जीवन बीमा की किस्त छूटने पर सुरक्षा कब तक जारी रहती है और पॉलिसी दोबारा कैसे शुरू कराएंनाना पाटेकर के निधन पर विवादित बयान देने पर तनुश्री दत्ता पर भड़का सिने वर्कर्स एसोसिएशनबॉक्स ऑफिस पर 63वें दिन भी डटी रही हनुमान अंश, दृश्यम 3 की कमाई में सातवें दिन आई सुस्तीमहिंद्रा एक्सयूवी 3XO सीएनजी 15 अक्टूबर 2026 को होगी पेश, जानिए संभावित पावरट्रेन और कीमत का गणितजमुई में चलती ई-रिक्शा की बैटरी फटने से लगी भीषण आग, दो छात्राएं झुलसींरिजर्व बैंक ने 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाया रेपो रेट, जानिए आपकी जेब और लोन की किस्तों पर क्या होगा असरदेहरादून के 7 प्रसिद्ध ठिकानों पर चखें बेहतरीन तंदूरी चिकन, जेब पर भी नहीं पड़ेगा भारीडेयरी उत्पादों के कारोबार से तगड़ा मुनाफा कमाने का तरीका, आकीब ने साझा किए जरूरी गुरआकर्षक अंदाज में सजी थाली से सेहत को मिलेंगे पूरे पोषक तत्व, जानें प्लेटिंग के खास नियमईरान पर हमले की संभावना खारिज होने और तेल भंडार जारी करने के फैसले से कच्चे तेल में नरमी
ईरान पर हमले के टलने और बॉन्ड यील्ड गिरने से अमेरिकी डॉलर में नरमी, 158 के पार पहुंचा येनबाज़ार
9 अक्तू॰ 2026, 1:41 pm (1 घंटे पहले)· 0

ईरान पर हमले के टलने और बॉन्ड यील्ड गिरने से अमेरिकी डॉलर में नरमी, 158 के पार पहुंचा येन

मध्य पूर्व तनाव घटने और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बाद वैश्विक करेंसी बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है। दूसरी ओर, जापान में घरेलू खर्च घटने और खर्च समीक्षा योजना के बीच येन 158 के स्तर के पार कारोबार कर रहा है।

USD/JPY━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण9 अक्टूबर 2026

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

USD/JPY का RSI 56 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार, 9 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में निवेशकों की धारणा में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यह घोषणा किए जाने के बाद कि 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई हमला नहीं होगा, वैश्विक वित्तीय बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर बनी चिंता काफी हद तक शांत हुई है। इस भू-राजनीतिक राहत के बीच अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रात भर आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर को उसके हालिया 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बनाए रखा है, जिससे व्यापक मुद्रा बाजार में जोखिम उठाने की भूख यानी 'रिस्क-ऑन' माहौल को रफ्तार मिली है। कारोबारी सत्र के उत्तरार्ध में निवेशकों की नजर मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए जाने वाले अक्टूबर महीने के उपभोक्ता भावना सूचकांक आंकड़ों पर टिकी हुई है।

करेंसी बाजार का प्रदर्शन और प्रमुख मुद्राओं का रुख

आज के वैश्विक मुद्रा विनिमय सत्र में अमेरिकी डॉलर अपनी अधिकांश प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं की तुलना में कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का रहा है, जिसने डॉलर को सबसे अधिक दबाव में ला दिया। जब प्रमुख मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव की तालिका और हीट मैप का विश्लेषण किया जाता है, तो यह स्पष्ट होता है कि बेस करेंसी और कोट करेंसी के बीच जोखिम से जुड़ी धारणाओं का सीधा असर दिख रहा है। बेस करेंसी को बाईं ओर तथा कोट करेंसी को ऊपरी कतार में रखकर देखने पर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन जैसे जोड़ों में भी बदलाव दर्ज हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं में ताजा लिवाली देखने को मिली है, जबकि सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली मुद्राओं से पूंजी का कुछ बहाव बाहर निकला है।

ये भी पढ़ें

फेडरल रिजर्व की नीति और ब्याज दरों पर रुख

अमेरिकी मुद्रा में आई इस नरमी के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख को लेकर नीति निर्माताओं के बयान भी सामने आए हैं। फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय बैंक को नीतिगत दरों में आगे और बढ़ोतरी करने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीति निर्माता ब्याज दरों में वृद्धि की गति को लेकर पूरी तरह लचीला रुख बनाए रख सकते हैं। नीतिगत ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर की बढ़त को सीमित करने का काम किया है। बाजार प्रतिभागी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आर्थिक गतिविधियों के संतुलन के बीच फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में दरों को किस हद तक ले जा सकता है।

