अमेरिकी शेयर बाजार में मंगलवार को मिला-जुला रुझान देखने को मिला, जहां वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली के दबाव के चलते डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज अपने हालिया शिखर से नीचे आ गया। घंटी बजने से ठीक पहले इंडेक्स 14 सितंबर के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन न्यूयॉर्क में नियमित कारोबार शुरू होते ही मुनाफावसूली हावी हो गई। डाउ जोंस सोमवार के बंद स्तर से फिसलकर 51,800 के पास कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर, व्यापक बाजार में टेक शेयरों की भारी मांग के दम पर नैस्डैक कंपोजिट ने नए ऐतिहासिक उच्च स्तर को छू लिया, जबकि एसएंडपी 500 लगभग सपाट बना रहा। बाजार में पूंजी बैंकिंग कंपनियों से निकलकर टेक्नोलॉजी क्षेत्र की ओर जाती दिख रही है, जिसका सीधा असर इंडेक्स के प्रदर्शन पर पड़ा है।
प्राइस-वेटेड बनावट और टेक बनाम बैंक रोटेशन का गणित
डाउ जोंस के इस कमजोर प्रदर्शन की मुख्य वजह इसकी अनूठी प्राइस-वेटेड बनावट है, जिसमें महंगे शेयर अधिक वजन रखते हैं। इंडेक्स में वित्तीय कंपनियों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है, जबकि शुद्ध टेक्नोलॉजी दिग्गजों की संख्या सीमित है। उदाहरण के लिए, गोल्डमैन सैक्स के एक शेयर की कीमत 900 डॉलर से अधिक है, जो डाउ के सबसे महंगे घटकों में शामिल है। इसके विपरीत, जेपीमॉर्गन चेस के शेयर की कीमत 400 डॉलर से कम है। हालांकि कुल मार्केट कैप के लिहाज से जेपीमॉर्गन चेस गोल्डमैन सैक्स से तीन गुना से भी अधिक बड़ा है, लेकिन प्राइस-वेटेड गणना के कारण गोल्डमैन सैक्स में 1% की गिरावट इंडेक्स से जेपीमॉर्गन के मुकाबले दोगुने से भी अधिक अंक घटा देती है।
इसके साथ ही, मेटा जैसे बड़े टेक नाम डाउ जोंस इंडेक्स का हिस्सा ही नहीं हैं। जब निवेशक बैंकों के शेयर बेचकर टेक्नोलॉजी कंपनियों में खरीदारी करते हैं, तो नैस्डैक कंपोजिट रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाता है, जबकि वित्तीय शेयरों के भारी दबाव के कारण डाउ जोंस नीचे फिसल जाता है। बाजार के मौजूदा सत्र में ठीक यही तकनीकी असंतुलन देखने को मिला।
कच्चे तेल में पांचवें दिन गिरावट और ऊर्जा क्षेत्र का असर
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिसलकर 8 सितंबर के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार में चर्चा है कि ईरान ने सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश की है। हालांकि, यह प्रस्ताव इस शर्त पर निर्भर है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की अपनी नाकाबंदी हटा ले, जिसकी अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
कच्चे तेल के दामों में इस नरमी के डाउ जोंस के लिए दो अलग-अलग पहलू हैं। इंडेक्स में शेवरॉन एकमात्र तेल उत्पादक कंपनी है, जिसे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सीधा नुकसान होता है। इसके उलट, इंडेक्स में शामिल बाकी 29 कंपनियों के लिए ईंधन सस्ता होने से परिचालन लागत घटती है और बचत बढ़ती है। लेकिन अल्पकालिक बाजार धारणा पर ऊर्जा शेयरों की सुस्ती का भी असर दर्ज किया गया।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और उधारी दरों में इजाफा
