अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार को यूरो पर लगातार दबाव देखा गया, जिसके कारण ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले यह चार महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। मुद्रा विनिमय बाजार में EUR/GBP जोड़ी 0.8508 के आसपास टिकी हुई है, जबकि ऊपर की ओर किसी भी सुधार की कोशिश 0.8525 के दायरे के नीचे ही सीमित बनी हुई है। यूरोपीय साझी मुद्रा पर यह सुस्ती फ्रांस की वित्तीय चिंताओं, बढ़ते कर्ज और ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की लगातार ऊंची होती कीमतों की वजह से आई है। यूरो क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह दोहरा झटका माना जा रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है।
फ्रांस के कर्ज संकट ने बढ़ाई यूरोप की चिंताएं
यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में उधारी लागत 24 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जर्मन और फ्रांसीसी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर शुक्रवार को बढ़कर 140 बेसिस पॉइंट्स से अधिक हो गया है। सरकारी उधारी पर ब्याज दरों में इस तेज उछाल ने वित्तीय बाजारों में गंभीर घबराहट पैदा कर दी है। फ्रांस की सरकार ने गुरुवार को अपना 2027 का बजट विधेयक पेश किया था, जिसमें राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए कई कड़े उपाय शामिल किए गए हैं। हालांकि, बंटे हुए संसद में इस विधेयक के पारित होने और सफल रहने की संभावनाएं बेहद मामूली आंकी जा रही हैं, जिससे राजनीतिक और नीतिगत गतिरोध की स्थिति बन गई है।
महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों का दबाव
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने भी चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। यूरो क्षेत्र के प्राथमिक हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी HICP के आंकड़े जारी होने की उम्मीद है, जिसमें सितंबर महीने के दौरान महंगाई दर में और तेजी के संकेत मिल रहे हैं। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर अगस्त के 3.2 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 3.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसी दौरान कोर मुद्रास्फीति में भी मामूली बढ़ोतरी की संभावना है, जो पिछले महीने के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर सालाना आधार पर 2.5 प्रतिशत हो सकती है। हालांकि महंगाई के ये आंकड़े यूरोपीय सेंट्रल बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन फ्रांस के कर्ज संकट के चलते यूरो को इससे कोई बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
कच्चे तेल में तेजी और पश्चिम एशिया का तनाव
ऊर्जा बाजार में जारी तेजी ने यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सातवें महीने में प्रवेश कर चुके संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत रुकी हुई है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 101.00 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है और चालू सप्ताह के दौरान इसमें करीब 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें यूरोप के आयात बिल और औद्योगिक लागत को सीधे प्रभावित कर रही हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कमजोर पड़ने का जोखिम खड़ा हो गया है।
वैश्विक फॉरेक्स और कमोडिटी बाजारों की स्थिति
एशियाई कारोबारी सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों में भी तेज हलचल देखने को मिली। शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान AUD/USD सुधरकर 0.6950 की ओर वापस उछला। अमेरिका के महत्वपूर्ण नॉनफार्म पेरोल डेटा आने से पहले व्यापारियों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से अमेरिकी डॉलर अपने 17 महीने के उच्च स्तर से पीछे हटा है। वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को वैश्विक यील्ड और महंगाई के जोखिमों के बीच नवंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों से सहारा मिला। दूसरी ओर, USD/JPY 158.00 के करीब नई दिशा तलाशने में जुटा दिखा और टोक्यो में अनुमान से अधिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आने के बाद यह अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से नीचे आ गया।
कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स के बाजार में भी उतार-चढ़ाव बना रहा। सोने ने एशियाई सत्र की अपनी मामूली गिरावट को पलटते हुए 4,200 डॉलर प्रति औंस के करीब वापसी की। हालांकि अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों की प्रतीक्षा में मजबूत डॉलर के चलते सोने में बहुत बड़ी तेजी सीमित रही। सितंबर महीने में अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल में केवल 90,000 नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान है, जो पिछले महीने दर्ज की गई 1,62,000 नौकरियों से काफी कम है। उधर क्रिप्टो बाजार में पाई नेटवर्क में अस्थिरता बनी रही और पिछले दिन 3 प्रतिशत से अधिक गिरने के बाद शुक्रवार को यह 0.0900 डॉलर के आसपास घूमता नजर आया। चार घंटे के चार्ट पर राइजिंग वेज पैटर्न टूटने का खतरा बना हुआ है, जबकि 0.1000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर इसके लिए मजबूत बाधा साबित हो रहा है।

