जापान में खर्च समीक्षा योजना और USD/JPY की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की विनिमय दर में तेजी आई और यह 158.20 के स्तर से ऊपर निकल गई, जो दिन के दौरान करीब 0.3 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। ताजा लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 158.31 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जबकि इसका पिछला बंद 158.06 पर था। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 56 पर है, एमएसीडी 0.19 पर सिग्नल लाइन -0.02 के मुकाबले मजबूत स्थिति दिखा रहा है और 50-दिवसीय ईएमए 158.01 तथा 200-दिवसीय ईएमए 157.76 के ऊपर रहते हुए लंबी अवधि के अपट्रेंड को दर्शा रहा है। पिवट स्तर 158.16 पर स्थित है, जिसमें पहला प्रतिरोध 158.57 और दूसरा प्रतिरोध 158.83 है, जबकि पहला समर्थन 157.90 और दूसरा समर्थन 157.49 पर आंका गया है।

जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने शुक्रवार को घोषणा की कि सरकार एक डॉज (DOGE) पहल शुरू करने जा रही है। यह कार्यक्रम अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी मॉडल पर आधारित है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक खर्चों की नए सिरे से व्यापक समीक्षा करना है। इस कदम के जरिए अरबों डॉलर के सार्वजनिक फंड और सरकारी सब्सिडियों की गहन जांच की जाएगी, ताकि साने ताकाइची प्रशासन के खर्चीले नीतिगत वादों के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकें। दूसरी ओर, शुक्रवार को आए आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट आई है। लगातार गिरते घरेलू उपभोग ने जापानी येन की स्थिति को कमजोर किया है, जिसके चलते अमेरिकी यील्ड में नरमी के बावजूद यह जोड़ी 158.00 के दायरे में टिकी हुई है।

ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने में सुधार

कमोडिटी मुद्राओं में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अपनी बढ़त का दायरा बढ़ाया है। एशियाई कारोबारी घंटों में AUD/USD की जोड़ी अपने साप्ताहिक निचले स्तर से संभलते हुए 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई रात भर की गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को उसके 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे दबा रखा है, जिससे इस जोड़ी को मजबूत सहारा मिला है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की उम्मीदों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचली सतह से ऊपर उठाने में मदद की है।

सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की कीमतों में भी मजबूती का रुख देखा गया है। शुक्रवार को सोना अपने दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए वापस 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी ने सर्राफा बाजार को राहत पहुंचाई है। हालांकि दैनिक आरएसआई तकनीकी तौर पर अभी भी कमजोर रुझान दर्शा रहा है, लेकिन अमेरिका के आगामी उपभोक्ता भावना आंकड़ों से पहले सोने में रिकवरी का रुझान स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

वित्तीय बाजार में 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' की व्यवस्था

वैश्विक वित्तीय शब्दावली में 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' दो ऐसी अवधारणाएं हैं जो यह दर्शाती हैं कि किसी निश्चित समय अवधि में निवेशक बाजार में जोखिम उठाने के लिए किस सीमा तक तैयार हैं। रिस्क-ऑन माहौल में बाजार प्रतिभागी भविष्य को लेकर अत्यधिक आशावादी होते हैं और वे अधिक रिटर्न हासिल करने के लिए जोखिम भरी संपत्तियों की खरीदारी करने से नहीं हिचकिचाते। इसके विपरीत, जब बाजार रिस्क-ऑफ की स्थिति में आता है, तो निवेशक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं और सतर्क रुख अपनाते हैं। ऐसी स्थिति में वे सुरक्षित संपत्तियों की तलाश करते हैं, जहां रिटर्न चाहे मामूली हो लेकिन पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित रहे।

रिस्क-ऑन के दौर में शेयर बाजारों में तेजी आती है और सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटी संपत्तियां मूल्यवान हो जाती हैं, क्योंकि वे सकारात्मक आर्थिक विकास के परिदृश्य से सीधे लाभान्वित होती हैं। कच्चे माल और कमोडिटी का बड़ा निर्यात करने वाले देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी उछाल देखा जाता है। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ के माहौल में सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ जाती है, सोने की चमक बढ़ती है तथा अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं सबसे ज्यादा लाभान्वित होती हैं।