मैक्रोइकॉनॉमिक मोर्चे पर निवेशकों की नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक पर टिकी हुई हैं। फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को अपनी मुख्य संदर्भ दर (ओवरनाइट लेंडिंग रेट) में चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 3.75-4.00% कर दिया था। जुलाई 2023 के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा किया गया यह पहला ब्याज दर इजाफा था, जिसे ईंधन की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति के दबाव ने गति दी थी।
केंद्रीय बैंक के इस कदम का असर तुरंत कमर्शियल बैंकिंग प्रणाली पर देखा गया। जेपीमॉर्गन चेस ने 17 सितंबर को अपनी प्राइम रेट बढ़ाकर 7.00% कर दी, जो वह अपने सबसे भरोसेमंद और साख वाले ग्राहकों से वसूलता है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि नीतिगत दरों में हुई वृद्धि सीधे तौर पर कॉरपोरेट और रिटेल कर्जदारों के लिए ऋण की लागत में तब्दील हो गई। फेडरल रिजर्व का अगला ब्याज दर निर्णय 28 अक्टूबर को निर्धारित है, जो अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक छह दिन पहले आएगा। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद ईरान के साथ समझौते की उम्मीद जताई है।
चार्ट पर अहम रेजिस्टेंस और सपोर्ट स्तर
डाउ जोंस के चार्ट पर तकनीकी स्तरों की बात करें तो 52,100 का दायरा पहला बड़ा रेजिस्टेंस बनकर उभरा है। इंडेक्स ने बाजार खुलने से पहले 17 सितंबर और सोमवार के 52,100 से ऊपर के उच्च स्तर को पार किया था, लेकिन ट्रेडिंग शुरू होते ही फिसलकर इसके नीचे आ गया। इसके अलावा, मंगलवार को बना 52,400 के ठीक ऊपर का स्तर 14 सितंबर के बाद का सबसे उच्चतम स्तर था, जहां जाकर तेजी थम गई।
सपोर्ट स्तरों के लिहाज से, मंगलवार का 51,800 के ठीक नीचे का निचला स्तर सोमवार के 51,750 से ऊपर के निचले स्तर से मेल खाता है। यह लगातार दूसरा सत्र है जब इंडेक्स ने इस स्तर पर सहारा लिया है। यदि यह दायरा टूटता है, तो अगला सपोर्ट 18 सितंबर का निचला स्तर है जो 51,500 के ठीक नीचे स्थित है। इसके बाद 16 सितंबर का 51,200 के करीब का निचला स्तर आता है, जो जून के बाद का सबसे निचला स्तर रहा है।
टेक्निकल इंडिकेटर्स और मोमेंटम का रुख
मौजूदा तकनीकी सेटअप 52,100 के स्तर से नीचे मंदी का संकेत दे रहा है। यदि इंडेक्स में गिरावट बढ़ती है, तो पहला लक्ष्य 51,500 के ठीक नीचे का 18 सितंबर का निचला स्तर होगा, और दूसरा लक्ष्य 51,200 के करीब का 16 सितंबर का स्तर रहेगा। मोमेंटम इंडिकेटर के रूप में देखा जाने वाला दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) लगभग 22 के स्तर पर है और पिछले दो हफ्तों से बिना किसी रिवर्सल के लगातार फिसल रहा है। मंदी का यह नजरिया केवल तभी अमान्य होगा जब इंडेक्स दैनिक आधार पर 52,200 के स्तर के ऊपर बंद होने में सफल हो जाए।
ताजा क्लोजिंग डेटा के अनुसार, इंडेक्स 51,787 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद 52,049 के मुकाबले 0.50% की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 45,057 से 54,744 के बीच है, और सत्र में वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.41 गुना दर्ज किया गया। दैनिक RSI(14) का स्तर 41 पर है, जबकि MACD -363.66 पर है जो सिग्नल लाइन -246.48 के नीचे बना हुआ है और हिस्टोग्राम -117.18 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है। 20-दिवसीय EMA 52,445 और 50-दिवसीय EMA 52,525 पर है, जबकि 200-दिवसीय EMA 50,303 पर स्थिर है। मूल्य अभी भी 200-दिवसीय EMA से ऊपर है, जिससे लंबी अवधि का अपट्रेंड बरकरार है। 20-दिवसीय सपोर्ट लगभग 51,187 और रेजिस्टेंस 53,820 के पास है, जबकि इंट्राडे पिवट 51,944, रेजिस्टेंस R1 52,162, R2 52,537 और सपोर्ट S1 51,569, S2 51,351 पर आंका गया है।
