अमेरिकी शेयर बाजार में बोइंग के एक नए सॉफ्टवेयर संकट ने डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज ने शुक्रवार को हासिल की गई जोरदार बढ़त का करीब दो तिहाई हिस्सा गंवा दिया और यह 51,500 के स्तर से ठीक नीचे फिसलकर बंद हुआ। बाजार पर यह दबाव विमान निर्माता कंपनी बोइंग के शेयरों में आई भारी गिरावट के चलते बना। हैरत की बात यह रही कि चिप निर्माता एनवीडिया की ओर से घोषित 150 अरब डॉलर के ऐतिहासिक शेयर पुनर्खरीद (बायबैक) कार्यक्रम के बूते मिला सहारा भी बोइंग की बिकवाली के सामने बौना साबित हुआ। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में आई तेजी और आने वाले महंगाई आंकड़ों को लेकर अनिश्चितता ने इक्विटी निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है। लाइव आंकड़ों के अनुसार डाउ जोंस 51,482 डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर 51,829 डॉलर के मुकाबले 0.67 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन की रोक और बोइंग में भारी गिरावट
फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह बोइंग के 737 मैक्स 10 विमान को तब तक प्रमाणित नहीं करेगा जब तक हाल ही में सामने आई सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी समस्या का पूरी तरह समाधान और मूल्यांकन नहीं हो जाता। नियामक के इस कड़े रुख के बाद बोइंग के शेयर में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे शेयर का भाव 2026 के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इस झटके से पहले बोइंग प्रबंधन को उम्मीद थी कि इस मॉडल को कुछ ही हफ्तों के भीतर नियामक मंजूरी मिल जाएगी।
एफएए के प्रशासक बेडफोर्ड ने इस तकनीकी स्थिति पर विस्तार से रोशनी डालते हुए कहा कि एजेंसी ने अगस्त में छोटे मैक्स 7 संस्करण को एक ऐसे सॉफ्टवेयर वर्जन के आधार पर प्रमाणित किया था जिसने एक ज्ञात गड़बड़ी को ठीक तो किया, लेकिन उसकी वजह से एक नई खामी पैदा हो गई। हालांकि, अमेरिकी एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि जहां भी जरूरत पड़ी है, वे पुराने सॉफ्टवेयर पर लौट चुकी हैं। इसका मतलब यह है कि इस नियामक देरी का सीधा असर पहले से आसमान में उड़ान भर रहे विमानों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि नए विमानों की आगामी डिलीवरी प्रभावित होगी। यह सॉफ्टवेयर मूल रूप से जीई एयरोस्पेस से आया था, जो डाउ सूचकांक का हिस्सा नहीं है।
प्राइस वेटेड स्ट्रक्चर का गणित और एनवीडिया बनाम बोइंग
डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज की बनावट ऐसी है कि इसमें शामिल 30 कंपनियों को उनके कुल बाजार पूंजीकरण के बजाय शेयर की कीमत के आधार पर भार दिया जाता है। इस प्राइस वेटेड व्यवस्था के कारण किसी भी सदस्य कंपनी के शेयर में एक डॉलर की गिरावट या तेजी सूचकांक में बराबर अंकों का असर डालती है। सोमवार के कारोबारी सत्र में बोइंग के शेयर में 12 डॉलर से अधिक की बड़ी गिरावट आई।
दूसरी ओर, एनवीडिया का शेयर 150 अरब डॉलर के विशाल बायबैक कार्यक्रम की घोषणा के दम पर 1.7 प्रतिशत चढ़ा, लेकिन डॉलर के लिहाज से यह बढ़त 4 डॉलर से भी कम की रही। इस कारण बोइंग की गिरावट ने सूचकांक के अंकों पर एनवीडिया के मुनाफे को तीन गुना से भी अधिक अंतर से पछाड़ दिया। वित्तीय संदर्भ के तौर पर देखें तो सोमवार के भाव पर एनवीडिया का 150 अरब डॉलर का नया बायबैक अधिकार लगभग बोइंग के पूरे मार्केट वैल्यूएशन के बराबर बैठता है।
इसके बावजूद डाउ जोंस अपने प्रतिस्पर्धी सूचकांकों एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट के मुकाबले अपेक्षाकृत कम गिरा। इसकी मुख्य वजह यह रही कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की सबसे भारी गिरावटें डाउ से बाहर केंद्रित थीं। उदाहरण के तौर पर, मेटा प्लेटफॉर्म्स में 4.8 प्रतिशत की भारी बिकवाली आई और वह डाउ का हिस्सा नहीं है। दूसरी ओर, डाउ में शामिल दिग्गज टेक कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न केवल करीब 1 प्रतिशत ही फिसलीं।
ट्रेजरी यील्ड में उछाल और फेडरल रिजर्व का रुख
शेयर बाजार के समीकरणों को बिगाड़ने में अमेरिकी बॉन्ड बाजार की उछाल ने भी बड़ी भूमिका निभाई। 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2 प्रतिशत के पार निकल गई, जबकि 30 साल की यील्ड करीब 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो क्रमशः 2007 और 2004 के बाद के उच्चतम स्तरों के करीब हैं। नीतिगत ब्याज दरों के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले 2 साल के ट्रेजरी यील्ड में 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान करीब 0.17 अंक की बढ़ोतरी देखी गई।
फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को अपनी मानक ब्याज दर को बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया था, जो 2023 के बाद उसकी पहली दर वृद्धि थी। फ्यूचर्स बाजार के संकेत बता रहे हैं कि 28 अक्टूबर को होने वाली अगली बैठक में एक और चौथाई प्रतिशत की दर वृद्धि की संभावना लगभग 70 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है। जब एक दशक की सरकारी सुरक्षा पर 5 प्रतिशत से अधिक का जोखिम मुक्त रिटर्न मिल रहा हो, तो वह उन इक्विटी निवेशकों की पूंजी के लिए सीधा मुकाबला पेश करता है जो कई वर्षों बाद के मुनाफे की उम्मीद पर डाउ की कंपनियों में निवेश करते हैं। इस ब्याज दर वृद्धि वाले दिन को मिलाकर देखें तो बीते नौ सत्रों में से छह सत्रों में डाउ जोंस नुकसान के साथ बंद हुआ है।
व्यापक आर्थिक मोर्चे पर बुधवार को जारी होने वाला कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) सूचकांक सालाना आधार पर बढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है। यह महंगाई का वही पैमाना है जिस पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक सबसे ज्यादा भरोसा करता है। इसके अलावा इस हफ्ते आने वाले नौकरियों के आंकड़े यह तय करेंगे कि क्या फेडरल रिजर्व अक्टूबर में भी दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रखेगा।
डाउ जोंस का तकनीकी ढांचा, सपोर्ट और रेजिस्टेंस
चार्ट के नजरिए से देखें तो डाउ जोंस के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं। सूचकांक 21 सितंबर के बाद से 52,000 के ऊपर बंद होने में नाकाम रहा है। शुक्रवार को आई तेजी में भी यह 51,900 के ठीक नीचे तक ही पहुंच सका था। इसके ऊपर 52,400 के करीब स्थित 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) वह स्तर है जहां 22 सितंबर की उछाल थम गई थी। इसलिए यदि बाजार 52,000 के पार निकलता भी है, तो यह ईएमए किसी भी रिकवरी पर मजबूत रुकावट का काम करेगा।
नीचे की तरफ सोमवार का निचला स्तर 51,400 पहला अहम सपोर्ट है। इसके नीचे 51,100 से 51,200 का दायरा आता है, जिसने इस महीने 16 सितंबर और 24 सितंबर को दो बार गिरावट को थामा है। जब तक सूचकांक दैनिक आधार पर 52,000 के ऊपर बंद नहीं होता, तब तक जोखिम नीचे की ओर झुका हुआ है, जिसमें 51,100 पहला लक्ष्य और उसके बाद 50,300 के आसपास स्थित 200-दिवसीय ईएमए अगला पड़ाव हो सकता है। दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (स्टोक आरएसआई) लगभग 22 के निचले स्तर से ऊपर की ओर मुड़ा है, जो यह संकेत देता है कि अगली बड़ी गिरावट से पहले 52,000 की तरफ एक तकनीकी उछाल देखने को मिल सकता है। दैनिक आधार पर 52,000 के ऊपर का बंद स्तर इस मंदी के परिदृश्य को खारिज कर देगा।
लाइव तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 40 पर है, जबकि एमएसीडी -405.92 पर सिग्नक लाइन -338.07 के नीचे है, जो मंदी के मोमेंटम को दर्शाता है। 20-दिवसीय ईएमए 52,154 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 52,383 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 50,331 डॉलर पर स्थित है। 50-दिवसीय एसएमए 52,783 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 50,221 डॉलर पर है, जिससे लॉन्ग टर्म में गोल्डन क्रॉस की स्थिति अब भी बनी हुई है। बोलिंजर बैंड्स 50,917 डॉलर से 53,628 डॉलर के बीच हैं। इसके अलावा पिवट स्तर 51,557 डॉलर, पहला रेजिस्टेंस आर1 51,705 डॉलर, दूसरा रेजिस्टेंस आर2 51,928 डॉलर तथा सपोर्ट एस1 51,334 डॉलर और एस2 51,186 डॉलर पर आंका गया है।
सूचकांक की संरचना और चाल को संचालित करने वाले कारक
डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शेयर बाजार सूचकांकों में से एक है, जिसमें अमेरिका की 30 सबसे अधिक कारोबार वाली अग्रणी कंपनियों को शामिल किया जाता है। इसका निर्माण चार्ल्स डाउ ने किया था, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी स्थापना की थी। इस इंडेक्स की गणना घटक शेयरों की कीमतों को जोड़कर और उन्हें एक विशिष्ट डिवाइजर या फैक्टर से विभाजित करके की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 है। आधुनिक समय में इस सूचकांक की इस बात के लिए आलोचना भी होती रही है कि यह एसएंडपी 500 की तरह व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व नहीं करता क्योंकि यह केवल 30 बड़े औद्योगिक समूहों पर नजर रखता है।
