ब्रिटेन के श्रम बाजार में आ रही नरमी और वेतन वृद्धि की रफ्तार घटने के संकेतों के बीच मौद्रिक नीति को लेकर महत्वपूर्ण विश्लेषण सामने आया है। आईएनजी के विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन का वर्तमान आर्थिक परिदृश्य बैंक ऑफ इंग्लैंड को अपनी नीतिगत ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर बनाए रखने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करता है। निजी क्षेत्र में वेतन की वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत के निचले स्तर पर पहुंचती दिख रही है, जो संरचनात्मक प्रभावों को हटाने के बाद लगभग 3.3 प्रतिशत बैठती है। यह स्थिति बैंक ऑफ इंग्लैंड के मध्यम अवधि के 2 प्रतिशत मुद्रास्फीति लक्ष्य के अनुकूल है।
ब्रिटिश अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति का रुख
चार साल पहले रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए संघर्ष के समय ब्रिटिश श्रम बाजार में जो अत्यधिक गर्मी देखी गई थी, उसकी तुलना में वर्तमान श्रम बाजार काफी ठंडा हो चुका है। श्रम बाजार की यह सुस्ती ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न होने वाले द्वितीयक मुद्रास्फीति प्रभावों के जोखिम को काफी हद तक कम करती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीति निर्माताओं के बीच यह विश्वास तेजी से बढ़ रहा है कि ब्रिटिश अर्थव्यवस्था अब लंबे समय तक चलने वाले मुद्रास्फीति के झटकों के प्रति पहले जितनी संवेदनशील नहीं रही है।
हालांकि ऊर्जा दरों में यदि निरंतर उछाल बना रहता है तो भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, मुख्य परिदृश्य यही इशारा करता है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड अगले वर्ष तक अपनी मौजूदा मौद्रिक नीति और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और इन्हें यथावत बनाए रखेगा।
एशियाई और यूरोपीय बाजारों में करेंसी का हाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं पर आगामी केंद्रीय बैंक बैठकों का असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7150 के स्तर से नीचे दबाव में रहा। यह जोड़ी अपने तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। चीन के अगस्त महीने के मिश्रित आर्थिक आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास समर्थन नहीं दिया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की एफओएमसी बैठक से पहले अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर बने रहने के कारण अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल रही है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी मंगलवार सुबह 155.00 के स्तर की ओर बढ़ती हुई नजर आई। व्यापारी इस सप्ताह होने वाली एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान की बैठकों के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में संभावित बढ़ोतरी के दावों और कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है, लेकिन बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की संभावना जापानी येन को भी मजबूती दे सकती है, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित हो सकती है।
सोने की कीमतों पर एफओएमसी बैठक का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी गिरावट का रुख देखा जा रहा है। यूरोपीय सत्र के पूर्वार्ध में सोना लगभग 0.80 प्रतिशत गिरकर 4,265 डॉलर से 4,264 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार करता दिखा। यह बहुमूल्य धातु अपने एक महीने से अधिक के निचले स्तर के बेहद करीब बनी हुई है। निवेशकों और व्यापारियों की निगाहें आज से शुरू हो रही दो दिवसीय एफओएमसी नीति बैठक के फैसलों पर लगी हुई हैं, जिसका बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।