डाउ जोंस की कार्यप्रणाली और डाउ थ्योरी का महत्व
डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने स्टॉक मार्केट सूचकांकों में से एक है, जिसमें अमेरिका की 30 प्रमुख व्यापारिक कंपनियां शामिल हैं। यह मार्केट कैपिटलाइजेशन के बजाय प्राइस-वेटेड प्रणाली पर आधारित है। इसे सभी 30 घटक शेयरों के भाव को जोड़कर और फिर एक डिवाइजर (वर्तमान में 0.152) से विभाजित करके निकाला जाता है। इसकी स्थापना चार्ल्स डाउ ने की थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी नींव रखी थी। हालांकि, केवल 30 बड़े समूहों को शामिल करने के कारण अक्सर इसकी यह कहकर आलोचना की जाती है कि यह एसएंडपी 500 की तरह पूरे बाजार का व्यापक प्रतिनिधित्व नहीं करता।
चार्ल्स डाउ द्वारा विकसित डाउ थ्योरी बाजार के प्राथमिक रुझान को पहचानने का एक सुप्रसिद्ध तरीका है। इसका मुख्य नियम यह है कि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज और डाउ जोंस ट्रांसपोर्टेशन एवरेज की दिशा की तुलना की जाए। जब दोनों सूचकांक एक ही दिशा में बढ़ रहे हों, तभी किसी बड़े ट्रेंड की पुष्टि मानी जाती है। इसमें वॉल्यूम को पुष्टिकरण मानदंड के रूप में देखा जाता है। यह सिद्धांत पीक और ट्रफ विश्लेषण पर टिका है और इसके तीन चरण होते हैं: एक्यूमुलेशन (जब स्मार्ट मनी खरीदारी या बिकवाली शुरू करती है), पब्लिक पार्टिसिपेशन (जब आम निवेशक शामिल होते हैं), और डिस्ट्रीब्यूशन (जब स्मार्ट मनी बाजार से बाहर निकलती है)।
निवेशक डाउ जोंस में सीधे शेयरों के अलावा ईटीएफ जैसे कि एसपीडीआर डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ (DIA) के माध्यम से भी ट्रेड कर सकते हैं। इसके अलावा फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स और ऑप्शंस ट्रेडर्स को भविष्य के मूल्य पर दांव लगाने की सुविधा देते हैं, जबकि म्यूचुअल फंड पूरे इंडेक्स के बास्केट में विविधीकृत निवेश का विकल्प प्रदान करते हैं।
वैश्विक बाजारों, करेंसी और सोने की चाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य बाजारों में भी अहम हलचल देखी गई। एशियाई सत्र में बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शॉर्ट-टर्म ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। 7-2 के बहुमत से लिया गया यह फैसला 31 साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के बावजूद बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। इसके चलते यूएसडी/जेपीवाई 157.50 के पास मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जहां जापानी हस्तक्षेप के डर ने येन की गिरावट को सीमित रखा।
करेंसी बाजार में एयूडी/यूएसडी एशियाई सत्र में 0.7100 के ऊपर पहुंच गया, जिसे आरबीए की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों से सहारा मिला। हालांकि, मजबूत अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव ने इसकी तेजी को सीमित रखा। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट आई और यह 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की तरफ आ गया। इसके अलावा, वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को होने वाली बैठक पर भी निवेशकों की नजरें हैं, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के व्यापारिक संबंधों की दिशा तय कर सकती है।

















