अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र के रोजगार में सितंबर की शुरुआत के दौरान उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। चार हफ्तों की अवधि के दौरान निजी नियोक्ताओं द्वारा भर्ती की रफ्तार में नई मजबूती दर्ज की गई है, जो इससे पहले के सप्ताह में दर्ज की गई बढ़त को और आगे बढ़ाती है। एनईआर पल्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 5 सितंबर को समाप्त हुए चार हफ्तों में निजी कंपनियों ने प्रति सप्ताह औसतन 20K रोजगार जोड़े हैं। यह आंकड़ा पिछले स्तर यानी 16.75K के मुकाबले एक ठोस सुधार को दर्शाता है, जिससे कार्यबल में सतत बहाली के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
डॉलर इंडेक्स और मुद्रा बाजार की प्रतिक्रिया
इस रोजगार रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर थोड़ी रक्षात्मक मुद्रा में कारोबार करता दिखा। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) पर नजर डालें तो मंगलवार को यह 100.40 के स्तर के इर्द गिर्द मंडरा रहा था। मुद्रा के मूल्यांकन और समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को समझने के लिए श्रम बाजार की स्थितियां सबसे बुनियादी और निर्णायक पैमाना मानी जाती हैं। जब किसी देश में रोजगार का स्तर ऊंचा रहता है या बेरोजगारी दर बेहद कम बनी रहती है, तो इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव घरेलू खपत तथा उपभोक्ता खर्च पर पड़ता है। मजबूत उपभोक्ता खर्च अंततः आर्थिक वृद्धि को गति प्रदान करता है और घरेलू मुद्रा की क्रय शक्ति व कीमत को मजबूती देता है।
इसके विपरीत, जब श्रम बाजार अत्यधिक तंग हो जाता है, यानी जब रिक्त पदों की तुलना में उपलब्ध कामगारों की भारी कमी हो जाती है, तो इसका सीधा असर महंगाई और मौद्रिक नीति पर पड़ता है। श्रमिकों की सीमित आपूर्ति और कंपनियों की ओर से उनकी ऊंची मांग सीधे तौर पर वेतन दरों को ऊपर खींचती है। वेतन वृद्धि का यह दबाव नीति निर्माताओं के लिए हमेशा गहन चिंता और समीक्षा का विषय बना रहता है।
वेतन वृद्धि और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां
अर्थव्यवस्था में मजदूरी और वेतन जिस रफ्तार से बढ़ रहे हैं, वह नीतिगत फैसले लेने वालों के लिए बेहद अहम पहलू होता है। मजबूत वेतन वृद्धि का सीधा मतलब होता है कि परिवारों के पास खर्च करने के लिए अधिक नकदी उपलब्ध है, जो सामान्यतः उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि का कारण बनती है। ऊर्जा और कच्चे तेल जैसी अस्थिर कीमतों के मुकाबले वेतन वृद्धि को महंगाई का एक स्थायी और मुख्य घटक माना जाता है, क्योंकि एक बार वेतन बढ़ जाने के बाद उसे वापस घटाना संभव नहीं होता। इसी कारण से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दर नीतियों का निर्धारण करते समय वेतन वृद्धि के आंकड़ों की बेहद सूक्ष्म निगरानी करते हैं।
श्रम बाजार की स्थितियों को प्रत्येक केंद्रीय बैंक अपनी प्राथमिकताओं और कानूनी जनादेश के आधार पर महत्व देता है। दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंकों को केवल मुद्रास्फीति नियंत्रण के अलावा रोजगार से जुड़े विशिष्ट कानूनी दायित्व भी सौंपे गए हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के पास दोहरा जनादेश है, जिसके तहत अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना दोनों उसकी जिम्मेदारी हैं। दूसरी ओर, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) का एकमात्र वैधानिक उद्देश्य मुद्रास्फीति को पूरी तरह नियंत्रण में रखना है। इसके बावजूद, चाहे जनादेश कुछ भी हो, नीति निर्माताओं के लिए श्रम बाजार हमेशा अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को मापने का केंद्रीय जरिया बना रहता है क्योंकि इसका सीधा नाता महंगाई के रुझानों से होता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और प्रमुख जोड़ियों का हाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण हलचलें देखने को मिलीं। आरबीए की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की ओर से आए आक्रामक बयानों के बाद AUD/USD की जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी आकर्षित करने में सफल रही। हालांकि, पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। इसके साथ ही, निवेशकों की नजरें इस सप्ताह होने वाले महत्वपूर्ण ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर टिकी हुई हैं।
उधर USD/JPY की जोड़ी एशियाई सत्र में मामूली बढ़त दर्ज करते हुए 157.50 के स्तर के करीब कारोबार करती नजर आई। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के डर ने येन की गिरावट को थामने में मदद की। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्चतम स्तर पर ब्याज दरें बढ़ाने के बावजूद उसके नरम रुख के कारण जापानी मुद्रा के खरीदार बैकफुट पर दिखाई दिए। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और पश्चिम एशिया के भू राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिलना जारी रहा, जिसने इस जोड़ी को सहारा दिया।
सोने की कीमतों में गिरावट और बिटकॉइन में मुनाफावसूली
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में नरमी दर्ज की गई। पीली धातु फिसलकर 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे चली गई, हालांकि बाद में इसमें कुछ स्थिरता देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को मजबूती मिल रही है, जिससे सोने पर लगातार दबाव बना हुआ है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन एक दिन पहले दर्ज की गई 6.7% की भारी तेजी के बाद मंगलवार को थोड़ा सुस्ताता दिखा और इसमें मुनाफावसूली के चलते भाव 85,500 डॉलर के नीचे फिसल गया। इस पुलबैक के बावजूद संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग ने कीमतों को बड़ा सहारा दिया है। सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में करीब 1 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 BTC और जोड़े हैं।
बैंक ऑफ जापान का दर वृद्धि का ऐतिहासिक कदम
जापान के केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया। नीति निर्माताओं ने 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने का फैसला किया। यह कदम नीति को सामान्य करने के क्रम में उठाया गया है और यह फैसला बाजार में पिछले कई हफ्तों से लगाई जा रही अटकलों और उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा।


















