ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3500 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास एक बेहद सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर की संसदीय गवाही और ब्रिटेन द्वारा 1998 के बाद से सबसे महंगे 30-वर्षीय गिल्ट (सरकारी बॉन्ड) की बिक्री के बावजूद मुद्रा बाजार में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिला है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD जोड़ी 1.3500 के भाव पर स्थिर बनी हुई है, जबकि इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.3000 से 1.3800 के बीच रहा है। बाजार प्रतिभागी अब आने वाले जीडीपी और महंगाई आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं ताकि ब्रिटिश करेंसी की अगली दिशा तय हो सके।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति और ब्याज दरों पर खींचतान
संसदीय सुनवाई के दौरान जुलाई मौद्रिक नीति रिपोर्ट और बैंक दर को 3.75% पर बनाए रखने के फैसले पर विस्तृत चर्चा हुई। जुलाई की बैठक में नौ सदस्यीय समिति में से केवल एक सदस्य ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया था, जबकि तीन सदस्यों ने दरों को यथावत रखने के लिए वोट दिया था। गवर्नर ने सांसदों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के जोखिम अभी भी ऊपर की तरफ झुके हुए हैं, हालांकि देश मंदी के करीब बिल्कुल नहीं है। इसके साथ ही गवर्नर ने समिति और बाजार से इस धारणा को खारिज करने की अपील की कि केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरों में वृद्धि की कोई पूर्व-निर्धारित या अनंतिम योजना है।
बाजार के वायदा और स्वैप अनुबंध इस समय दिसंबर तक 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की दर वृद्धि को पूरी तरह से आंक रहे हैं, जबकि मार्च 2027 तक एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों के बीच राय इससे बिल्कुल अलग है। 4 से 8 सितंबर के बीच किए गए एक व्यापक आर्थिक सर्वेक्षण में शामिल सभी 65 अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 17 सितंबर की बैठक में दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके अलावा, 57 अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड इस पूरे साल दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। गवर्नर की गवाही से सख्त मौद्रिक नीति का संकेत मिला है, जो स्वैप मार्केट के आक्रामक अनुमानों के विपरीत केंद्रीय बैंक की सतर्कता को दर्शाता है।
रिकॉर्ड गिल्ट बिक्री और ब्रिटेन की वित्तीय चुनौतियां
ब्रिटेन के बॉन्ड (गिल्ट) बाजार में सरकार के लिए कर्ज जुटाने की लागत ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई है। ब्रिटेन ने 30-वर्षीय गिल्ट की बिक्री 5.82% के कट-ऑफ प्रतिफल (यील्ड) पर पूरी की है, जो 1998 में रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद से सबसे महंगी गिल्ट बिक्री है। 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड का यील्ड 1998 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव को दर्शाता है।
वित्तीय विश्लेषकों और ब्लूमबर्ग इकॉनमिक्स के अनुमानों के अनुसार, 28 अक्टूबर को पेश होने वाले आगामी बजट से पहले ब्रिटेन सरकार का वित्तीय गुंजाइश (फिस्कल हेडरूम) घटकर लगभग आधा रह गया है, जो इस साल की शुरुआत (स्प्रिंग) में उपलब्ध 23.6 अरब पाउंड था। चांसलर ने अपने पहले प्रमुख नीतिगत भाषण में वित्तीय अनुशासन और खर्चों पर नियंत्रण की बात कही थी, लेकिन मंगलवार को हुई सिंडिकेटेड बॉन्ड बिक्री में निवेशकों ने उच्च प्रतिफल की मांग करके अपनी चिंताओं को स्पष्ट कर दिया है।
शुक्रवार को आने वाले आर्थिक आंकड़े तय करेंगे पाउंड की चाल
आगामी शुक्रवार का सत्र पाउंड Sterling और अमेरिकी डॉलर दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। ब्रिटेन के जुलाई महीने के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिसमें पिछले महीने के 0.3% की वृद्धि के मुकाबले शून्य (फ्लैट) वृद्धि की उम्मीद है। उसी समय औद्योगिक और विनिर्माण उत्पादन के आंकड़े भी आएंगे, जिनमें 0.2% और 0.5% की गिरावट के बाद 0.1% की मामूली बढ़त का अनुमान जताया गया है। इसके बाद बैंक ऑफ इंग्लैंड का उपभोक्ता मुद्रास्फीति अपेक्षा सर्वेक्षण जारी होगा, जो पिछली बार 4.0% पर था।
उसी दिन अगस्त महीने का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा भी जारी किया जाएगा। मासिक स्तर पर CPI 0.1% से बढ़कर 0.4% रहने का अनुमान है, जबकि वार्षिक दर 3.4% पर स्थिर रहने की संभावना है। मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति दर घटकर 2.4% पर आने की उम्मीद जताई जा रही है। ब्रिटेन का आर्थिक डेटा जारी होने के साढ़े छह घंटे बाद अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े आएंगे, जो GBP/USD की विनिमय दर को सीधे प्रभावित करेंगे।
