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द वन रिव्यू (2026): आस्था, सस्पेंस और लोककथाओं के बीच सिनेमाघरों में दर्शकों की बंटी रायमनोरंजन
25 सित॰ 2026, 12:03 pm (4 मिनट पहले)· 0

द वन रिव्यू (2026): आस्था, सस्पेंस और लोककथाओं के बीच सिनेमाघरों में दर्शकों की बंटी राय

सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अभिनीत फैंटेसी हॉरर 'द वन' आज थिएटर्स में रिलीज हुई, जिसे लेकर सिनेमाप्रेमी दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं।

सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की नई मिस्ट्री फैंटेसी थ्रिलर 'द वन' रिव्यू (2026) आज सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। बड़े पर्दे पर 25 सितंबर को रिलीज हुई इस प्रस्तुति को लेकर टिकट खिड़की से बाहर निकल रहे दर्शकों की प्रतिक्रियाएं पूरी तरह से दो हिस्सों में विभाजित दिखाई दे रही हैं। एक तरफ जहां कई दर्शक बिहार की लोकसंस्कृति, छठ पूजा के रिवाजों और वन देवी की पौराणिक मान्यताओं के अनूठे संगम की सराहना कर रहे हैं, वहीं दर्शकों का दूसरा धड़ा स्क्रीनप्ले को बेहद धीमा, बेजान और अप्रभावी बताकर खारिज कर रहा है।

थिएटर रिलीज से पहले छठ गीत ने बांधा था समां

सिनेमाघरों में दस्तक देने से पहले ही फिल्म की टीम ने प्रचार की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति तैयार की थी। रिलीज से ठीक कुछ दिन पहले इंटरनेट पर साझा किए गए छठ गीत ने संगीत प्रेमियों और पारंपरिक दर्शकों को गहराई से छुआ। डिजिटल मंच पर इस पारंपरिक ट्रैक को भरपूर प्यार मिला और यू-ट्यूब पर यह संगीत वीडियो 47 मिलियन व्यूज के आंकड़े को पार करने में सफल रहा। इस भावनात्मक गीत की वजह से पूर्वांचल के दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई थी, जिसके चलते शुरुआती शो में दर्शकों की अच्छी भीड़ देखने को मिली।

दीपक कुमार मिश्रा के निर्देशन में लोकसंस्कृति और अलौकिक रोमांच

दीपक कुमार मिश्रा द्वारा निर्देशित इस फिल्म की कथाभूमि सीधे तौर पर पूर्वांचल और बिहार के रीति-रिवाजों से जुड़ती है। कथानक के केंद्र में घने जंगलों में छिपी रहस्यमयी शक्तियां, वन देवी से जुड़ी मान्यताएं, भक्ति भाव और पारिवारिक ताना-बाना शामिल है। सिनेमा हॉल में फिल्म देखकर निकले कई दर्शकों ने माना कि हिंदी सिनेमा ने इस तरह के क्षेत्रीय लोक-रोमांच को बहुत कम पर्दे पर उतारा है।

सोशल मीडिया पर अमित भाटिया ने फिल्म के पक्ष में अपना आकलन साझा करते हुए लिखा कि यह प्रस्तुति लोककथा और फैंटेसी का एक नया व दिलचस्प मेल पेश करती है जहां कहानी ही मुख्य भूमिका निभाती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अलौकिक रोमांच, आस्था और हास्य का यह ताना-बाना बॉलीवुड में एक ताजा बदलाव की तरह है, जिसने पौराणिक आस्थाओं के साथ हॉरर का नया प्रयोग किया है।

सुनील ग्रोवर की छाप और सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध

कलाकारों की बात करें तो मध्यांतर के बाद की कहानी में सुनील ग्रोवर का अभिनय सोशल मीडिया पर विशेष रूप से सराहा जा रहा है। प्रशंसकों ने दूसरे हाफ में उनके काम की जमकर तारीफ की है, जबकि मनीष पॉल का कॉमिक अंदाज भी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने में कामयाब रहा है। हालांकि, प्रशंसा के इस शोर के बीच आलोचकों और असंतुष्ट दर्शकों की भी कोई कमी नहीं है। अनमोल जमवाल ने इस पर निराशा जताते हुए अपनी टिप्पणी में कहा कि यह फिल्म इतनी फीकी है जैसे दीवारों पर सूखते पेंट को देखना।

नकारात्मक समीक्षा देने वाले लोगों का तर्क है कि जंगल के रहस्य को सुलझाने के चक्कर में पटकथा पूरी तरह भटक जाती है। कई दर्शकों ने इसे एक उबाऊ और निष्प्रभावी हॉरर ड्रामा करार दिया, जो शुरुआत में उम्मीदें जगाने के बाद धीरे-धीरे दम तोड़ देता है। समीक्षकों के विस्तृत विश्लेषण आने अभी बाकी हैं, लेकिन शुरुआती रुझानों से साफ है कि दर्शकों का यह ध्रुवीकरण आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर बड़ा असर डालेगा।

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सवाल-जवाब

क्या द वन देखने लायक फिल्म है?
यदि आप पूर्वांचल की लोकसंस्कृति, छठ परंपरा और पौराणिक आस्थाओं से जुड़ा प्रयोग देखना चाहते हैं तो यह देखी जा सकती है, लेकिन इसकी धीमी गति सामान्य थ्रिलर पसंद करने वालों को निराश कर सकती है।
द वन फिल्म किस विषय पर आधारित है?
यह फिल्म बिहार की लोक संस्कृति, छठ पूजा, वन देवी की मान्यताओं और जंगलों में छिपे अलौकिक रहस्यों पर आधारित एक फैंटेसी हॉरर थ्रिलर है।
फिल्म के निर्देशक और मुख्य कलाकार कौन हैं?
इस फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है और इसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, सुनील ग्रोवर तथा मनीष पॉल मुख्य भूमिकाओं में हैं।
फिल्म के छठ गीत को यूट्यूब पर कितने व्यूज मिले हैं?
रिलीज से कुछ दिन पहले आए फिल्म के छठ गीत को यूट्यूब पर 47 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं।
द वन जैसी अन्य कौन सी लोककथा आधारित फिल्में हैं?
यह फिल्म क्षेत्रीय मान्यताओं और अलौकिक रोमांच को जोड़ने के मामले में 'कांतारा' और 'तुम्बाड' जैसी फिल्मों के प्रशंसकों की पसंद से मेल खाती है।
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