भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल प्रमुख नीतिगत दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन आने वाले महीनों में सख्त मौद्रिक रुख का संकेत दिया जा सकता है। एमयूएफजी का आधिकारिक अनुमान है कि रिजर्व बैंक अभी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। इसके साथ ही यह भी रेखांकित किया गया है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर से दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू कर सकता है, जिससे आने वाले समय में नीतिगत दरों का ऊपर जाना तय माना जा रहा है। संस्था का आकलन है कि रिजर्व बैंक अपने मौजूदा न्यूट्रल रुख को बदलते हुए सख्त नीतिगत दिशा यानी टाइटनिंग बायस का स्पष्ट संकेत दे सकता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की चाल और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति
वैश्विक मुद्रा बाजार में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर अपने 17 महीने के उच्च स्तर से पीछे हटता नजर आया। बेहद महत्वपूर्ण अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट जारी होने से पहले व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के कारण डॉलर में यह सुस्ती देखी गई। इस गिरावट के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने वापसी की और एयूडी/यूएसडी सुधरकर 0.6950 की ओर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और महंगाई के बढ़ते जोखिमों के मद्देनजर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की नई उम्मीदों से भी समर्थन मिला है।
दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा को नई दिशा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। टोक्यो सीपीआई के अनुमान से अधिक गर्म रहने और डॉलर में चौतरफा कमजोरी के चलते यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के करीब बना रहा और यह अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर से फिसल गया। करेंसी ट्रेडर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को देखते हुए अपनी रणनीतियों को नए सिरे से संतुलित कर रहे हैं।
यूरो में तेज गिरावट और कमोडिटी बाजार में सोने की चमक
यूरोपीय मुद्रा के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। ईयूआर/यूएसडी फिसलकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक गिर गई थी और अब भी जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। यूरो में आई इस भारी कमजोरी के पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और यूरोप के ऊर्जा कीमतों में संभावित उछाल को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारक रही हैं।
कमोडिटी बाजार की बात करें तो सप्ताह के अंतिम सत्र में सोने में अच्छी तेजी दर्ज की गई। पीली धातु प्रमुख 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आंकड़े को पार करने में सफल रही। निवेशकों द्वारा नवीनतम एनएफपी आंकड़ों के मूल्यांकन के बीच डॉलर इंडेक्स में गिरावट आने से सोने की कीमतों को मजबूती मिली है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुधार और व्यापक मैक्रो संकेतक
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में शुक्रवार को व्यापक रिकवरी देखने को मिली। इस उछाल का नेतृत्व बिटकॉइन ने किया, जो 86,000 डॉलर के पार निकल गया। इसी तरह इथेरियम ने भी अपने मजबूत रुख की पुष्टि करते हुए 2,700 डॉलर का स्तर हासिल कर लिया, हालांकि 2,800 डॉलर का स्तर फिलहाल इसकी तात्कालिक बढ़त पर दबाव बनाए हुए है। इसके अलावा रिपल 1.54 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में आगामी दिनों में ऊर्जा संकट और तेजी से बढ़ती बॉन्ड यील्ड मुख्य प्रेरक की भूमिका में बनी रहेंगी। अक्टूबर महीने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं में कमी आने के बाद अब बाजार भागीदारों की निगाहें फेडरल रिजर्व की बैठकों के मिनट्स पर टिकी हैं। इसके अलावा आने वाले सत्रों में आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और अमेरिकी ट्रेजरी की नीलामियों पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी। अन्य वैश्विक संकेतकों में कनाडाई रोजगार के आंकड़े, जापानी वेतन दरें और ईसीबी के नीतिगत मिनट्स भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।



