GBP/USD का तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण स्तर
तकनीकी चार्ट पर GBP/USD जोड़ी 1.3550 के मजबूत प्रतिरोध (रसिस्टेंस) स्तर के नीचे कारोबार कर रही है। सुनवाई के दौरान मूल्य क्षणिक रूप से इस स्तर से ऊपर गया था, लेकिन एक घंटे के भीतर वापस 1.3550 के नीचे आ गया। 1.3550 के ऊपर अगला मुख्य प्रतिरोध 1.3600 का स्तर है, जो अगस्त के अंतिम दिनों में टूट गया था। इसके बाद अगस्त का उच्चतम स्तर लगभग 1.3700 पाउंड के लिए ऊपरी सीमा का काम कर रहा है।
नीचे की तरफ, 1.3500 का स्तर एक मजबूत समर्थन (सपोर्ट) के रूप में उभरा है, जिसे जोड़ी ने पिछले चार सत्रों से सफलतापूर्वक बनाए रखा है। 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 1.3500 के ठीक नीचे स्थित है। यदि यह स्तर टूटता है, तो अगला समर्थन 1.3450 पर है, जिसके नीचे 200-दिवसीय EMA 1.3400 के स्तर पर मजबूत सहारा प्रदान करता है।
तकनीकी रुझान (बायस) 1.3550 के नीचे रहने तक बेयरिश बना हुआ है। चार सत्रों से कीमत में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) 90 से गिरकर 30 के करीब आ गया है। लाइव आंकड़ों में RSI(14) 52 पर तटस्थ बना हुआ है और MACD 0.00 पर सुस्त गति दर्शा रहा है। यदि अमेरिका का मुद्रास्फीति आंकड़ा मजबूत आता है, तो सितंबर में फेड द्वारा दर वृद्धि की संभावना बढ़ेगी, जिससे GBP/USD में गिरावट आ सकती है। वहीं, कमजोर आंकड़ा दर कटौती की उम्मीद जगाएगा। 1.3550 के ऊपर दैनिक क्लोजिंग इस बेयरिश आउटलुक को अमान्य कर देगी।
ब्रिटिश पाउंड (GBP) का इतिहास और मुद्रा बाजार में महत्व
ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग (GBP) दुनिया की सबसे पुरानी चालू मुद्रा है, जिसका इतिहास 886 ईस्वी से चला आ रहा है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा (FX) बाजार में पाउंड दुनिया की चौथी सबसे अधिक ट्रेड की जाने वाली करेंसी है। 2022 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा बाजार के कुल लेनदेन में पाउंड की हिस्सेदारी 12% है, जिसका दैनिक औसत कारोबार 630 अरब डॉलर का है।
पाउंड के सबसे प्रमुख ट्रेडिंग जोड़ियों में GBP/USD शामिल है, जिसे ट्रेडर्स की भाषा में 'केबल' (Cable) कहा जाता है। यह वैश्विक FX बाजार के 11% लेनदेन का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा GBP/JPY (जिसे 'ड्रैगन' कहा जाता है) 3% और EUR/GBP 2% हिस्सेदारी रखता है। पाउंड जारी करने की जिम्मेदारी बैंक ऑफ इंग्लैंड की है।
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति और आर्थिक संकेतकों का असर
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत मुद्रास्फीति दर को 2% के आसपास सीमित रखने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में समायोजन का सहारा लेता है। जब महंगाई दर बहुत अधिक हो जाती है, तो बैंक दरों में वृद्धि करता है ताकि ऋण महंगा हो और अर्थव्यवस्था में मांग घटे। ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं, जिससे पाउंड मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब महंगाई बहुत कम हो जाती है, तो बैंक दरों में कटौती करता है ताकि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।
इसके अतिरिक्त, जीडीपी आंकड़े, विनिर्माण एवं सेवा PMI, रोजगार दर और व्यापार संतुलन (Trade Balance) जैसे आर्थिक संकेतक भी पाउंड की दिशा तय करते हैं। जब किसी देश का निर्यात आयात से अधिक होता है (सकारात्मक व्यापार संतुलन), तो उसकी मुद्रा की मांग बढ़ती है। मजबूत आर्थिक आंकड़े पाउंड को समर्थन देते हैं, जबकि कमजोर आंकड़े मुद्रा में गिरावट का कारण बनते हैं।
अन्य वैश्विक मुद्राएं और कमोडिटी बाजार का हाल
एशियाई कारोबार सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7200 के ऊपर 14 मई के बाद के उच्चतम स्तर के करीब देखा गया। जापानी येन में तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर दबाव में रहा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। हालांकि, चीन के मिले-जुले व्यापार आंकड़ों ने इस बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ, जापानी येन (USD/JPY) 154.00 के आसपास कारोबार करता दिखा। जापान में मजदूरी वृद्धि के मजबूत आंकड़ों और दूसरी तिमाही के जीडीपी संशोधन के बाद बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा दर वृद्धि की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
ऊर्जा बाजार की बात करें तो क्रूड ऑयल बाजार में स्थिरता के बावजूद डीजल बाजार में भारी तेजी देखी जा रही है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम (डीजल क्रैक स्प्रेड) पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिसने कारोबार के दौरान 102.00 डॉलर प्रति बैरल का नया ऑल-टाइम रिकॉर्ड बनाया।


















