कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी के भाव लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर आर्थिक नीतियां क्या रुख तय करेंगी। बाजार के जानकारों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना तेजी दिखाते हुए 1.54 लाख रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है। दूसरी ओर, चांदी के दाम में 800 रुपये की गिरावट देखने को मिली है, जिससे खरीदारों को थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती का रुख बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड यानी हाजिर सोना 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,400 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रहा है। इसके साथ ही, स्पॉट सिल्वर यानी हाजिर चांदी में भी 0.5 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है और यह 67.63 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई है। इन वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजार की चाल पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, जहां सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में कीमती धातुओं की मांग बनी हुई है।
कच्चे तेल और ऊर्जा बाजार की स्थिति
दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI और ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम मामूली गिरावट के साथ उच्च स्तर पर बने हुए हैं। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके अलावा, नेचुरल गैस यानी प्राकृतिक गैस के भाव में एक प्रतिशत की फिसलन दर्ज की गई है और गैसोलीन की कीमतें भी हल्की नरम पड़ी हैं। ऊर्जा सेक्टर में यह हलचल भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक आपूर्ति के हालातों से तय हो रही है।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार
वैश्विक निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले नीतिगत कदमों का अंदाजा लगाने के लिए आने वाले महंगाई के आंकड़ों का बेहद सतर्कता के साथ इंतजार कर रहे हैं। अमेरिका का प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स यानी पीपीआई डेटा आज ही जारी होने वाला है, जिसके बाद शुक्रवार को कंज्यूमर इन्फ्लेशन यानी उपभोक्ता महंगाई के आंकड़े सामने आएंगे। इन रिपोर्टों से यह तय करने में मदद मिलेगी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। डॉलर सूचकांक में कमजोरी आने से भी सोने की कीमतों को काफी सपोर्ट मिला है, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के दौर में लंबी अवधि के लिए इसे सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव का असर
तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में तेजी के बावजूद सोने को इसका सपोर्ट मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंताएं और गहरी हो गई हैं। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा छह अरब डॉलर तक के दीर्घकालिक कर्ज की री-परचेज योजना के ऐलान के बाद यूएस ट्रेजरी यील्ड में भी उछाल आया है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, इस कदम ने कुछ ऐसे निवेशकों को निराश किया है जो इससे कहीं अधिक बड़े स्तर पर कर्ज वापस खरीदे जाने की उम्मीद लगाए बैठे थे।


















