अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में इन दिनों अनिश्चितता का माहौल गहराता नजर आ रहा है। सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड और ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने मिलकर इक्विटी बाजारों पर भारी दबाव बनाया हुआ है। अमेरिकी शेयर बाजार में एसएंडपी 500 सूचकांक लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि यूरोपीय बाजारों में बिकवाली का दायरा और भी व्यापक रहा। हालांकि बाजार के भीतर विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन काफी असमान रहा, जहां यूटिलिटीज और मैटेरियल्स जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भारी नुकसान देखा गया, वहीं मेगा-कैप तकनीकी कंपनियों की बढ़त ने समग्र गिरावट को काफी हद तक थामने का काम किया।
वॉल स्ट्रीट का हाल और तकनीकी शेयरों का सहारा
अमेरिकी शेयर बाजार में दिन के निचले स्तरों से कुछ सुधार जरूर देखा गया, लेकिन वह सूचकांक को लाल निशान से बाहर निकालने के लिए नाकाफी साबित हुआ। एसएंडपी 500 सूचकांक 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे उसकी लगातार तीसरे दिन की फिसलन दर्ज हुई। दिन के कारोबार के दौरान बाजार की चौड़ाई स्पष्ट रूप से नकारात्मक रही, जहां सूचकांक में शामिल लगभग दो-तिहाई कंपनियां नुकसान के साथ बंद हुईं। सबसे ज्यादा मार यूटिलिटीज क्षेत्र पर पड़ी जिसमें 1.02 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मैटेरियल्स सेक्टर भी 1.01 प्रतिशत टूट गया।
बाजार को बड़े पैमाने पर बिखरने से बचाने में सबसे अहम भूमिका दिग्गज टेक कंपनियों ने निभाई। डॉयचे बैंक के रणनीतिकारों के अनुसार, शीर्ष तकनीकी समूह यानी मैग-7 के शेयरों में 0.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसने सूचकांक के कुल नुकसान को सीमित कर दिया। तकनीकी कंपनियों की यह मजबूती निवेशकों के लिए एक सहारा साबित हुई, लेकिन बाकी क्षेत्रों में चौतरफा बिकवाली ने बाजार के सामान्य रुख को कमजोर बनाए रखा।
यूरोपीय बाजारों में व्यापक गिरावट
अमेरिकी बाजार के विपरीत, यूरोप के प्रमुख इक्विटी बाजारों में बिकवाली का रुख काफी स्पष्ट और लगातार बना रहा। क्षेत्रीय बेंचमार्क स्टोक्स 600 सूचकांक में 0.55 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इसी तरह जर्मनी का डैक्स सूचकांक 0.57 प्रतिशत नीचे खिसक गया, जबकि फ्रांस के सीएसी 40 में 0.52 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। यूरोप में निवेशकों की चिंताएं केवल बॉन्ड यील्ड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा लागत में वृद्धि और सख्त मौद्रिक नीतियों का असर कॉर्पोरेट आय पर पड़ने की आशंका भी गहरा रही है।
बॉन्ड यील्ड, महंगाई और ब्याज दरों की चुनौती
वैश्विक इक्विटी बाजारों में पैदा हुई इस कमजोरी की मुख्य जड़ अमेरिकी ऋण बाजार में देखने को मिल रही है। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया दो दिवसीय तेजी ने महंगाई की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है। इसके अलावा, अमेरिका के विनिर्माण और सेवा पीएमआई आंकड़े कई वर्षों के शिखर पर पहुंच गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था अभी भी बहुत गर्म है। जब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी के सदस्यों ने भविष्य में ब्याज दरों के सख्त पथ का संकेत दिया, तो सरकारी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड दोनों छोरों पर कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
यह स्थिति अमेरिकी राजकोषीय परिदृश्य के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि ट्रेजरी नोट्स सभी विपणन योग्य ट्रेजरी का लगभग 52 प्रतिशत हिस्सा हैं। ऐसे में यील्ड में होने वाली तीव्र वृद्धि सरकार के कर्ज की लागत को तेजी से बढ़ाती है और इक्विटी जैसे जोखिम भरे निवेश विकल्पों से नकदी खींचने का काम करती है। ऊर्जा कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलना भी महंगाई नियंत्रण के प्रयासों के लिए एक गंभीर झटका साबित हुआ है। ताजा कारोबारी सत्र में क्रूड ऑयल 93.64 डॉलर पर दर्ज किया गया, जो पिछले बंद स्तर 94.61 डॉलर से 1.03 प्रतिशत नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो इसका 14-दिवसीय आरएसआई 51 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी 2.46 पर है जो सिग्नल लाइन 3.57 के मुकाबले मंदी का रुख दर्शा रहा है। हालांकि इसका 50-दिवसीय ईएमए 90.02 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 80.13 डॉलर के साथ दीर्घकालिक तेजी के रुझान और गोल्डन क्रॉस को बनाए हुए है।
मुद्रा बाजारों में हलचल और केंद्रीय बैंकों के कदम
अमेरिकी डॉलर सूचकांक ने अपनी हालिया तेजी के दम पर लगभग दो महीने के उच्चतम स्तर को छुआ, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे फिसलने के बाद अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास बेहद कमजोर नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक आरबीए द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं पर भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर का असर भारी पड़ गया।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र में थोड़ा नीचे खिसका और 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर जाकर ठहर गया। इसका मुख्य कारण जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका थी, जिससे येन के मंदड़ियों ने सावधानी बरतनी शुरू कर दी। हालांकि बैंक ऑफ जापान ने पिछले सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो काफी हद तक बाजार की पुरानी उम्मीदों के अनुरूप था। फिर भी, बैंक ऑफ जापान का यह कदम अपेक्षाकृत नरम माना गया, जिससे येन की तेजी सीमित रही और डॉलर को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बल पर व्यापक मजबूती मिलती रही।
सोने में ठहराव और आगे का परिदृश्य
कमोडिटी बाजार में सोने की चाल भी काफी सुस्त बनी रही। पिछले कारोबारी दिन बनाए गए साप्ताहिक निचले स्तर के करीब पीली धातु एक सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आई। मजबूत डॉलर में कुछ ठहराव आने से सोने को थोड़ा सहारा जरूर मिला, लेकिन फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण, ऊंची बॉन्ड यील्ड और निरंतर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का रुझान डॉलर की ओर बना हुआ है। जब तक ऊर्जा की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में स्थिरता नहीं आती, तब तक इक्विटी और कमोडिटी बाजारों में जोखिम धारणा दबाव में रहने की पूरी संभावना है।

















