अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्षों और आपूर्ति बाधित होने की गहराती चिंताओं ने ऊर्जा बाजार में फिर से तेजी ला दी है। अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान मजबूत बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। कारोबार के दौरान कीमतें $99.30 से $99.35 प्रति बैरल के दायरे में देखी गईं, जो पिछले दिन के मुकाबले लगभग 1.30 प्रतिशत की तेजी को दर्शाती हैं। यह मूल्य स्तर मई के बाद के सबसे ऊपरी स्तर के बेहद करीब है, जिसे बाजार ने हाल में छुआ था।
ताजा लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, क्रूड ऑयल (CL=F) का भाव $103.07 प्रति बैरल पर पहुंच चुका है, जो पिछले बंद भाव $101.39 से लगभग 1.66 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। बाजार में दैनिक कारोबार के दौरान $54.98 से $119.48 का 52-सप्ताह का दायरा देखा गया है। लाइव तकनीकी संकेतकों के मुताबिक, RSI(14) वर्तमान में 75 के स्तर पर है जो ओवरबॉट स्थिति का संकेत देता है, जबकि MACD 4.94 पर सिग्नल लाइन 3.45 के ऊपर बना हुआ है, जिससे बुलिश ट्रेंड की पुष्टि होती है।
सऊदी पाइपलाइन बंद और यमन से बढ़ते सैन्य हमले
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते सीधे टकराव ने कच्चे तेल की आपूर्ति प्रणाली पर गहरा असर डाला है। इराक के उस सीमावर्ती क्षेत्र से किए गए ड्रोन हमलों के बाद, जो ईरान की सीमा के बेहद करीब है, सऊदी अरब को अपनी मुख्य ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर के बंदरगाहों तक तेल पहुंचाने वाली प्रमुख धमनी मानी जाती है।
इसके अलावा, यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती बलों ने सऊदी अरब के खमीस मुशेत स्थित एक प्रमुख हवाई अड्डे को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमला किया है। इससे पहले हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इन सिलसिलेवार घटनाओं ने लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों से गुजरने वाले टैंकरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर गतिरोध और कूटनीतिक इनकार
ऊर्जा बाजार के विश्लेषक होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी अमेरिका और ईरान के बीच के गतिरोध पर भी करीब से नजर रखे हुए हैं। दुनिया का एक-चौथाई समुद्री तेल परिवहन इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में रुकावट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त कर सकती है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी फिलहाल किसी राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ईरानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई ने अमेरिका के साथ तुरंत किसी भी प्रकार की शांति वार्ता की संभावना को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक तेहरान की पूर्व शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक ईरान अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटेगा। इस कठोर कूटनीतिक रुख ने आने वाले दिनों में तनाव कम होने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
तकनीकी विश्लेषण और चार्ट पैटर्न
तकनीकी संकेतकों के दृष्टिकोण से, डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल का अल्पावधि रुझान पूरी तरह से सकारात्मक बना हुआ है। तेल की कीमतें $85.39 के अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से काफी ऊपर कारोबार कर रही हैं, जो बाजार के मजबूत आधार को दर्शाता है। इसके अलावा, कीमतों ने $98.57 के 78.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर को भी सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है।
लाइव मूविंग एवरेज के आंकड़ों के अनुसार, EMA20 $92.21 पर, EMA50 $87.42 पर और EMA200 $78.42 पर स्थित हैं। EMA50 का EMA200 के ऊपर होना तकनीकी भाषा में एक गोल्डन क्रॉस की स्थिति बनाता है, जो लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है। वर्तमान में पिवट प्वाइंट $103.04 के आसपास है, जिसमें पहला मुख्य रेजिस्टेंस स्तर R1 $104.24 और दूसरा R2 $105.42 पर देखा जा रहा है। नीचे की ओर, पहला सपोर्ट स्तर S1 $101.86 और दूसरा सपोर्ट S2 $100.66 पर बना हुआ है। दैनिक अस्थिरता को देखते हुए ATR(14) 4.10 पर है, जो ट्रेडर्स के लिए स्टॉप-लॉस निर्धारित करने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की संरचना और महत्ता
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को गहराई से समझने के लिए डब्ल्यूटीआई की बुनियादी संरचना को समझना आवश्यक है। डब्ल्यूटीआई वैश्विक स्तर पर कारोबार किए जाने वाले कच्चे तेल के तीन सबसे प्रमुख बेंचमार्क में से एक है, जिनमें अन्य दो ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड हैं। डब्ल्यूटीआई को मुख्य रूप से 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड माना जाता है। इसे लाइट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका घनत्व या ग्रेविटी अपेक्षाकृत कम होती है, और स्वीट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें सल्फर की मात्रा बेहद कम पाई जाती है।
