% पर आ गया। वित्तीय परिसंपत्तियों में यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब निवेशक अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक नियंत्रण के समीकरणों का आकलन कर रहे हैं।
संसद की तस्वीर और शुरुआती नतीजे
मतदाता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों के लिए संसद का नियंत्रण तय करने के उद्देश्य से मतदान कर रहे हैं। कई राज्यों में मतदान केंद्र बंद होने के बाद मतगणना जारी है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों में से 60 सीटों के परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं। इन घोषित सीटों में से डेमोक्रेट्स ने 42 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 18 सीटें मिली हैं।
सीनेट के अहम मुकाबले में जॉर्जिया राज्य से डेमोक्रेट नेता जॉन ओसॉफ ने अपनी सीट बरकरार रखी है। उन्होंने ट्रंप समर्थित उम्मीदवार माइक कॉलिन्स को हराकर दूसरा कार्यकाल हासिल किया। सीनेट पर फिर से नियंत्रण पाने के डेमोक्रेटिक पार्टी के अभियान में जॉर्जिया की यह जीत बेहद निर्णायक मानी जा रही है। प्रतिनिधि सभा के सभी 435 सदस्यों, सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के अलावा कई राज्यों में गवर्नर और स्थानीय पदों के लिए भी मतदान संपन्न हुआ है।
मध्यावधि चुनाव की कार्यप्रणाली और शक्ति संतुलन
अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों के अनुसार, मध्यावधि चुनाव किसी भी राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे सफर में आयोजित होते हैं। संघीय कानून के तहत मतदान का दिन नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाला मंगलवार तय होता है, जिसके अनुसार मतदान 3 नवंबर 2026 को निर्धारित हुआ। कई राज्यों में डाक और अग्रिम मतदान की व्यवस्था पहले से संचालित थी।
यह चुनाव सीधे तौर पर तय करता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बचे हुए दो वर्षों के दौरान कांग्रेस के किस सदन पर किसका वर्चस्व रहेगा। सदन में बहुमत हासिल करने वाला दल कानून बनाने के एजेंडे को नियंत्रित करता है, प्रमुख संसदीय समितियों के अध्यक्ष चुनता है और सीनेट में न्यायाधीशों व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियों की पुष्टि का अधिकार रखता है। राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में होता है और अगला राष्ट्रपति चुनाव नवंबर 2028 में निर्धारित है। ऐतिहासिक रूप से मध्यावधि चुनाव सत्तासीन राष्ट्रपति के दल के प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड माने जाते हैं, जहां सत्ताधारी दल को अक्सर प्रतिनिधि सभा में सीटें गंवानी पड़ती हैं।
मुद्रा और बॉन्ड बाजार पर असर
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर में आई यह गिरावट एक अल्पकालिक प्रतिक्रिया हो सकती है, किसी स्थायी गिरावट का आरंभ नहीं। बाजार पहले से ही बंटी हुई संसद (डिवाइडेड कांग्रेस) को मूल परिदृश्य मानकर चल रहा था और इसका आंशिक प्रभाव पहले ही कीमतों में शामिल हो चुका था। ट्रेजरी यील्ड पर चुनाव परिणामों का असर ज्यादा तीव्र देखा जा रहा है।
जब भी चुनाव परिणाम भारी राजकोषीय प्रोत्साहन की संभावना बढ़ाते हैं, तो आम तौर पर यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों में तेजी आती है। इसके विपरीत, जब दोनों दलों के बीच राजनीतिक गतिरोध नए सरकारी खर्चों को सीमित करता है, तो बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों पर नीचे की ओर दबाव पड़ता है। यदि भविष्य में सरकारी फंडिंग रुकने या ऋण सीमा (डेट सीलिंग) को लेकर तकरार जैसी राजनीतिक बाधाएं खड़ी होती हैं, तो सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में डॉलर को अस्थायी उछाल मिल सकता है। हालांकि, छह से बारह महीनों की अवधि में आर्थिक विकास दर और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति चुनावी राजनीति से कहीं अधिक प्रभावशाली साबित होती हैं।
शेयर बाजार और ऐतिहासिक रुझान
वॉल स्ट्रीट पर ऐतिहासिक रूप से मध्यावधि चुनाव से पहले कमजोरी और परिणामों के बाद जोरदार मजबूती का रुझान देखा गया है। वर्ष 1950 से अब तक के आंकड़ों के अनुसार, हर मध्यावधि चुनाव के 12 महीने बाद एसएंडपी 500 सूचकांक उच्च स्तर पर बंद हुआ है। यह रिकॉर्ड 19 में से 19 बार पूरी तरह खरा उतरा है, जिसमें औसत बढ़त करीब 15% रही है। रणनीतिकार इस तेजी का कारण चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक अनिश्चितता का समाप्त होना मानते हैं। हालांकि, पुराना प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता और 2026 में शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन इस ऐतिहासिक सिलसिले के लिए एक चुनौती बन सकते हैं।
बाजारों ने अक्सर विभाजित सरकार का स्वागत किया है, क्योंकि राजनीतिक गतिरोध के कारण करों, खर्चों और नियमों में अचानक बड़े बदलाव होने की संभावना घट जाती है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति के कार्यकाल में, जब भी मध्यावधि चुनाव के बाद कांग्रेस का नियंत्रण दोनों दलों में बंटा है, एसएंडपी 500 ने ऐतिहासिक तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। फिर भी, बजट फंडिंग की समयसीमा, कर्ज सीमा का विवाद और संसदीय जांच जैसे कारक अल्पकालिक अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजार का हाल
बुधवार को एशियाई सत्र के दौरान मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों में भी फेरबदल हुआ। AUD/USD में बढ़त देखी गई और यह पिछले सत्र में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कम सख्त रुख के बाद छुए गए दो सप्ताह के निचले स्तर से थोड़ा सुधरा। इसके अलावा, ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ताओं की उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को कमजोर किया और इस मुद्रा जोड़ी को सहारा दिया, हालांकि चुनाव नतीजों के इंतजार में बढ़त सीमित रही।
USD/JPY फिसलकर 158.50 से नीचे चला गया, जिससे पिछले दिन लगभग तीन सप्ताह के उच्च स्तर को छूने वाली दो दिनों की तेजी का सिलसिला थम गया। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को मजबूती दी। साथ ही, ईरान कूटनीति की उम्मीदों ने डॉलर को बैकफुट पर रखा। कमोडिटी बाजार में, सोना पिछले सत्र में 3,900 डॉलर से नीचे के स्तर से आई तेजी को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करता दिखा और एक सीमित दायरे में बना रहा। ईरान कूटनीति की उम्मीदों ने सुरक्षित डॉलर को गिराकर सोने को सहारा दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं ने सोने की तेजी को सीमित रखा।

















