यूरोपीय वित्तीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड के अंतर ने साझा मुद्रा यूरो की चाल को सुस्त कर दिया है। यूरोज़ोन में आर्थिक जुझारूपन के ताजा आंकड़े सामने आने के बावजूद वित्तीय जोखिमों का असर मुद्रा विनिमय दरों पर साफ दिखाई दे रहा है। यूरो की अपनी आंतरिक चाल के लिहाज से देखा जाए तो मजबूत पीएमआई आंकड़ों के बाद इफू (Ifo) सूचकांक से आर्थिक मजबूती के संकेत तो मिले थे, लेकिन यूरोज़ोन के बढ़ते बॉन्ड स्प्रेड ने इस सकारात्मक कारक को काफी हद तक बेअसर कर दिया है। फ्रांस के 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड जर्मन बंड्स के मुकाबले 110 बेसिस प्वाइंट ऊपर कारोबार कर रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है।
फ्रांस के बजटीय संकट और बॉन्ड यील्ड का तनाव
बाजार में इस बात की चर्चाएं थीं कि मरीन ले पेन संभावित बॉन्ड संकट को टालने के मकसद से प्रस्तावित बजट का समर्थन कर सकती हैं, लेकिन इन बातों से भी कर्ज बाजार को कोई खास राहत नहीं मिल सकी। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह स्प्रेड और ज्यादा चौड़ा होने का जोखिम बना हुआ है। हालांकि विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार पर इसके सटीक असर को पूरी तरह अलग करके देखना चुनौतीपूर्ण है, फिर भी मौजूदा माहौल में यह पूरा घटनाक्रम यूरो के पक्ष में जाता हुआ बिल्कुल नहीं दिख रहा है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD फिलहाल 1.14 के स्तर पर बना हुआ है, जो पिछले बंद 1.14 से मामूली 0.22% ऊपर है। तकनीकी मोर्चे पर 14-दिवसीय RSI 31 पर है और MACD बेयरिश रुझान दर्शा रहा है, जबकि 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए क्रमशः 1.15 और 1.16 पर मौजूद हैं, जो लंबे समय के डाउनट्रेंड और डेथ क्रॉस की ओर इशारा करते हैं।
अमेरिकी डॉलर का दबदबा और अन्य प्रमुख मुद्राओं की स्थिति
वैश्विक पटल पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने महंगाई की चिंताएं दोबारा बढ़ा दी हैं। इसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्च स्तर पर काबिज हो गया है। भू-राजनीतिक तनावों ने भी डॉलर की सुरक्षित निवेश मांग को और मजबूत किया है। इस मजबूत अमेरिकी रुख का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ा है। शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD अगस्त की शुरुआत के बाद के अपने नए निचले स्तर पर फिसल गया। रातभर के कारोबार में अपने 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (SMA) से नीचे फिसलने के बाद यह जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास बेहद कमजोर नजर आ रही है। यहां तक कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों पर भी अमेरिकी डॉलर की चौतरफा बढ़त भारी पड़ गई है।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और जापानी येन में हलचल
दूसरी तरफ एशियाई सत्र के दौरान USD/JPY में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर की तरफ बढ़ रही इसकी जोरदार तेजी पर थोड़ा ब्रेक लगा है। जापानी येन में मंदी का दांव लगाने वाले कारोबारी संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका से सतर्क हो गए हैं। हालांकि फेडरल रिजर्व के सख्त आउटलुक और तेल की कीमतों से उपजी महंगाई के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय शिखर पर बनी हुई है, जिससे ग्रीनबैक का रुझान मजबूत बना हुआ है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर बैंक ऑफ जापान ने नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह फैसला मौद्रिक नीति समिति में 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की आम अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप रहा। पिछले सप्ताह बैंक ऑफ जापान की ओर से आए अपेक्षाकृत नरम दर वृद्धि के रुख के कारण येन की बढ़त सीमित रह सकती है और हाजिर कीमतों को सहारा मिल सकता है।
सोने के भाव में सुधार का प्रयास और तकनीकी परिदृश्य
कीमती धातुओं के बाजार में भी अमेरिकी दरों और यील्ड का दबाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। सोने की कीमतों में शुक्रवार को कुछ नुकसान की भरपाई की कोशिश हुई और यह 4,230 डॉलर के समर्थन स्तर से उछलकर 4,300 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करता दिखा। इसके बावजूद समग्र बाजार का मंदी का रुख अभी भी बरकरार है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की लगातार बनी उम्मीदें और 10-वर्षीय से लेकर लंबी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 5% के स्तर से ऊपर टिके रहना बहुमूल्य धातुओं की कीमतों के लिए एक बड़ा अवरोधक साबित हो रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में 20-दिवसीय समर्थन स्तर लगभग 1.14 और प्रतिरोध 1.17 के आसपास है, जबकि दैनिक वोलैटिलिटी का दायरा 0.01 पर बना हुआ है, जिससे आने वाले कारोबारी सत्रों में भी मुद्राओं पर मैक्रो दबाव हावी रहने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

