कम सल्फर और कम घनत्व के कारण इसे रिफाइनरियों में संसाधित करना और इससे पेट्रोल, डीजल तथा जेट फ्यूल तैयार करना काफी आसान और सस्ता होता है। यह तेल मुख्य रूप से अमेरिका में निकाला जाता है और ओकलाहोमा स्थित कुशिंग हब के माध्यम से देश और दुनिया भर में वितरित किया जाता है। कुशिंग हब को इसकी विशाल पाइपलाइन कनेक्टिविटी के कारण 'द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड' के नाम से भी जाना जाता है। यही कारण है कि दुनिया भर के वित्तीय मीडिया और कमोडिटी एक्सचेंजों में डब्ल्यूटीआई के दामों का संदर्भ दिया जाता है।
कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
अन्य सभी वित्तीय संपत्तियों की तरह, कच्चे तेल की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर सीधे तौर पर ऊर्जा की मांग को तय करती है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो औद्योगिक गतिविधियों, परिवहन और बिजली उत्पादन में तेल की खपत बढ़ जाती है, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके विपरीत, वैश्विक मंदी या धीमी आर्थिक वृद्धि मांग को घटाकर कीमतों पर दबाव डालती है।
राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, व्यापारिक प्रतिबंध और सैन्य संघर्ष आपूर्ति में बाधा उत्पन्न करके कीमतों को रातों-रात बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के निर्णय बाजार पर निर्णायक प्रभाव डालते हैं। ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक प्रभावशाली समूह है, जो साल में दो बार बैठक करके उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं। जब समूह उत्पादन बढ़ाता है, तो कीमतें नीचे आती हैं। इसमें ओपेक+ भी शामिल है, जिसमें गैर-ओपेक देशों का एक विस्तृत समूह शामिल है, जिसकी अगुवाई रूस करता है।
अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों को सीधे प्रभावित करता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अधिकांश कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले देशों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग और कीमतें दोनों बढ़ती हैं।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट्स का प्रभाव
कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए हर हफ्ते जारी होने वाली तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट्स अत्यधिक महत्वपूर्ण होती हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) हर मंगलवार को अपने आंकड़े जारी करता है, जबकि अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) हर बुधवार को आधिकारिक सरकारी डेटा प्रकाशित करता है। दोनों एजेंसियों के नतीजों में आमतौर पर काफी समानता होती है और 75 प्रतिशत मामलों में उनके आंकड़ों में केवल 1 प्रतिशत से भी कम का अंतर होता है। हालांकि, सरकारी एजेंसी होने के कारण EIA के आंकड़ों को बाजार अधिक प्रामाणिक मानता है।
यदि इन्वेंट्री रिपोर्ट में कच्चे तेल के भंडार में गिरावट दर्ज की जाती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, यदि इन्वेंट्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होती है, तो यह बाजार में अधिक आपूर्ति या कमजोर मांग को दर्शाता है, जिससे कीमतों में गिरावट आती है।
वैश्विक बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों पर असर
क्रूड ऑयल में आई इस तेजी का असर अन्य वैश्विक वित्तीय संपत्तियों पर भी साफ देखा जा रहा है। मुद्रा बाजार में, AUD/USD जोड़ी एशियाई सत्र के दौरान 0.7150 के स्तर से नीचे दबाव में रही, जो इसके तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) में उछाल आया है। आगामी FOMC बैठक से पहले अमेरिकी डॉलर को मजबूत समर्थन मिल रहा है। चीन के अगस्त महीने के सुस्त आर्थिक आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई मदद नहीं मिल सकी।
USD/JPY जोड़ी भी 155.00 के स्तर की ओर लगातार बढ़ रही है। व्यापारी इस सप्ताह होने वाली FOMC और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में लंबे समय तक सख्ती बनाए रखने की आशंकाओं और तेल संचालित मुद्रास्फीति के जोखिमों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर बनाए रखा है। हालांकि, बीओजे द्वारा मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की सुगबुगाहट जापानी येन को कुछ निचले स्तरों पर सहारा दे सकती है।
सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु यानी सोने (XAU/USD) में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोना $4,265 से $4,264 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसमें 0.80 प्रतिशत की दैनिक गिरावट देखी गई। व्यापारी FOMC की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जिसके चलते सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।


















