अमेरिकी रोजगार बाजार से सामने आए ताजा आंकड़ों ने आर्थिक गलियारों में नीतिगत सख्ती की आशंकाओं को काफी हद तक ठंडा कर दिया है। सितंबर के दौरान नए रोजगार सृजन की रफ्तार उम्मीद के मुकाबले काफी सुस्त दर्ज की गई, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना कमजोर पड़ गई है। एबीन एमरो के विश्लेषक रोजियर क्वाडव्लीग के मुताबिक, यह रिपोर्ट मिली-जुली होने के बावजूद केंद्रीय बैंक के सख्त रुख को नरम करने के लिए पर्याप्त संकेत देती है।
पेरोल में तेज गिरावट और पिछले आंकड़ों में कटौती
श्रम बाजार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में गैर-कृषि पेरोल में केवल 29,000 नई नौकरियों का इजाफा हुआ। अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का आम अनुमान 90,000 नौकरियों का था, जिसके मुकाबले वास्तविक संख्या बेहद कमजोर रही। इसके अतिरिक्त, पूर्ववर्ती महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी 60,000 की शुद्ध कटौती दर्ज की गई है। इन संशोधनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रोजगार के मोर्चे पर पहले जितनी मजबूती मानी जा रही थी, असल स्थिति उससे कहीं अधिक सुस्त रही है।
बेरोजगारी दर में उछाल और वेतन वृद्धि की रफ्तार
ताजा समीक्षा में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, इस वृद्धि के पीछे कार्यबल भागीदारी दर में 0.2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी एक प्रमुख वजह रही। इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि जो लोग पहले नौकरी की तलाश से बाहर बैठे थे, उन्होंने दोबारा बाजार में आकर काम खोजना शुरू कर दिया है।
वेतन के मोर्चे पर भी नरमी के स्पष्ट संकेत दिखे हैं। औसत प्रति घंटा आय में महीने-दर-महीने आधार पर महज 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई। इस सुस्त मासिक गति के कारण सालाना वेतन वृद्धि की दर घटकर 3.0 प्रतिशत पर आ गई है। क्वाडव्लीग ने बताया कि श्रम आपूर्ति को देखते हुए 51,000 का तीन महीने का औसत मजबूत तो है, लेकिन यह किसी भी तरह से गर्म या बेहद तंग बाजार का संकेत नहीं देता।
केंद्रीय बैंक के आगामी कदमों पर पड़ता असर
अक्टूबर की नीतिगत बैठक के संदर्भ में यह रिपोर्ट एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। सप्ताह की शुरुआत में व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) महंगाई के आंकड़े भी अनुमान से कम आए थे। कमजोर रोजगार और गिरती महंगाई के इस दोहरे मेल ने फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं पर तत्काल दर वृद्धि करने का दबाव पूरी तरह हटा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अब नीतिगत दरों को स्थिर रखने की गुंजाइश काफी मजबूत हो चुकी है।
करेंसी बाजार में हलचल और डॉलर का पीछे हटना
नौकरी रिपोर्ट के प्रभाव से अमेरिकी डॉलर 17 महीने के अपने उच्चतम स्तर से फिसल गया, क्योंकि ट्रेडर्स ने अहम आंकड़ों के सामने आने से पहले अपने मुनाफे को सुरक्षित किया। डॉलर की कमजोरी के बीच एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) उछलकर 0.6950 के करीब पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया की मुद्रा को घरेलू स्तर पर नवंबर में ब्याज दर बढ़ने की दोबारा जगी उम्मीदों से भी समर्थन मिला, जिसे वैश्विक स्तर पर बढ़ते बॉन्ड यील्ड और महंगाई जोखिमों से बल मिला है।
दूसरी तरफ, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 158.00 के आसपास नए रुझान के लिए जूझता दिखा। टोक्यो के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में उम्मीद से ज्यादा तेजी आने और समग्र डॉलर के टूटने के कारण यह जोड़ी अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर से नीचे फिसल गई। यूरो (EUR/USD) की स्थिति हालांकि कमजोर बनी रही, जो मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। बुधवार को यह जोड़ी लुढ़ककर 1.1312 पर आ गई थी, जो जनवरी के 1.2082 के उच्च स्तर से काफी नीचे है। यूरोप का यह दबाव डॉलर की अंतर्निहित मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट की चिंताओं का परिणाम है।
सोने में चमक और क्रिप्टो संपत्तियों में सुधार
कमजोर पड़ते डॉलर और ब्याज दरों पर घटते दबाव का सीधा फायदा सराफा बाजार को मिला। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोने ने ठोस बढ़त के साथ प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया। निवेशक श्रम बाजार के आंकड़ों के बाद अपनी निवेश रणनीति को दोबारा संतुलित कर रहे हैं।
डिजिटल एसेट बाजार में भी सुधार का व्यापक रुख देखने को मिला। बिटकॉइन तेजी की अगुवाई करते हुए 86,000 डॉलर के पार निकल गया। इथेरियम ने 2,700 डॉलर से ऊपर चढ़कर अपने सकारात्मक रुख की पुष्टि की, हालांकि 2,800 डॉलर के आसपास ऊपरी स्तरों पर रुकावट देखी जा रही है। वहीं दूसरी ओर, रिपल 1.54 डॉलर के आसपास टिका रहा।
आने वाले दिनों के प्रमुख आर्थिक संकेतक
वित्तीय बाजारों के लिए आने वाला समय भी काफी घटनाक्रमों से भरा रहेगा। ऊर्जा संकट और चढ़ते बॉन्ड प्रतिफल बाजार की दिशा तय करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे। अक्टूबर दर वृद्धि के दांव घटने के बाद फेडरल रिजर्व की मिनट्स पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। इसके साथ ही आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और ट्रेजरी की नीलामियों पर नजर रखी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा के रोजगार आंकड़े, जापान में वेतन वृद्धि के आंकड़े और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की बैठक के मिनट्स भी वैश्विक धारणा को प्रभावित करेंगे।



















