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29 सित॰ 2026, 9:51 am (16 मिनट पहले)· 0

लग्जरी कारों पर टैक्स कटौती का असर बेअसर, मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी की कीमतें फिर पुराने स्तर पर

जीएसटी रेशनलाइजेशन से लग्जरी कारों पर मिली पांच से सात फीसदी की शुरुआती राहत कार कंपनियों की लगातार मूल्य वृद्धि से पूरी तरह खत्म हो गई है। यूरो के मुकाबले रुपये की गिरावट और बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च के कारण कई मॉडल्स के दाम टैक्स कटौती से पहले के स्तर पर या उससे भी ऊपर पहुंच चुके हैं।

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में लग्जरी वाहन खरीदारों को टैक्स सुधारों से मिली राहत अब पूरी तरह बेअसर साबित हो चुकी है। करीब एक वर्ष पहले जीएसटी रेशनलाइजेशन की व्यवस्था लागू होने पर प्रीमियम गाड़ियों के भाव लगभग 5 से 7 फीसदी तक घट गए थे, जिससे ग्राहकों को लाखों रुपये की सीधी बचत हुई थी। हालांकि, प्रमुख जर्मन वाहन निर्माता मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी की तरफ से बीते महीनों में सिलसिलेवार की गई मूल्य वृद्धि ने उस संपूर्ण बचत को समेट लिया है। वर्तमान स्थिति यह है कि कई चुनिंदा प्रीमियम गाड़ियों के एक्स-शोरूम भाव टैक्स कटौती लागू होने से पूर्व के आंकड़ों को भी पार कर चुके हैं।

मॉडल दर मॉडल बदल गए समीकरण

कीमतों के इस उलटफेर को मॉडल्स के वास्तविक आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है। मर्सिडीज-बेंज जीएलए 200 की कीमत 22 सितंबर 2025 को जीएसटी लागू होने से ठीक पहले 51.5 लाख रुपये दर्ज की गई थी। नई कर दरों के प्रभाव में आते ही इसका दाम घटकर 49.7 लाख रुपये रह गया था, जिससे खरीदारों को करीब 1.8 लाख रुपये का सीधा लाभ मिला। लेकिन हालिया संशोधन के बाद यह गाड़ी अब 51.8 लाख रुपये पर पहुंच चुकी है, जो टैक्स कटौती से पूर्व के स्तर से भी 30 हजार रुपये अधिक है।

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इसी प्रकार बीएमडब्ल्यू एक्स3 एक्सड्राइव20डी एम स्पोर्ट के मामले में भी ऐसा ही रुख देखा गया। जीएसटी कटौती के तत्काल बाद इस एसयूवी का भाव 78.3 लाख रुपये से फिसलकर 73.1 लाख रुपये पर आ गया था। उस समय खरीदारों को लगभग 5.2 लाख रुपये की भारी छूट मिली थी। मौजूदा समय में कंपनी ने इसके दाम दोबारा बढ़ाकर 78.2 लाख रुपये कर दिए हैं, जिसके चलते टैक्स में मिली वह 5.2 लाख रुपये की बचत लगभग शून्य हो चुकी है। छह मर्सिडीज वेरिएंट्स के आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ था कि जीएसटी के तुरंत बाद शुरुआती औसत गिरावट 6.1 फीसदी रही थी, जो अब पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुकी है।

आयात निर्भरता और मुद्रा की कमजोरी बनी मुख्य वजह

प्रीमियम ऑटोमोबाइल कंपनियों के समक्ष यह वित्तीय संकट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा में भारी उतार-चढ़ाव, लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि और ऑपरेशनल खर्चों के ऊंचे स्तर के कारण उत्पन्न हुआ है। सरकारी स्तर पर जीएसटी की निचली दरें आज भी उसी तरह लागू हैं, लेकिन निर्माताओं द्वारा अपनी उत्पादन लागत की भरपाई के लिए बेस प्राइस बढ़ाए जाने से ग्राहकों को मिला कर लाभ छिन गया है।

