वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को जापानी येन पर भारी दबाव देखने को मिला, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी मुद्रा लगातार कमजोर बनी रही। बैंक ऑफ जापान की ओर से नीतिगत दरों में आगे और बढ़ोतरी के स्पष्ट संकेत दिए जाने के बावजूद येन को कोई खास सहारा नहीं मिल सका। दूसरी ओर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई हल्की गिरावट और 160 के संवेदनशील स्तर के पास संभावित सरकारी हस्तक्षेप की चिंताओं ने डॉलर की बढ़त पर कुछ अंकुश जरूर लगाया, जिससे यूएसडी/जेपीवाई एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई 0.10% की बढ़त के साथ लगभग 158 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि शुरुआती यूरोपीय सत्र में यह 158.00 के ऊपर पहुंच गया था।
बैंक ऑफ जापान के रुख और उएदा के बयानों का असर
बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा ने मंगलवार को अपने संबोधन में साफ किया कि यदि आर्थिक आंकड़े और मुद्रास्फीति अनुमानों के अनुरूप रहे तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा जारी रखेगा। उएदा ने कहा, “हम अर्थव्यवस्था और महंगाई के रुख को देखते हुए दरें बढ़ाना जारी रखेंगे।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगामी नीतिगत बदलावों की गति और समय इस बात पर निर्भर करेगा कि आधारभूत अनुमान कितने सटीक साबित होते हैं और जोखिमों का क्या रुख रहता है।
उएदा ने यह भी रेखांकित किया कि देश में बुनियादी महंगाई दर बैंक ऑफ जापान के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर निकल सकती है। इसके पीछे उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़ी बढ़ती मांग और जापानी येन में लगातार बनी कमजोरी के दबाव का हवाला दिया। उएदा की इन टिप्पणियों से यह साफ है कि आगामी बैठकों में दरों में बढ़ोतरी का विकल्प पूरी तरह खुला हुआ है। इसके बावजूद 29-30 अक्टूबर को होने वाली केंद्रीय बैंक की बैठक में ठोस कदम उठाया जाएगा या नहीं, इसे लेकर उएदा ने कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं दिया, जिससे बाजार में अनिश्चितता बरकरार रही।
पेंशन फंड की रणनीति और घरेलू निवेश की उम्मीदों को झटका
जापानी येन की कमजोरी के पीछे केवल नीतिगत बयान ही नहीं, बल्कि संस्थागत निवेश से जुड़े घटनाक्रम भी जिम्मेदार रहे। बाजार विश्लेषकों ने येन में जारी नरमी को जापान के गवर्नमेंट पेंशन इनवेस्टमेंट फंड (GPIF) से जुड़ी हालिया हलचल से जोड़ा है। सोमवार को सामने आई जानकारी के अनुसार, पेंशन फंड ने अपनी सितंबर की बैठक में पोर्टफोलियो आवंटन पर कोई चर्चा नहीं की।
इस जानकारी के सार्वजनिक होने से बाजार की उन उम्मीदों को गहरा झटका लगा, जिनमें यह माना जा रहा था कि पेंशन फंड अपने विदेशी निवेश को समेटकर जापान के घरेलू संपत्तियों में धन वापस लाएगा। यदि फंड घरेलू स्तर पर पैसा लगाता तो इससे येन की मांग में भारी तेजी आ सकती थी, लेकिन आवंटन पर चर्चा न होने से मुद्रा बाजार में निराशा फैल गई और येन बिकवाली के दबाव में आ गया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में राहत और डॉलर इंडेक्स का रुख
अमेरिकी मोर्चे पर, सरकारी बॉन्ड बाजार में हालिया तीव्र बिकवाली के थमने से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी देखी गई। बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड सोमवार को 5.349% के स्तर तक पहुंच गई थी, जो साल 2002 के बाद का उच्चतम स्तर था। मंगलवार को यह यील्ड घटकर लगभग 5.27% पर आ गई। इस गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर को मिलने वाले समर्थन में मामूली कमी दर्ज की गई।
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 101.80 के स्तर की ओर फिसला। इससे एक दिन पहले ही इंडेक्स ने 102.53 का नया साल का उच्चतम स्तर छुआ था। हालांकि यील्ड में इस गिरावट के बावजूद महंगाई और राजकोषीय चिंताओं ने अमेरिकी प्रतिफल को अब भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिकी और जापानी यील्ड के बीच एक बहुत बड़ा अंतर मौजूद है, जिससे वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर-मूल्यवर्ग वाली संपत्तियों का आकर्षण लगातार बना हुआ है। अब बाजार प्रतिभागी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की आगामी दिशा समझने के लिए फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं, हालांकि अक्टूबर में फेड द्वारा दर वृद्धि की संभावनाएं कम होती दिख रही हैं।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजार के हीट मैप और मुद्राओं के तुलनात्मक प्रदर्शन पर नजर डालें तो मंगलवार को जापानी येन ने सभी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर रुख दिखाया, हालांकि स्विस फ्रैंक के सामने येन का प्रदर्शन अपेक्षाकृत सबसे मजबूत रहा। वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान गिरता नजर आया, जिससे पिछले सप्ताह दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय रिकवरी थम गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और भू-राजनीतिक तनावों ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा, भले ही अक्टूबर में ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक (RBA) द्वारा दरों में संभावित बढ़ोतरी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए एक सकारात्मक कारक बन सकती है।
दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सोने (XAU/USD) ने मंगलवार को अच्छी वापसी की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में आई नरमी का फायदा उठाते हुए सोना एशियाई कारोबारी घंटों में 4,104 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर को छूने के बाद उछलकर लगभग 4,173 डॉलर पर आ गया, जिसमें दिन के आधार पर 0.82% की मजबूती दर्ज की गई।
यूरोपीय अनिश्चितता और भू-राजनीतिक परिदृश्य
वैश्विक आर्थिक कैलेंडर में मंगलवार को किसी बड़े टियर-1 आर्थिक आंकड़े के अभाव के बीच निवेशकों की नजर यूरोप और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी रही। यूरोप में फ्रांस का राजनीतिक परिदृश्य बेहद संवेदनशील मोड़ पर है, जहां बजट को लेकर सोशलिस्ट पार्टी और मरीन ले पेन की नेशनल रैली द्वारा सरकार गिराने की संभावनाओं पर बाजार करीब से नजर रख रहा है।
इसके साथ ही यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) भी एक बड़ी दुविधा का सामना कर रहा है। सामान्य परिस्थितियों में जब महंगाई अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी चल रही हो, तो ईसीबी के लिए ब्याज दरें बढ़ाना सीधा कदम होता। लेकिन मौजूदा हालात में बॉन्ड बाजार खुद वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का काम कर रहा है, जिससे यूरोपीय नीति निर्माताओं के सामने आगे की नीति तय करने में गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

















