बैंक ऑफ जापान के बोर्ड सदस्य हाजिमे तकाता ने स्पष्ट किया है कि जापानी केंद्रीय बैंक को देश के घरेलू वित्तीय हालात और वैश्विक घटनाक्रमों का सूक्ष्म आकलन करने के बाद फुर्ती से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कदम उठाना होगा। उनके अनुसार दीर्घकालिक ब्याज दरों के रुझान पर कड़ी नजर रखना और वित्तीय बाजार के साथ पारदर्शी संवाद बनाए रखना समय की मांग है। इस समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में हल्की बढ़त देखी गई और यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी 0.10 प्रतिशत चढ़कर 160.35 के स्तर पर कारोबार कर रही है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनावों के बीच केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की नई रणनीति और बाजार की स्थिरता
हाजिमे तकाता का मानना है कि वर्ष 2026 एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है, जहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी किसी तय या निश्चित गति से नहीं की जाएगी। केंद्रीय बैंक को अब उस पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलना होगा जिसका उद्देश्य अंतर्निहित मुद्रास्फीति को बढ़ावा देना था। इसके बजाय, बैंक ऑफ जापान को बाजार के सामने यह प्रदर्शित करना होगा कि वह कीमतों में अनियंत्रित बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति के ओवरशूटिंग जोखिम को रोकने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
इसके अलावा, जापान और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौद्रिक नीति के अंतर पर चिंता व्यक्त की गई है। विभिन्न देशों द्वारा ब्याज दरों के अलग-अलग रुख अपनाने से विदेशी मुद्रा बाजारों में अत्यधिक अस्थिरता आ सकती है। ऊर्जा स्रोतों के महंगे होने के कारण मुद्रास्फीति के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर निकल जाने की आशंका बनी हुई है, जिस पर निरंतर निगरानी रखना अनिवार्य है।
बैंक ऑफ जापान का जनादेश और मौद्रिक नीति का इतिहास
जापान का केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ जापान देश में मौद्रिक नीति का निर्धारण करता है। इसका मुख्य जनादेश बैंक नोट जारी करना, मुद्रा नियंत्रण बनाए रखना और लगभग 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर के साथ मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है। आर्थिक गतिविधियों को गति देने और कम मुद्रास्फीति के माहौल से निपटने के लिए बैंक ने वर्ष 2013 में अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति अपनाई थी। इसके तहत क्वांटिटेटिव एंड क्वालिटेटिव ईजिंग यानी क्यूक्यूई मॉडल लागू किया गया था, जिसमें तरलता बढ़ाने के लिए सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदे गए।
वर्ष 2016 में केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति को और अधिक उदार बनाते हुए नकारात्मक ब्याज दरों की शुरुआत की और 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड के यील्ड को सीधे नियंत्रित करना शुरू किया। हालांकि, बदलती आर्थिक स्थितियों के बीच मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर अपनी इस अल्ट्रा-लूज मौद्रिक नीति से पीछे हटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
येन की विनिमय दर और वैश्विक केंद्रीय बैंकों का प्रभाव
केंद्रीय बैंक के बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन कार्यक्रमों के कारण जापानी येन अपने प्रतिस्पर्धी वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले काफी कमजोर हुआ था। वर्ष 2022 और 2023 में यह गिरावट और तेज हो गई क्योंकि अमेरिका और यूरोप के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दशकों की सबसे उच्च मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक रूप से वृद्धि की। जापान और अन्य देशों के बीच ब्याज दरों का यह बड़ा अंतर येन की विनिमय दर घटने का मुख्य कारण बना।
वर्ष 2024 में जब बैंक ऑफ जापान ने अपनी पुरानी मौद्रिक नीति को छोड़ा, तब येन की स्थिति में आंशिक सुधार देखा गया। हालांकि, कमजोर येन और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों के उछाल ने जापान में मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर पहुंचा दिया। देश में कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की संभावना भी मुद्रास्फीति को बल देने वाला एक महत्वपूर्ण कारक रही है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और डॉलर का प्रदर्शन
बैंक ऑफ जापान की टिप्पणियों के साथ-साथ दुनिया के अन्य मुद्रा जोड़ों में भी हलचल देखी जा रही है। ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में आ गया और जीबीपी/यूएसडी दो सप्ताह के निचले स्तर 1.3500 के करीब पहुंच गया। इसी तरह ईयूआर/यूएसडी में भी करेक्शन दर्ज किया गया और यह 1.1600 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से नीचे चला गया। अमेरिकी डॉलर में यह मजबूती अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व के तनाव के कारण देखी जा रही है।
वर्ष 2026 में अमेरिकी डॉलर की चाल फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं, जिद्दी मुद्रास्फीति, और अमेरिका की वित्तीय नीति पर उठते सवालों से प्रभावित हो रही है। वित्तीय बाजारों में अब डिबेसमेंट ट्रेड की चर्चाएं भी गति पकड़ रही हैं।
कच्चे तेल में तेजी, सोना और भू-राजनीतिक तनाव
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की वजह से वित्तीय बाजारों पर जोखिम बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर हमले किए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास केसम द्वीप और दक्षिणी ईरान में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। इन हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें लगभग छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
तेल बाजार में डीजल क्रैक स्प्रेड यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और इंट्राडे रिकॉर्ड 102.00 डॉलर पर पहुंच गया। इस बीच, एशियाई सत्र के दौरान सोना 4,300 डॉलर के स्तर के नीचे जाने की राह देखता हुआ ढाई सप्ताह के निचले स्तर के पास बना हुआ है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं और अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन मिल रहा है।



