आम उपभोक्ता गाड़ियों के मुकाबले लग्जरी कार सेगमेंट विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहता है। जनसाधारण के लिए गाड़ियां बनाने वाली मास-मार्केट ऑटो कंपनियों के पास भारत में एक विशाल और मजबूत घरेलू सप्लायर नेटवर्क मौजूद होता है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर पार्ट्स जुटा लेती हैं। इसके विपरीत, प्रीमियम ब्रांड्स की बिक्री का कुल वॉल्यूम सीमित रहता है, जिसके चलते देश में गहरा स्थानीयकरण यानी डीप लोकलाइजेशन करना उनके लिए व्यावसायिक नजरिए से व्यावहारिक नहीं होता। भारत में असेंबल की जाने वाली लग्जरी गाड़ियों के लिए भी सीकेडी किट, इंजन, ट्रांसमिशन, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और विशेष पुर्जे सीधे तौर पर आयात किए जाते हैं। मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी के लिए इन आयातित उपकरणों का बहुत बड़ा हिस्सा सीधे यूरोप से मंगाया जाता है।

जब भी भारतीय रुपया विदेशी मुद्रा, विशेषकर यूरो के मुकाबले कमजोर होता है, तो कंपनियों के लिए उपकरणों की खरीद और गाड़ियों के निर्माण की लागत स्वतः बढ़ जाती है, भले ही मूल पार्ट की विदेशी कीमत में कोई बदलाव न हुआ हो। चूंकि इन गाड़ियों में आयातित पुर्जों का मूल्य बहुत अधिक होता है, इसलिए रुपये में आई मामूली कमजोरी भी कुल लागत में लाखों रुपये का इजाफा कर देती है। ऐसी स्थिति में वाहन निर्माताओं के पास केवल दो विकल्प बचते हैं, या तो वे घटे हुए मार्जिन के साथ अतिरिक्त बोझ स्वयं वहन करें अथवा गाड़ियों के दाम बढ़ाकर इसे उपभोक्ताओं पर डाल दें। टैक्स में छूट एक बार की निश्चित बचत थी, जबकि मुद्रा का लगातार अवमूल्यन और संचालन लागत में इजाफा साल भर कंपनियों के बहीखाते को प्रभावित करता रहा।

ऑडी, मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू के कदम

विभिन्न निर्माताओं ने इस लागत दबाव से निपटने के लिए अलग-अलग समय पर दाम बढ़ाए हैं। ऑडी इंडिया इस कैलेंडर वर्ष में दो बार अपने वाहनों की कीमतें बढ़ा चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप उसकी कुल बढ़ोतरी लगभग 4 फीसदी तक पहुंच गई है। ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों के अनुसार, जीएसटी कटौती के लागू होने पर कंपनी ने अपनी कारों के दाम में करीब 6 से 7 फीसदी की कमी की थी। बलबीर सिंह ढिल्लों ने बताया कि फॉरेक्स में अस्थिरता के चलते उन्हें कई बार दरें बढ़ानी पड़ीं। बीते साल रुपये में यूरो के मुकाबले 19 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि इस साल भी रुपया पहले ही 6 से 7 फीसदी तक कमजोर हो चुका है। इन परिस्थितियों ने जीएसटी से मिले सकारात्मक फायदों को समाप्त कर दिया है।

मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने वर्ष 2026 में दो बार मूल्य वृद्धि लागू की है और 1 अक्टूबर से एक और बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। कंपनी ने जनवरी में 2 फीसदी और अप्रैल में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद अक्टूबर से दोबारा 2 फीसदी इजाफा करने का फैसला लिया गया है। कंपनी का कहना है कि बीते महीनों में बढ़ते निर्माण खर्चों को उसने खुद वहन करके ग्राहकों को तुरंत मूल्य वृद्धि के झटके से बचाया था, परंतु लगातार जारी वित्तीय दबाव के कारण अब यह संतुलित समायोजन अपरिहार्य हो गया है।

बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया ने भी इसी प्रकार पूरे साल में कीमतों में संशोधन किए हैं। कंपनी ने अप्रैल से 2 फीसदी तक और फिर जुलाई से दोबारा 2 फीसदी की वृद्धि की, तथा दबाव जारी रहने पर भविष्य में और बढ़ोतरी की संभावना भी खुली रखी है। बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने कहा कि मैक्रोइकॉनॉमिक विपरीत परिस्थितियों, विशेष रूप से गिरते रुपये और ऊंची लॉजिस्टिक्स लागत के बीच अपने प्रीमियम मानकों को बरकरार रखने के लिए 2026 में दाम बढ़ाए गए हैं। मॉडल और संशोधन के आधार पर बीएमडब्ल्यू के वाहनों में 2026 के दौरान कुल बढ़ोतरी 5 से 7 फीसदी के दायरे में रही है। हरदीप सिंह बरार ने स्पष्ट किया कि 2026 की शुरुआत से ही रुपये में यूरो के मुकाबले लगभग 7 फीसदी की कमजोरी आई है, जिसने मूल्य वृद्धि के लिए भारी दबाव बनाया।