इस सूचकांक की चाल कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सबसे प्राथमिक कारक तिमाही आय रिपोर्टों में सामने आने वाला घटक कंपनियों का समग्र वित्तीय प्रदर्शन है। इसके अलावा अमेरिकी और वैश्विक व्यापक आर्थिक आंकड़े निवेशकों की धारणा को दिशा देते हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरों का स्तर भी डाउ जोंस पर गहरा असर डालता है क्योंकि इससे कर्ज की लागत तय होती है, जिस पर कई कॉरपोरेट कंपनियां भारी रूप से निर्भर हैं। नतीजतन, महंगाई और रोजगार जैसे आंकड़े केंद्रीय बैंक के फैसलों को प्रभावित करके सीधे डाउ की दिशा तय करते हैं।
बाजार के प्राथमिक रुझान को पहचानने के लिए चार्ल्स डाउ द्वारा विकसित डाउ थ्योरी का इस्तेमाल भी खूब किया जाता है। इसका मुख्य नियम यह है कि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ जोंस ट्रांसपोर्टेशन एवरेज की दिशा की तुलना की जाए और किसी रुझान की पुष्टि तभी मानी जाए जब दोनों सूचकांक एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हों। इसमें ट्रेडिंग वॉल्यूम को पुष्टिकरण मानदंड के रूप में देखा जाता है। यह सिद्धांत तीन रुझान चरणों को रेखांकित करता है: एक्यूमुलेशन (जब समझदार निवेशक खरीदारी या बिकवाली शुरू करते हैं), पब्लिक पार्टिसिपेशन (जब आम जनता बाजार में उतरती है), और डिस्ट्रीब्यूशन (जब समझदार निवेशक अपना मुनाफा समेटकर बाहर निकलते हैं)।
निवेशकों के लिए डाउ जोंस में ट्रेड करने के कई साधन मौजूद हैं। इनमें एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) बेहद लोकप्रिय हैं, जो सभी 30 कंपनियों को अलग-अलग खरीदने के बजाय पूरे इंडेक्स को एक ही सिक्योरिटी के रूप में ट्रेड करने की सुविधा देते हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण एसपीडीआर डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ (डीआईए) है। इसके अलावा फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स व्यापारियों को सूचकांक के भविष्य के मूल्य पर दांव लगाने की अनुमति देते हैं, जबकि ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स एक पूर्व-निर्धारित कीमत पर खरीदने या बेचने का अधिकार प्रदान करते हैं। साथ ही, म्यूचुअल फंड्स निवेशकों को डाउ कंपनियों के डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में हिस्सेदारी देकर सूचकांक का सीधा एक्सपोजर देते हैं।
वैश्विक बाजारों, मुद्राओं और जिंसों का हाल
अमेरिकी शेयर बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी हलचल तेज रही। विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को एशियाई सत्र की शुरुआत से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (एयूडी/यूएसडी) की जोड़ी 0.7000 के स्तर के ठीक ऊपर नफे-नुकसान के बीच झूलती नजर आई। भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बनाया। आगे चलकर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपनी आधिकारिक नकद दर को बढ़ाकर 4.60 प्रतिशत करने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (यूएसडी/जेपीवाई) में शुक्रवार की गिरावट के बाद खरीदारी लौटी। हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा को संभालने के लिए संभावित हस्तक्षेप की अटकलों के बीच बैंक ऑफ जापान के नरम मिनट्स ने येन की बढ़त को सीमित रखा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को सहारा दिया, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ीं और फेड द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना को और बल मिला। इस माहौल ने यूएसडी/जेपीवाई को सहारा देते हुए वापस 158.00 के स्तर की ओर धकेल दिया।
उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर भी भारी दबाव देखा गया। कमोडिटी बाजार में पीली धातु बिकवाली के दबाव में फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में आ गई, जो स्तर आखिरी बार अगस्त की शुरुआत में देखे गए थे। नए सिरे से उभरे भू-राजनीतिक संकटों, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड के संयुक्त प्रभाव ने सोने पर यह दबाव बनाया। इसके अलावा ब्रिटेन में डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं और आर्थिक चिंताएं गहरी हो गईं। केंद्रीय बैंकों के मोर्चे पर फेड और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले हफ्ते ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की है और दोनों ही महंगाई के जोखिमों का सामना करते हुए भविष्य के कदमों को नए आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर बता रहे हैं।


















