वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय काफी उथल-पुथल देखी जा रही है, क्योंकि कई व्यापक आर्थिक चुनौतियों ने निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया है। सप्ताहांत के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अचानक आई तेजी और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5% के महत्वपूर्ण स्तर तक पहुंचने से उभरते बाजारों की संपत्तियों में भारी बिकवाली हुई है। इस आक्रामक बदलाव ने अमेरिकी डॉलर (USD) को काफी मजबूती दी है, जिससे मध्य और पूर्वी यूरोपीय (CEE) देशों की मुद्राएं बेहद संवेदनशील स्थिति में आ गई हैं। इन बाहरी दबावों के जवाब में, CEE क्षेत्र में घरेलू ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की गई है, विशेष रूप से कम अवधि वाली ब्याज दरों में। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि ये बढ़ी हुई ब्याज दरें अब एक सुरक्षा कवच के रूप में काम कर सकती हैं, जिससे बाहरी झटकों को कम करने और इन क्षेत्रीय मुद्राओं की गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक दबावों के बीच मध्य यूरोपीय मुद्राओं पर गहरा असर
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अचानक आए इस बदलाव ने क्षेत्रीय नीति निर्माताओं और बाजार सहभागियों को अपनी उम्मीदों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर किया है। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से वह ब्याज दर अंतर काफी कम हो गया है जो आमतौर पर उभरते बाजारों के पक्ष में होता था। जब अमेरिकी यील्ड इतनी तेजी से बढ़ती है, तो विकासशील देशों की संपत्तियों में निवेश का जोखिम बढ़ जाता है और निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में अमेरिकी संपत्तियों की ओर रुख करने लगते हैं। इसके साथ ही, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई तेजी ने एक और मुश्किल खड़ी कर दी है, खासकर उन देशों के लिए जो पूरी तरह से आयातित ऊर्जा पर निर्भर हैं। बढ़ती ब्याज दरों और महंगे ऊर्जा बिलों के इस दोहरे झटके ने CEE के केंद्रीय बैंकों को कठिन स्थिति में डाल दिया है, जिससे उन्हें अपनी मुद्राओं को बड़ी गिरावट से बचाने के लिए स्थानीय दरों को बढ़ाने की अनुमति देनी पड़ी है।
चेक कोरुना (CZK) और चेक नेशनल बैंक (CNB) की बैठक पर नजर
अगर हम CEE क्षेत्र की व्यक्तिगत मुद्राओं पर ध्यान दें, तो चेक कोरुना (CZK) का भविष्य पूरी तरह से वहां के केंद्रीय बैंक के आगामी फैसले पर निर्भर है। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में मची इस हलचल के बावजूद EUR/CZK मुद्रा जोड़ी के लिए उनका अनुमान काफी हद तक अपरिवर्तित है। गुरुवार को होने वाली चेक नेशनल बैंक (CNB) की नीतिगत बैठक से पहले इस विनिमय दर के 24.300 के स्तर के आसपास बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, अगर केंद्रीय बैंक अपना रुख ढीला (डविश) रखता है, तो इस जोड़ी में और अधिक तेजी आ सकती है, जिसका सीधा मतलब कोरुना का कमजोर होना होगा। यदि CNB का रुख बाजार की उम्मीदों से अधिक उदार रहता है, तो निकट भविष्य में कोरुना पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।
पोलिश ज़्लॉटी (PLN) और नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड (NBP) का नीतिगत फैसला
पोलैंड के बाजार में स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। हाल ही में यूरोज़ोन और पोलैंड के बीच ब्याज दर का अंतर CEE क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ा है। इस त्वरित बदलाव ने पोलिश ज़्लॉटी (PLN) को तत्काल सहारा दिया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि EUR/PLN विनिमय दर में स्थिरता आने की संभावना है और यह 4.340 के स्तर से नीचे बनी रह सकती है। नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड (NBP) के हालिया ब्याज दर निर्णय के बाद, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सदस्यों द्वारा दिए गए ढीले (डविश) बयानों को दरकिनार करते हुए निवेशक आगे की सोच रहे हैं। ऐसा लगता है कि बाजार नीति निर्माताओं के बयानों के बजाय वास्तविक ब्याज दरों के अंतर पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे ज़्लॉटी को अस्थायी राहत मिली है।
