अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने वैश्विक वित्तीय परिदृश्य को बुरी तरह झकझोर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते गतिरोध के चलते तीसरी तिमाही में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऋण बाजारों पर पड़ा है। तेल की लागत बढ़ने के कारण दुनिया भर के सॉवरेन बॉन्ड बाजार में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया है, जिससे दीर्घकालिक प्रतिफल या यील्ड रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंच गए हैं। मुद्रास्फीति के दोबारा सिर उठाने के खतरे ने केंद्रीय बैंकों के रुख को सख्त बनाए रखने की संभावनाओं को हवा दी है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और अन्य वैश्विक मुद्राओं तथा संपत्तियों पर गहरा दबाव बना हुआ है।
कच्चे तेल में 42 फीसदी का तेज उछाल और बॉन्ड बाजार की बिकवाली
डॉयचे बैंक के जिम रीड ने बाजार की इस जटिल स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि तीसरी तिमाही बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुई है। जून के अंत में अपने निचले स्तर से ब्रेंट क्रूड में 42.0% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेज उछाल के पीछे प्राथमिक कारण वाशिंगटन और तेहरान के बीच संघर्ष का दोबारा गंभीर रूप लेना रहा। ऊर्जा कीमतों में आई इस तेजी ने निवेशकों को वैश्विक बॉन्ड बाजार से पूंजी निकालने पर मजबूर कर दिया। परिणामस्वरूप, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में लगातार सातवें महीने बढ़त दर्ज की गई, जो वर्ष 2011 के बाद पहली बार देखने को मिली है। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरों का यह अनवरत बढ़ना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार महंगाई की लंबी अवधि को लेकर आशंकित है।
मुद्रास्फीति का दबाव और वायदा अनुबंधों में बदलाव
हालिया आर्थिक आंकड़ों में अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिसने अल्पकालिक ब्याज दरों में कटौती की कुछ उम्मीदें जगाई थीं। इसके बावजूद बाजार में मुद्रास्फीति के अन्य दबाव पूरी तरह हावी बने रहे। सबसे बड़ा दबाव फिर से ऊर्जा क्षेत्र से ही आया। हाजिर और निकट अवधि के सौदों में ब्रेंट क्रूड 0.92% चढ़कर $103.53 प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि, बेंचमार्क अनुबंधों में महीने के अंत में होने वाले बदलाव (रोल इफेक्ट) के कारण यह गिरकर लगभग $98 प्रति बैरल की तरफ आ सकता है, जिसको लेकर निवेशकों को फ्रंट-मंथ अनुबंधों का आकलन करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल 1.16% की बढ़त लेकर $90.42 प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस तेजी के पीछे कोई एक विशिष्ट कारण नहीं था, बल्कि यह उछाल उन बढ़ती आशंकाओं के बीच देखने को मिला कि अमेरिका और ईरान निकट भविष्य में किसी भी समझौते पर नहीं पहुंच पाएंगे। भू-राजनीतिक समाधान की उम्मीदें धूमिल होने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है।
दूरगामी फ्यूचर्स कर्व में भी तेजी के संकेत
ऊर्जा संकट की यह चिंता केवल मौजूदा समय या निकट अवधि के सौदों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह कच्चे तेल के दूरगामी फ्यूचर्स कर्व में भी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2027 के लिए ब्रेंट फ्यूचर्स का भाव 0.54% चढ़कर $81.25 प्रति बैरल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। लंबी अवधि के अनुबंधों में इस स्तर की मजबूती यह दर्शाती है कि बाजार प्रतिभागी आने वाले वर्षों तक ऊर्जा की ऊंची कीमतों और उनके कारण बनने वाले संरचनात्मक महंगाई दबावों की आशंका जता रहे हैं।
विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर का दबदबा और अन्य मुद्राओं में गिरावट
ऊर्जा से पैदा हुई महंगाई और बढ़ते बॉन्ड यील्ड का सबसे बड़ा लाभार्थी अमेरिकी डॉलर बना हुआ है, जिससे प्रमुख विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में भारी हलचल देखने को मिल रही है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर की मजबूत मांग के चलते विभिन्न मुद्रा युग्मों पर असर देखा गया
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में यह जोड़ी दो महीने के निचले स्तर के करीब लगभग 0.6900 के मध्य दायरे में स्थिर बनी रही। हालांकि कमजोर अमेरिकी PCE आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों को थोड़ा धीमा किया, लेकिन तेल जनित महंगाई ने ट्रेजरी यील्ड को ऊंचा बनाए रखा। इस बीच अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर AUD495M रह गया, लेकिन इसका इस मुद्रा युग्म पर सीमित असर पड़ा।
- जापानी येन (USD/JPY): गुरुवार को एशियाई सत्र में यह जोड़ी 158.00 से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के शीर्ष स्तर पर कारोबार कर रही थी। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद व्यापक डॉलर मजबूती भारी पड़ रही है। वाशिंगटन और तेहरान के गतिरोध से डॉलर की सेफ-हेवन मांग इस जोड़ी को लगातार मजबूती दे रही है।
- यूरो (EUR/USD): यह जोड़ी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई, जो जनवरी के उच्चतम स्तर 1.2082 से काफी नीचे है। इस गिरावट की मुख्य वजह डॉलर की शक्ति, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रति यूरोप की संवेदनशीलता है। हालांकि यूरोज़ोन में महंगाई का नया झटका यूरो को अप्रत्याशित सहारा भी दे सकता है।
सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
बॉन्ड यील्ड और डॉलर की तेजी का नकारात्मक असर गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर भी साफ दिखाई दिया। एशियाई और यूरोपीय कारोबारी सत्रों के दौरान सोने की कीमतों ने $4,200 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त दर्ज करने का प्रयास किया, लेकिन वह इसे बनाए रखने में नाकाम रहा। अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के नरम आने के बावजूद अमेरिकी डॉलर की लगातार खरीद और नए बहु-वर्षीय उच्च स्तरों पर पहुंचे ट्रेजरी यील्ड ने बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग को काफी नुकसान पहुंचाया है।
दूसरी ओर डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी सतर्कता का माहौल दिखा। हाइपरलिक्विड (HYPE) गुरुवार को 2% फिसल गया, जिससे पिछले दिन की 5% की बढ़त कम हो गई। संस्थागत निवेशकों की मांग में कमी देखने को मिली, जहां बुधवार को $5 मिलियन की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। तकनीकी नजरिए से HYPE का अल्पकालिक परिदृश्य मिला-जुला बना हुआ है क्योंकि इसकी कीमत $90 के स्तर से नीचे सीमित है।

















