अमेरिकी श्रम बाजार से आए बेहद कमजोर आंकड़ों ने मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की रफ्तार थाम दी है, जिसके चलते यूरो में शुक्रवार को निचले स्तरों से तेज सुधार देखने को मिला। सितंबर महीने में नई नौकरियों के सृजन में आई अप्रत्याशित गिरावट के बाद यूरो/यूएसडी (EUR/USD) 1.1221 के निचले स्तर से उबरकर 1.1260 के आसपास पहुंच गया, जो दैनिक आधार पर लगभग 0.16% की बढ़त दर्शाता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर नीतिगत बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को इस रिपोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जिससे ग्रीनबैक पर चौतरफा बिकवाली का दबाव बन गया।
अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट उम्मीदों से काफी कमजोर
अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में गैर-कृषि पेरोल (एनएफपी) में केवल 29,000 नई नौकरियां जुड़ीं। बाजार विश्लेषक इस महीने लगभग 90,000 नई भर्तियों की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन वास्तविक संख्या अनुमानों से बहुत पीछे रह गई। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि उच्च उधारी लागत का असर अब नौकरियों के नए अवसरों पर दिखने लगा है।
केवल सितंबर के आंकड़े ही कमजोर नहीं रहे, बल्कि पिछले महीनों के पेरोल डेटा में भी भारी कटौती की गई है। अगस्त में पहले रिपोर्ट की गई 162,000 नई नौकरियों की संख्या को घटाकर 133,000 कर दिया गया। वहीं जुलाई के रोजगार आंकड़ों में बड़ा उलटफेर हुआ, जहां पहले 21,000 नौकरियों की बढ़ोतरी का अनुमान था, उसे संशोधित कर 10,000 नौकरियों की शुद्ध गिरावट में बदल दिया गया। दोनों महीनों को मिलाकर रोजगार वृद्धि में कुल 60,000 की शुद्ध कटौती दर्ज की गई, जिससे श्रम बाजार की आंतरिक कमजोरी खुलकर सामने आ गई।
बेरोजगारी दर और मजदूरी के रुझान
रोजगार रिपोर्ट के अन्य आंतरिक पैमानों ने भी डॉलर को कोई खास राहत नहीं दी। अमेरिका में बेरोजगारी दर मामूली रूप से बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर, लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 61.6% से सुधरकर 61.8% दर्ज किया गया। इसके अलावा कर्मचारियों की औसत प्रति घंटा कमाई सालाना आधार पर 3% की दर से बढ़ी, जबकि बाजार में 3.2% की वार्षिक वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। मजदूरी वृद्धि में आई इस नरमी से मजदूरी आधारित मुद्रास्फीति का दबाव कम हुआ है, जिससे नीति निर्माताओं को ब्याज दरों में आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत घट गई है।
इन आंकड़ों के सामने आते ही अमेरिकी डॉलर सूचकांक (डीएक्सवाई), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, करीब 0.23% लुढ़ककर 101.80 के स्तर पर आ गया। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदें कमजोर पड़ने के बावजूद दिसंबर बैठक में दरों में बढ़ोतरी की लगभग 62% संभावना अभी भी बाजार में बनी हुई है।
यूरोपीय चुनौतियां और तकनीकी स्तर
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) पर यूरोप में मजबूत मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते नीतिगत सख्ती बनाए रखने का दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद एकल मुद्रा यूरो के लिए आगे की राह पूरी तरह से आसान नहीं है। फ्रांस की राजकोषीय स्थिति को लेकर निवेशकों की चिंताएं और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें यूरो की मांग को लगातार सीमित कर रही हैं। आईएनजी के अनुसार फ्रांस के जोखिम प्रीमियम का असर यूरो पर पड़ रहा है, जबकि डॉयचे बैंक के अनुसार यूरो तनाव के बीच दबाव में है। इसी कारण एनएफपी रिपोर्ट के बाद आए दैनिक उछाल के बावजूद यूरो/यूएसडी साप्ताहिक आधार पर कमजोरी के रास्ते पर ही दिख रहा है। यह जोड़ी इस सप्ताह 1.1312 तक गिरी थी, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है और मई 2025 के बाद का सबसे निचला दायरा है।
तकनीकी चार्ट्स पर नजर डालें तो यूरो/यूएसडी के लिए पहला तात्कालिक अवरोध 1.1270 पर है, जिसके ऊपर 1.1312 और 100-अवधि के एसएमए (1.1319) का बड़ा सप्लाई जोन मौजूद है। इसके ऊपर 200-अवधि का एसएमए 1.1360 पर स्थित है। वहीं गिरावट की स्थिति में पहला सहारा 1.1215 पर दिखेगा, जिसके बाद 1.1200 का अहम संरचनात्मक स्तर मौजूद है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यूरो/यूएसडी 1.13 के स्तर पर कारोबार कर रहा है और इसका दैनिक आरएसआई 17 पर है, जो अत्यधिक ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत देता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 1.12 से 1.17 के दायरे में फैले हैं, जबकि 50 और 200 मूविंग एवरेज के बीच डेथ क्रॉस के कारण दीर्घकालिक ट्रेंड अब भी मंदी का बना हुआ है।
अन्य वैश्विक बाजारों का हाल
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का असर अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों पर भी व्यापक रूप से देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र में 0.6950 की ओर संभला, जिसे नवंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों का सहारा मिला। उधर बैंक ऑफ जापान और टोक्यो सीपीआई के बीच यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) 158.00 के आसपास संघर्ष करता दिखाई दिया।
कमजोर डॉलर के दम पर सोने में जोरदार तेजी आई और पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस का अहम स्तर पार कर गई। उधर क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन 86,000 डॉलर के पार निकल गया, एथेरियम 2,700 डॉलर के ऊपर मजबूती से टिका रहा जबकि 2,800 डॉलर पर रुकावट का सामना कर रहा है, और एक्सआरपी (रिपल) 1.54 डॉलर के करीब कारोबार करता दिखा। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की मिनट्स, आईएसएम सर्विसेज पीएमआई, अमेरिकी ट्रेजरी नीलामी, ईसीबी मिनट्स, कनाडा के रोजगार और जापान के वेतन आंकड़ों पर टिकी रहेगी।



















