वॉल स्ट्रीट पर एप्पल के शेयरों ने एक नया इतिहास रच दिया है, जिसके बाद कई बड़े वित्तीय संस्थानों ने दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक के प्रति अपना नजरिया तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। 16 जुलाई को इस दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी के शेयर 334.68 डॉलर के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए, जिससे निवेशकों का भरोसा काफी मजबूत हुआ है। इस शानदार तेजी के ठीक बाद, प्रमुख वैश्विक बैंक एचएसबीसी ने कंपनी के शेयरों को लेकर अपना अनुमान काफी हद तक बढ़ा दिया है। बैंक ने एप्पल के लिए 366 डॉलर का नया मूल्य लक्ष्य तय किया है, जो फिलहाल बाजार के सभी मुख्य विश्लेषकों में सबसे ज्यादा है। निकोलस कोट-कोलिसन, जो एचएसबीसी के एक जाने-माने विश्लेषक हैं, ने इस शेयर पर अपनी रेटिंग को 'होल्ड' से बढ़ाकर सीधे 'बाय' कर दिया है। इस नए और आक्रामक लक्ष्य का मतलब है कि गुरुवार के बंद भाव से इस शेयर में अभी भी लगभग 10 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हो सकती है। बैंक का यह सकारात्मक रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब 30 जुलाई को एप्पल अपनी बहुप्रतीक्षित तिमाही कमाई रिपोर्ट जारी करने वाली है और इसमें अब दो सप्ताह से भी कम समय बचा है। पूरे वित्तीय बाजार की नजरें इस रिपोर्ट पर टिकी हैं।
इस बड़े अपग्रेड के आने से पहले ही, यह टेक कंपनी शेयर बाजार में शानदार प्रदर्शन कर रही थी। इस साल की शुरुआत से ही एप्पल के शेयरों में 23 प्रतिशत का शानदार उछाल देखा जा चुका था और बाजार को कवर करने वाले ज्यादातर निवेश बैंकों ने पहले ही इस पर 'बाय' रेटिंग दी हुई थी। बाजार की इतनी लंबी तेजी के बाद किसी बड़े बैंक की तरफ से ऐसा अपग्रेड आना काफी दुर्लभ माना जाता है। गौरतलब है कि साल 2026 के ज्यादातर समय में एचएसबीसी ने एप्पल के मामले में पूरी तरह से तटस्थ रुख अपनाया हुआ था और वे किनारे बैठकर बाजार देख रहे थे। बैंक के विश्लेषकों का पहले यह मानना था कि एप्पल जैसी कंज्यूमर हार्डवेयर कंपनी के बजाय, हाइपरस्केलर्स और एडवांस मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बुनियादी ढांचे के विस्तार का फायदा अधिक तेजी से मिलेगा। उनका तर्क था कि एआई की इस शुरुआती दौड़ में बुनियादी ढांचा बनाने वाली कंपनियां ही सबसे ज्यादा पैसा कमाएंगी। हालांकि, एचएसबीसी की इस नई रिसर्च रिपोर्ट ने उस पुरानी धारणा को पूरी तरह से पलट दिया है, और अब बैंक एप्पल को इस भारी तकनीकी बदलाव का एक मुख्य लाभार्थी मान रहा है।
पूंजीगत खर्च और विशाल ग्राहक आधार का फायदा
एप्पल के लिए 366 डॉलर के इस नए लक्ष्य का मुख्य आधार कंपनी के पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) और उसकी अनूठी वित्तीय रणनीति पर टिका है। निकोलस कोट-कोलिसन ने टेक इंडस्ट्री में निवेश के अलग-अलग तरीकों का हवाला देते हुए बैंक का बदला हुआ नजरिया स्पष्ट किया। रिपोर्ट में विश्लेषक ने कहा, "एप्पल अब एक अहम परिचालन मोड़ पर है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी अधिक कैपेक्स की बहस से दूर