अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती का दायरा लगातार बढ़ा रहा है। यूरोपीय सत्र के शुरुआती घंटों में डॉलर इंडेक्स मामूली नरमी के साथ 101.15 के इर्द-गिर्द देखा गया, जबकि ताजा कारोबारी आंकड़ों में यह 101.12 के स्तर पर दर्ज किया गया है। दैनिक स्तर पर मामूली गिरावट दिखने के बावजूद, यह सूचकांक लगातार दूसरे हफ्ते समग्र मजबूती दर्ज करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले यील्ड में तेज उछाल और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में सख्ती जारी रहने की अटकलों ने ग्रीनबैक को व्यापक सहारा दिया है। वित्तीय बाजार के भागीदार अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के आगामी बयानों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि ब्याज दरों की भविष्य की दिशा साफ हो सके।
ट्रेजरी यील्ड में दशकों बाद दिखा उछाल
अमेरिकी बॉन्ड बाजार में आई अभूतपूर्व तेजी ने मुद्रा बाजार की गतिशीलता बदल दी है। बीते सत्र के दौरान 30 साल की अवधि वाले अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.502 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गया, जो जून 2004 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं दूसरी ओर, 10 साल की मैच्योरिटी वाले ट्रेजरी नोट का यील्ड बढ़कर 5.225 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसने जून 2007 के बाद के उच्चतम शिखर को छुआ है। इन दोनों प्रमुख बेंचमार्क यील्ड्स में आई तेजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निवेशक लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों के बने रहने की तैयारी कर रहे हैं। इस तीव्र चढ़ाव ने निवेशकों का रुझान डॉलर-आधारित संपत्तियों की ओर मजबूती से मोड़ दिया है, जिससे यह वैश्विक मुद्रा दो महीने के शीर्ष स्तरों के करीब डटी हुई है।
फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर बाजार में उम्मीदें तेजी से बदल रही हैं। ब्याज दरों पर नजर रखने वाले सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर महीने की बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की संभावना अब लगभग 67.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा केवल एक सप्ताह पहले 55.4 प्रतिशत पर था, जबकि एक माह पूर्व बाजार केवल 11 प्रतिशत संभावना देख रहा था। आंकड़ों में यह तेज बदलाव दर्शाता है कि निवेशक अब दरों में वृद्धि को लेकर बेहद आश्वस्त दिख रहे हैं। ऊर्जा कीमतों के दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चले जाने और अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग व सर्विसेज पीएमआई आंकड़ों के कई वर्षों के शिखर पर पहुंचने से महंगाई का खतरा फिर से मंडराने लगा है। इसके अलावा फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के सदस्यों का कड़ा रुख भी इन अटकलों को हवा दे रहा है। बाजार में विपणन योग्य कुल ट्रेजरी प्रतिभूतियों में ट्रेजरी नोट्स की हिस्सेदारी लगभग 52 प्रतिशत बैठती है, इसलिए यील्ड में बढ़ोतरी का सीधा और गहरा असर अमेरिकी राजकोषीय स्थिति पर पड़ रहा है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और व्यापार वार्ता की स्थिति
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक मोर्चे पर चल रही हलचल भी मुद्रा विनिमय दरों पर गहरा प्रभाव डाल रही है। वित्तीय विश्लेषकों का ध्यान मुख्य रूप से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाले एक दिवसीय शिखर सम्मेलन पर केंद्रित है। इस अहम बैठक से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों ने अपने व्यापार युद्ध पर लगे विराम को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। पहले यह व्यापारिक संघर्षविराम 10 नवंबर को समाप्त होने वाला था, जिसे अब बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दिया गया है। हालांकि, बाजार में समझौते के दीर्घकालिक स्वरूप को लेकर अभी भी संशय के बादल छाए हुए हैं। खुद स्कॉट बेसेंट ने यह सवाल उठाया है कि क्या चीन के साथ कोई व्यापक और स्थायी व्यापार समझौता संभव हो भी सकता है या नहीं।
राजकोषीय चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए एएनजेड में एशिया शोध के प्रमुख खून गोह ने कहा, "भले ही डॉलर को ऊंचे यील्ड से समर्थन मिलना चाहिए, लेकिन अमेरिकी राजकोषीय स्थिति और अमेरिकी नीति-निर्माण की अप्रत्याशितता को लेकर अभी भी चिंताएं बनी हुई हैं।" यह टिप्पणी दर्शाती है कि बॉन्ड यील्ड में तेजी डॉलर को अल्पकालिक सहारा तो दे रही है, लेकिन नीतिगत अनिश्चितता लंबी अवधि के रुझान को संवेदनशील बनाए हुए है।
तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख चार्ट स्तर
दैनिक चार्ट पर डॉलर इंडेक्स स्पॉट का अल्पकालिक रुझान काफी मजबूत बना हुआ है। सूचकांक लगातार 20-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज यानी मध्य बोलिंजर बैंड और 100-दिवसीय मूविंग एवरेज के ऊपर टिका हुआ है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 100.06 पर, 50-दिवसीय ईएमए 99.91 पर और 200-दिवसीय ईएमए 99.35 पर स्थित है। वहीं 50-दिवसीय एसएमए 99.96 और 200-दिवसीय एसएमए 99.19 के स्तर पर है। 50-दिवसीय मूविंग एवरेज का 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से ऊपर निकलना एक गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक तेजी का स्पष्ट संकेत है। बोलिंजर बैंड्स का दायरा 98.25 के निचले स्तर से 101.28 के ऊपरी स्तर तक फैला है, और मौजूदा कीमत 99.77 के मध्य बैंड के ऊपर कारोबार कर रही है। हालांकि, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 68 के आसपास और पूर्व सत्रों में 70.5 के ओवरबॉट जोन के करीब दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि खरीदारी की गति जोरदार तो है, लेकिन ऊपरी स्तरों पर कुछ समय के लिए सुस्ती या सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