धीमी पड़ती मांग और बाजार का परिदृश्य

कर लाभ के समाप्त होने की यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब भारत का प्रीमियम कार बाजार महामारी के बाद देखी गई तेज वृद्धि के बाद अब सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में इस सेगमेंट की वार्षिक वृद्धि दर लगभग 4 फीसदी दर्ज की गई है। उद्योग जगत से जुड़े अधिकारी पूरे वर्ष के दौरान फ्लैट या फिर सिंगल-डिजिट वृद्धि की ही संभावना देख रहे हैं।

बलबीर सिंह ढिल्लों का अनुमान है कि पूरे वर्ष के दौरान लग्जरी कार बाजार 8 से 10 फीसदी की दर से बढ़ सकता है, हालांकि ग्राहकों का कमजोर सेंटिमेंट इस समय सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। बलबीर सिंह ढिल्लों के मुताबिक, लग्जरी सेगमेंट का सीधा संबंध उपभोक्ता भावनाओं से जुड़ा होता है और इस बाजार में सेंटिमेंट अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शेयर बाजार पिछले 18 महीनों से दो साल की अवधि से लगातार साइडवेज दायरे में चल रहा है और इसके साथ ही वेस्ट एशिया संकट ने अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे सकारात्मक बाजार धारणा को समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

जीएसटी रेशनलाइजेशन ने शुरुआत में खरीदारों को बेहतरीन प्रोत्साहन दिया था, क्योंकि प्रीमियम सेगमेंट में छोटी प्रतिशत की छूट भी लाखों रुपये की बड़ी राहत बन जाती है। लेकिन हालिया मूल्य संशोधनों ने यह साबित कर दिया है कि आयात पर अत्यधिक निर्भर उद्योगों में मुद्रा विनिमय दरों की चाल टैक्स कटौती के प्रभाव को बहुत तेजी से निष्प्रभावी कर सकती है। मर्सिडीज द्वारा अक्टूबर में प्रस्तावित बढ़ोतरी और बीएमडब्ल्यू द्वारा आगे और संशोधन के संकेत यह दर्शाते हैं कि आगामी दिनों में ग्राहकों की जेब पर दबाव और बढ़ सकता है।

सवाल-जवाब

जीएसटी रेशनलाइजेशन से लग्जरी कारों के दाम में कितनी गिरावट आई थी?
जीएसटी रेशनलाइजेशन लागू होने के तुरंत बाद लग्जरी कारों की कीमतों में लगभग 5 से 7 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी।
मर्सिडीज-बेंज जीएलए 200 की कीमत में क्या बदलाव आया है?
जीएलए 200 की कीमत 22 सितंबर 2025 को 51.5 लाख रुपये से घटकर 49.7 लाख रुपये हुई थी, जो अब बढ़कर 51.8 लाख रुपये हो गई है।
बीएमडब्ल्यू एक्स3 की बचत किस प्रकार समाप्त हुई?
बीएमडब्ल्यू एक्स3 एक्सड्राइव20डी एम स्पोर्ट के दाम 78.3 लाख से घटकर 73.1 लाख रुपये हुए थे, लेकिन अब वे दोबारा 78.2 लाख रुपये पर पहुंच चुके हैं।
लग्जरी कारों की कीमतें दोबारा क्यों बढ़ाई गईं?
यूरो के मुकाबले रुपये में आई 6 से 7 फीसदी की हालिया गिरावट, बढ़े हुए लॉजिस्टिक्स खर्च और आयातित पार्ट्स पर अत्यधिक निर्भरता के कारण कीमतें बढ़ाई गईं।
मर्सिडीज-बेंज की अगली मूल्य वृद्धि कब से प्रभावी होगी?
मर्सिडीज-बेंज 1 अक्टूबर 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतों में 2 फीसदी की और बढ़ोतरी करने की तैयारी में है।
साल 2026 में लग्जरी कार सेगमेंट की वृद्धि दर क्या रही है?
वर्ष 2026 की पहली छमाही में लग्जरी कार सेगमेंट की वार्षिक वृद्धि दर सुस्त होकर लगभग 4 फीसदी पर आ गई है।
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