रहते हुए भी अपनी नई एप्पल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए 2.5 अरब उपकरणों के विशाल नेटवर्क का पूरा लाभ उठाने के लिए बेहतरीन स्थिति में है। यह टिप्पणी एप्पल के एक बहुत बड़े वित्तीय फायदे को दर्शाती है, जो उसे अन्य कंपनियों से अलग करता है। मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, एप्पल 2026 की अपनी कुल बिक्री का केवल 2.5 प्रतिशत ही इंफ्रास्ट्रक्चर या पूंजीगत खर्च में लगाएगी। इसके ठीक विपरीत, एआई बाजार की अन्य बड़ी कंपनियां और क्लाउड प्रोवाइडर्स (हाइपरस्केलर्स) अपने राजस्व का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा नए और विशाल डेटा सेंटरों के निर्माण पर खर्च कर रही हैं। एचएसबीसी का मानना है कि यह भारी अंतर एप्पल के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत है। इसका सीधा मतलब यह है कि एप्पल अपने प्रतिद्वंद्वियों की तरह महंगे डेटा सेंटर बनाने के वित्तीय बोझ के बिना ही एआई बूम का बड़ा फायदा उठा सकती है। कंपनी का ध्यान सिर्फ हार्डवेयर बेचने पर नहीं, बल्कि अपने विशाल नेटवर्क में एआई सॉफ्टवेयर को एकीकृत करने पर है।
आने वाले नए उत्पादों और उपकरणों की लंबी कतार
हालांकि बैंक की इस नई उम्मीद के पीछे सॉफ्टवेयर रणनीति एक अहम हिस्सा है, लेकिन कंपनी के आने वाले नए उपकरण भी इस अपग्रेड का एक बड़ा कारण हैं। एप्पल के हार्डवेयर रोडमैप पर जोर देते हुए निकोलस कोट-कोलिसन ने कहा, "यह एआई बूम बिल्कुल सही समय पर आया है, जब हमें लगता है कि एप्पल के पास अब तक के सबसे इनोवेटिव उत्पादों की कतार तैयार है।" विश्लेषक ने कंपनी के आगामी उपकरणों की एक मजबूत सूची का जिक्र किया, जिसे खास तौर पर इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे मौजूदा ग्राहकों को अपने पुराने फोन बदलने के लिए प्रेरित कर सकें। इस सूची में इस साल के अंत में लॉन्च होने वाले हाई-एंड आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स मॉडल शामिल हैं। इसके अलावा, बैंक को उम्मीद है कि अप्रैल 2027 के आसपास एक बिल्कुल नया 'आईफोन एयर' बाजार में आएगा। साथ ही, एक किताब की तरह मुड़ने वाला (फोल्डेबल) आईफोन भी इस रोडमैप का अहम हिस्सा है, जिसे बैंक ने भविष्य का सबसे बड़ा गेम-चेंजर उपकरण बताया है। लंबी अवधि के अनुमानों के मुताबिक 2027 में एप्पल स्मार्ट ग्लासेस और एक खास एनिवर्सरी एडिशन आईफोन भी पेश कर सकती है। इसके अलावा, इस साल सिरी का एक नया ऑन-डिवाइस और एजेंटिक वर्जन भी आ रहा है, जो सीधे फोन के हार्डवेयर पर काम करेगा। कोट-कोलिसन का मानना है कि जो ग्राहक अभी भी पुराने आईफोन 15 या आईफोन 16 का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके पास आखिरकार नया आईफोन खरीदने का एक ठोस और तकनीकी कारण होगा।
कमाई के अनुमान और बढ़ती उत्पादन लागत की चुनौती