गैस की कीमतों के प्रति संवेदनशील हंगरी का फ़ोरिंट (HUF)
दूसरी ओर, हंगरी का फ़ोरिंट (HUF) बाहरी घटनाक्रमों के प्रति लगातार संवेदनशील बना हुआ है। EUR/HUF जोड़ी विशेष रूप से वैश्विक कमोडिटी बाजारों में होने वाले बदलावों से प्रभावित रही है, जो अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक गैस की कीमतों के साथ इस मुद्रा के ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंध को दर्शाती है। जैसे-जैसे ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है, फ़ोरिंट पर गिरावट का दबाव बढ़ रहा है और यह यूरो के मुकाबले 368 के स्तर को पार कर सकता है। हंगरी की मुद्रा को मजबूत सहारा मिलने की उम्मीद अगले सप्ताह होने वाली नेशनल बैंक ऑफ हंगरी (NBH) की नीतिगत बैठक से पहले बहुत कम है। विश्लेषक इस आगामी बैठक को कड़े (हॉकिश) नीतिगत जोखिमों से भरा मान रहे हैं, जो अंततः फ़ोरिंट की गिरावट को रोकने के लिए आवश्यक सहारा दे सकती है।
चीनी आंकड़ों के बीच तीन सप्ताह के निचले स्तर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD)
यूरोप से इतर, अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्रा जोड़ियां भी बढ़ती अमेरिकी यील्ड और बदलते आर्थिक आंकड़ों के प्रभाव से जूझ रही हैं। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) पर दबाव बना रहा और यह 0.7150 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था। इससे यह मुद्रा पिछले दिन छुए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब बनी हुई है। कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बनी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड इस कमजोरी का मुख्य कारण है। निवेशक फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक से पहले अपने पोर्टफोलियो को संतुलित कर रहे हैं, और साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा होने वाले मुद्रास्फीति के जोखिमों का आकलन कर रहे हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार चीन से अगस्त महीने के लिए आए मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया।
फेड और BoJ की बैठकों से पहले USD/JPY जोड़ी में तेजी
एशियाई मुद्रा बाजार में जापानी येन (JPY) भी दबाव में है, और USD/JPY जोड़ी 155.00 के स्तर की ओर बढ़ रही है। अमेरिका और जापान के बीच मौद्रिक नीति के अलग-अलग रास्तों के कारण ट्रेडर्स इस जोड़ी में और तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। सभी की निगाहें इस सप्ताह होने वाली FOMC और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नीतिगत बैठकों पर टिकी हैं। फेड द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना और तेल के कारण बढ़ने वाली महंगाई से अमेरिकी यील्ड उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है। हालांकि, अगर बाजार BoJ द्वारा अपनी नीति को कड़ा करने (हॉकिश नॉर्मलाइजेशन) की उम्मीदों को तेजी से शामिल करना शुरू करता है, तो USD/JPY की तेजी सीमित हो सकती है। जापानी नीति निर्माताओं द्वारा अपनी बेहद उदार मौद्रिक नीति को सामान्य करने का कोई भी संकेत येन को मजबूत सहारा दे सकता है।
महत्वपूर्ण FOMC बैठक से पहले $4,300 के नीचे थमा गोल्ड
अंत में, कमोडिटी बाजार में भी वही सतर्कता देखी जा रही है जो विदेशी मुद्रा बाजार में है। शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान मामूली बढ़त दर्ज करने के बावजूद हाजिर सोना किसी भी बड़ी तेजी को बरकरार रखने में असमर्थ रहा है। पीली धातु वर्तमान में $4,300 के स्तर से ठीक नीचे कारोबार कर रही है, जो पिछले सत्र में छुए गए एक महीने के निचले स्तर के करीब है। आज शुरू होने वाली दो दिवसीय महत्वपूर्ण FOMC नीतिगत बैठक से पहले बाजार के प्रतिभागी सतर्क रुख अपना रहे हैं और बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की संभावना बिना ब्याज वाली संपत्ति सोने के आकर्षण को कम कर रही है, जिससे भू-राजनीतिक और ऊर्जा से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद इसकी कीमतें दबी हुई हैं।

















