अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसने 9 सितंबर को 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया था। मध्य पूर्व में आपूर्ति मार्गों पर बढ़ते खतरों और बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रमुख आपूर्ति मार्ग प्रभावित रहते हैं, तो आने वाले महीनों में कच्चे तेल के दाम पुराने रिकॉर्ड स्तरों को फिर से छू सकते हैं।
ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की बाधाएं
कच्चे तेल के दामों में इस उछाल का मुख्य कारण सऊदी अरब की 70 लाख बैरल प्रति दिन क्षमता वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का अचानक बंद होना है। यह पाइपलाइन होरमुज़ जलडमरूमध्य को दरकिनार करते हुए लाल सागर तक कच्चा तेल पहुँचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बंद होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ा है। बाजार के रणनीतिकारों का अनुमान है कि जब तक तनाव कम नहीं होता, तब तक ब्रेंट क्रूड 70 से 75 डॉलर के निचले स्तर और 95 से 100 डॉलर के ऊपरी स्तर के बीच अत्यधिक अस्थिर रह सकता है।
यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य या बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाले तेल के प्रवाह में आगे भी बाधा आती है, या फिर यानबू और फुजैराह जैसे बैकअप टर्मिनलों को निशाना बनाया जाता है, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ही बनी रहेंगी। वर्तमान में यानबू में मौजूद तेल का भंडार सऊदी अरब के निर्यात को स्वेज नहर की सुमेड पाइपलाइन के माध्यम से लगभग एक सप्ताह तक बनाए रख सकता है। हालांकि, यदि पाइपलाइन का व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे आपूर्ति में भारी संकट पैदा हो जाएगा और ब्रेंट क्रूड अपने इस साल के उच्चतम स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल को दोबारा जांच सकता है।
तेल और परिष्कृत उत्पादों के पूर्वानुमानों में बढ़ोतरी
बाजार में जारी भारी उथल-पुथल को देखते हुए वित्तीय विश्लेषकों ने कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन उत्पादों के अपने मूल्य अनुमानों को बढ़ा दिया है। 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का पूर्वानुमान बढ़ाकर 107 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है, जबकि 2027 के लिए इसे 86 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 94 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड के 2026 की चौथी तिमाही के मूल्य अनुमान को बढ़ाकर 103 डॉलर प्रति बैरल और 2027 के अनुमान को 82 डॉलर से बढ़ाकर 88 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।
केवल कच्चे तेल के दाम ही नहीं बढ़े हैं, बल्कि रिफाइंड उत्पादों की दरों में भी भारी संशोधन हुआ है। न्यू यॉर्क हार्बर हीटिंग ऑयल (NY Harbor HO) का पूर्वानुमान 2026 की चौथी तिमाही के लिए 4.31 डॉलर प्रति गैलन से बढ़ाकर 5.02 डॉलर प्रति गैलन और 2027 के लिए 3.74 डॉलर से बढ़ाकर 4.25 डॉलर प्रति गैलन कर दिया गया है। वहीं, ICE गैसऑयल के 2026 की चौथी तिमाही के संशोधित मूल्य को 1425 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और 2027 के लिए 1220 डॉलर प्रति मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। इन संशोधित आंकड़ों से साफ़ संकेत मिलता है कि ऊर्जा की ऊंची लागत लंबी अवधि तक बनी रहने वाली है।
विदेशी मुद्रा बाजार पर बढ़ता मुद्रास्फीति का दबाव
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार में महत्वपूर्ण हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7150 के स्तर से नीचे आ गया है। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान यह तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है, जिसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति के जोखिमों से समर्थन मिल रहा है। चीन के अगस्त महीने के मिलाजुला आर्थिक आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा नहीं मिल सका।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में लगातार गिरावट देखी जा रही है। USD/JPY की जोड़ी 155.00 के स्तर की ओर बढ़ रही है। व्यापारी इस सप्ताह होने वाली FOMC और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठकों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना डॉलर को मजबूती दे रही है, लेकिन बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति में संभावित सख्त रुख के संकेतों से जापानी येन को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है।
कीमती धातुओं में गिरावट और सोने पर असर
ऊर्जा की ऊंची कीमतों और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं के बीच सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। यूरोपीय सत्र के पूर्वार्द्ध में सोना लगातार दूसरे दिन गिरकर 4,265 से 4,264 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसमें 0.80% की गिरावट देखी गई। यह कीमती धातु अपने एक महीने के निचले स्तर के काफी करीब पहुंच चुकी है। व्यापारी FOMC की दो दिवसीय मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के निर्णय से पहले बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम कर रही है।

