उत्पादों और सॉफ्टवेयर की इस आक्रामक रणनीति के चलते बैंक ने एप्पल के दीर्घकालिक वित्तीय अनुमानों में भारी बढ़ोतरी की है। एचएसबीसी ने 2027 और 2028 के वित्तीय वर्षों के लिए कंपनी के कुल राजस्व अनुमानों को 7 से 9 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इससे भी खास बात यह है कि आईफोन की कुल बिक्री के अनुमानों में 11 से 13 प्रतिशत की शानदार वृद्धि की गई है। इसके परिणामस्वरूप, बैंक का अनुमान है कि 2027 में कंपनी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) उछलकर 10.26 डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह आंकड़ा वॉल स्ट्रीट के अन्य विश्लेषकों के मौजूदा अनुमानों से लगभग 7.5 प्रतिशत अधिक है, जो यह स्पष्ट करता है कि एचएसबीसी का यह मूल्य लक्ष्य बाकी सभी से इतना आगे क्यों है। हालांकि, विश्लेषकों का यह भी मानना है कि कंपनी के लिए आगे का रास्ता पूरी तरह से आसान नहीं है और कुछ वित्तीय चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक ने पहले ही मुनाफे के मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को लेकर निवेशकों को आगाह किया था। उन्होंने सीधे तौर पर स्वीकार किया, "हमें उम्मीद है कि मेमोरी की लागत काफी अधिक होगी।" टिम कुक ने बाजार को सचेत किया कि जून तिमाही के बाद यह बढ़ती लागत कंपनी के कारोबार पर गहरा असर डालेगी। उनके ये स्पष्ट बयान इस बात का संकेत देते हैं कि सप्लाई चेन और कंपोनेंट की वास्तविकताएं भविष्य में सबसे सकारात्मक वित्तीय अनुमानों की भी कड़ी परीक्षा ले सकती हैं।
मौजूदा वैल्यूएशन और निवेशकों का नजरिया
जैसे-जैसे कंपनी का वैल्यूएशन शेयर बाजार में लगातार बढ़ रहा है, वित्तीय जानकारों में इसकी भविष्य की दिशा को लेकर राय बंटी हुई है। हाल ही में शेयरों के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के कारण इसका ट्रेलिंग पी/ई (मूल्य-आय अनुपात) 40 के करीब पहुंच गया है, जिसे शेयर बाजार की भाषा में काफी महंगा माना जाता है। इतनी अधिक प्रीमियम वैल्यूएशन को देखते हुए कुछ रूढ़िवादी विश्लेषक अभी भी हिचकिचा रहे हैं। उदाहरण के लिए, प्रमुख संस्था कीबैंक ने इस शेयर पर 250 डॉलर के काफी कम लक्ष्य के साथ अपनी 'अंडरवेट' रेटिंग बरकरार रखी है, जो मौजूदा वैल्यूएशन पर उनकी गहरी चिंताओं को दर्शाता है। एचएसबीसी का 366 डॉलर का नया और आशावादी लक्ष्य इन नकारात्मक विचारों के बिल्कुल विपरीत खड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े अपग्रेड की खबर आने के बाद भी शुरुआती कारोबार (प्री-मार्केट) में निवेशकों की प्रतिक्रिया काफी सुस्त रही। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का एक बड़ा वर्ग फिलहाल हड़बड़ी में नहीं है, और वे कोई भी नया निवेश करने से पहले 30 जुलाई को आने वाली आधिकारिक कमाई रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आखिरकार, एचएसबीसी के इस रिकॉर्ड-तोड़ लक्ष्य की असली परीक्षा कंपनी के आगामी वित्तीय नतीजों से ही होगी। जब तक वे आंकड़े जारी नहीं होते, तब तक बाजार की धारणा दो स्पष्ट हिस्सों में बंटी रहेगी। एक तरफ वो लोग हैं जो एप्पल की एआई से जुड़ी कम लागत वाली विकास कहानी पर भारी दांव लगा रहे हैं, और दूसरी तरफ वो लोग हैं जो हार्डवेयर के मुनाफे और कंपनी की बढ़ती लागत पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। इस बहस का नतीजा ही आने वाले समय में टेक सेक्टर की दिशा तय करेगा।


