चार्ट पर ऊपरी स्तरों की बात करें तो पहला तत्काल प्रतिरोध बोलिंजर बैंड की ऊपरी सीमा के पास 101.35 पर है। लाइव पिवट स्तर 101.18 पर है, जबकि इसके ठीक ऊपर आर1 प्रतिरोध 101.25 और आर2 प्रतिरोध 101.37 पर आता है। यदि खरीदार 101.35 और 101.37 के इस अवरोध को पार कर नई लिवाली लाते हैं, तो इंडेक्स 24 जून के 101.80 के उच्च स्तर की ओर बढ़ सकता है, जो इसके 52-सप्ताह के दायरे (95.55 से 101.80) का शिखर भी है। इसके बाद 102.00 का मनोवैज्ञानिक स्तर अगला लक्ष्य बनेगा। दूसरी तरफ, नीचे की ओर पहला तात्कालिक सहारा एस1 101.06 और उसके बाद 100-दिवसीय मूविंग एवरेज व एस2 100.00 पर मौजूद है। इसके नीचे 20-दिवसीय एसएमए मध्य बोलिंजर बैंड 99.80 पर और 20-दिवसीय सपोर्ट 98.60 के आसपास है, जो 9 सितंबर के निचले स्तर 98.60 तथा निचले बोलिंजर बैंड 98.22 और 98.25 के करीब एक मजबूत ढांचागत समर्थन तैयार करता है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज 0.43 पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाता है।
वैश्विक मुद्राओं और कमोडिटी पर डॉलर का प्रभाव
डॉलर की चौतरफा मजबूती का असर अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर साफ दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) शुक्रवार के एशियाई सत्र में अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसल गया। रातभर के कारोबार में 200-दिवसीय एसएमए से नीचे टूटने के बाद यह जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास काफी कमजोर नजर आ रही है। क्रूड ऑयल में आई दो दिवसीय तेजी ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इसके चलते रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं पर अमेरिकी डॉलर का दबदबा भारी पड़ रहा है।
डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) के मोर्चे पर भी उतार-चढ़ाव देखा गया। यह जोड़ी 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद एशियाई कारोबार में थोड़ी धीमी पड़ी, क्योंकि जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के डर से सटोरिये सतर्क हो गए। हालांकि, बैंक ऑफ जापान ने पिछले हफ्ते एक अहम कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया था। नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में बढ़ाया गया यह कदम 7-2 के बहुमत से उठाया गया, जो काफी हद तक बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप था। इसके बावजूद, फेड की आक्रामक नीति और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती येन की बढ़त को सीमित रख रही है। उधर बुलियन मार्केट में, सोने की कीमतों में सुस्ती बनी हुई है। सोने का भाव अपने साप्ताहिक निचले स्तर के पास स्थिर दिखाई दे रहा है। डॉलर की रैली में आया हल्का ठहराव कीमती धातुओं को निचली सतह पर सहारा दे रहा है, लेकिन बढ़ते बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव अंततः डॉलर के खरीदारों का पलड़ा भारी रख रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर का वैश्विक स्वरूप और फेड की भूमिका
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में समानांतर वैध मुद्रा के रूप में चलन में है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इसका एकछत्र प्रभाव है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के कुल विदेशी मुद्रा कारोबार में अकेले अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है, जो दैनिक आधार पर लगभग 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेन-देन के बराबर बैठती है। द्वितीय विश्व युद्ध के समापन के बाद इसने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया। अपने लंबे इतिहास के अधिकांश समय में डॉलर स्वर्ण मानक यानी गोल्ड से बंधा हुआ था, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ ही यह व्यवस्था समाप्त हो गई और यह पूरी तरह से एक फिएट मुद्रा बन गई।
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेड के दो प्रमुख कानूनी अधिदेश हैं: पहला, मूल्य स्थिरता प्राप्त करना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना, और दूसरा, अधिकतम रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को प्राथमिक हथियार के रूप में उपयोग करता है। जब बाजार में कीमतें बहुत तेजी से भागती हैं और महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों में इजाफा करता है। ऊंची ब्याज दरें विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं और डॉलर को मजबूत बनाती हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर खतरनाक रूप से बढ़ जाती है, तब फेड दरों में कटौती करता है, जिससे मुद्रा पर दबाव पड़ता है।
गंभीर आर्थिक संकटों के समय जब पारंपरिक ब्याज दरें बेअसर साबित होने लगती हैं, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) का सहारा लेता है। इसके तहत फेड बड़े पैमाने पर नई मुद्रा बनाकर बैंकों व वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदता है ताकि तरलता का प्रवाह बढ़ाया जा सके। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए इसी उपाय को अपनाया गया था। क्यूई से बाजार में मुद्रा की आपूर्ति बढ़ने के कारण डॉलर अक्सर कमजोर होता है। इसके उलट, जब अर्थव्यवस्था सामान्य होने लगती है, तो फेड क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) की प्रक्रिया लागू करता है। क्यूटी के तहत केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीद बंद कर देता है और परिपक्व हो चुके बॉन्ड के मूलधन का दोबारा निवेश नहीं करता, जिससे व्यवस्था से नकदी घटती है। यह प्रक्रिया सामान्यतः अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करती है।

















