गुजरात के मोरबी शहर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सामान्य मेडिकल प्रक्रिया ने परिवार के भीतर दबे पांच साल पुराने संवेदनशील सच को उजागर कर दिया। ब्लड कैंसर से जूझ रहे एक व्यक्ति के उपचार के लिए जब बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी की जा रही थी, तब डॉक्टरों ने पिता और बेटे के नमूनों की अनुकूलता की जांच की। इस चिकित्सीय परीक्षण के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे और दोनों के सैंपल आपस में मैच नहीं कर सके। इस विफलता के बाद उपजे सवालों के बीच महिला ने अपने साथ हुए कथित अपराध की जानकारी साझा की, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने मामले में औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
मेडिकल टेस्ट से सामने आई असंगति
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत पति के गंभीर रोग के इलाज के दौरान हुई। पीड़ित व्यक्ति को ब्लड कैंसर होने के कारण बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी गई थी। चिकित्सा विज्ञान के स्थापित मानकों के अनुसार, बायोलॉजिकल पिता और बेटे के बीच जेनेटिक स्तर पर हाप्लोआइडेंटिकल समानता पाई जाती है, जिसके चलते आमतौर पर बेटा अपने पिता के लिए उपयुक्त डोनर माना जाता है। हालांकि, अस्पताल में किए गए विस्तृत परीक्षणों में पिता और बेटे के बोन मैरो सैंपल्स में कोई समानता नहीं पाई गई। इस अप्रत्याशित रिपोर्ट के सामने आने के बाद महिला ने अपने पारिवारिक दायरे में पूरी बात रखी और फिर कानून का सहारा लेने का फैसला किया।
पुलिस में शिकायत और 2020 की घटना के आरोप
मोरबी के डीएसपी जे.एम. आळ के अनुसार, महिला ने 9 सितंबर को पुलिस थाने में पहुंचकर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में महिला ने मोरबी नगर पालिका की एक पूर्व पार्षद के पति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के मुताबिक, आरोपी के साथ उसकी जान-पहचान एक बुटीक के माध्यम से हुई थी। उस दौरान पति के इलाज में सहायता के उद्देश्य से उक्त व्यक्ति ने उसे एक लाख रुपये दिए थे। महिला का आरोप है कि वर्ष 2020 में दिए गए पैसों की वापसी के बहाने आरोपी ने उसे अपने घर बुलाया और वहां उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया। पारिवारिक मान-सम्मान और मानसिक दबाव के चलते वह उस समय पुलिस के पास जाने का साहस नहीं जुटा सकी थी, जिसके कारण शिकायत दर्ज कराने में पांच वर्ष का विलंब हुआ।
अदालती अनुमति और डीएनए जांच की तैयारी
पांच साल बाद दर्ज कराई गई इस प्राथमिकी के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगाए गए आरोपों और चिकित्सीय निष्कर्षों की पुष्टि के लिए अदालत से विधिवत अनुमति मांगी जा रही है। अनुमति मिलने के पश्चात आवश्यक डीएनए परीक्षण कराया जाएगा, जिससे अदालत के समक्ष वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए जा सकें और आरोपों की सत्यता निर्धारित की जा सके।


