मुद्राओं की अलग-अलग भूमिकाएं और अर्थव्यवस्था का ढांचा

विभिन्न मुद्राओं का व्यवहार उनकी घरेलू अर्थव्यवस्थाओं की बुनियादी बनावट पर निर्भर करता है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कनाडाई डॉलर, न्यूजीलैंड डॉलर जैसी प्रमुख मुद्राओं के अलावा रूसी रूबल और दक्षिण अफ्रीकी रैंड जैसी छोटी मुद्राएं रिस्क-ऑन बाजार में तेजी से ऊपर चढ़ती हैं। इन देशों का आर्थिक विकास भारी मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों और कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर है। जब वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में तेजी की संभावना बनती है, तो निवेशक कच्चे माल की अधिक मांग का अनुमान लगाते हैं और इन मुद्राओं में निवेश बढ़ाते हैं।

इसके विपरीत, जब अनिश्चितता बढ़ती है और बाजार रिस्क-ऑफ की ओर मुड़ता है, तो अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक का दबदबा बढ़ जाता है। अमेरिकी डॉलर को दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा होने का लाभ मिलता है, और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी ऋण खरीदते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट होने की संभावना नहीं के बराबर मानी जाती है। जापानी येन को इसलिए सहारा मिलता है क्योंकि जापानी सरकारी बॉन्ड का बड़ा हिस्सा वहां के घरेलू निवेशकों के पास होता है जो संकट में भी अपनी होल्डिंग नहीं बेचते। वहीं स्विस फ्रैंक को स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग नियमों और पूंजी सुरक्षा की मजबूत परंपरा के कारण वैश्विक स्तर पर सुरक्षित पनाहगाह का दर्जा प्राप्त है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी डॉलर में कमजोरी का मुख्य कारण क्या रहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 3 नवंबर के चुनावों से पहले ईरान पर हमले से इनकार और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट मुख्य कारण रहे।
USD/JPY जोड़ी 158 के स्तर से ऊपर क्यों बनी हुई है?
जापान में घरेलू खर्च लगातार नौवें महीने घटने और सरकार द्वारा खर्च समीक्षा पहल शुरू करने से येन कमजोर हुआ है।
फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने ब्याज दरों पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि नीतिगत दरों में और बढ़ोतरी जरूरी है, हालांकि केंद्रीय बैंक दरों में वृद्धि की गति को लेकर लचीला रुख रख सकता है।
सोने की कीमतों पर इस बाजार धारणा का क्या असर हुआ?
अमेरिकी डॉलर और यील्ड में गिरावट के बाद सोना दो महीने के निचले स्तर से उबरकर फिर से 4,200 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।
जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने किस पहल की घोषणा की?
उन्होंने सरकारी सब्सिडी और फंड्स की जांच तथा खर्च समीक्षा के लिए अमेरिकी मॉडल पर आधारित डॉज पहल शुरू करने की घोषणा की।
वित्तीय बाजारों में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का क्या अर्थ होता है?
रिस्क-ऑन में निवेशक विकास और उच्च रिटर्न के लिए जोखिम भरी संपत्तियां खरीदते हैं, जबकि रिस्क-ऑफ में वे सुरक्षित संपत्तियों का रुख करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·16 मिनट पहले

ईरान पर हमले की बात टलने से थोड़ा सुकून मिला है, वरना बाजारों में फिर से डर का माहौल बन जाता। उधर येन का 158 के पार निकलना हैरान करता है जब डॉलर खुद थोड़ा कमजोर हुआ है।

Aisha Khan@aisha-khan·14 मिनट पहले

रविकश जी, सुकून की बात तो ठीक है, पर मुझे नहीं लगता कि सिर्फ ईरान वाला डर टलने से डॉलर पर इतना बड़ा असर पड़ा होगा। बाजार में और भी कई चीज़ें चल रही हैं।

Michael Anderson@michael-anderson·36 मिनट पहले

انتخابات से पहले ईरान पर हमले टलने की बात ने बाजार को थोड़ी राहत दी है, वरना डॉलर और यील्ड का ऐसा घटना आम नहीं है।

Rohan Gupta@rohan-gupta·35 मिनट पहले

माइकल, सही कह रहे हो। पिछले साल जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा था, तब मेरा ब्रोकर पोर्टफोलियो संभालते-संभालते रात भर सोया नहीं था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp