अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पॉउंड की स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती और मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक संकट की वजह से जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) करेंसी पेयर गिरकर 1.3500 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास आ पहुंचा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी चार्ट पर बन रहे दबाव के चलते यह जोड़ी आने वाले समय में 1.3420 के निचले स्तर की तरफ और फिसल सकती है। वैश्विक निवेशकों का रुझान जोखिम वाले परिसंपत्तियों से हटकर सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की ओर बढ़ा है।
डॉलर की इस मजबूती के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा चालू महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाएं हैं। साथ ही, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को भड़का दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा फिर गहरा गया है। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति का समर्थन करने वाले बयान सामने आ रहे हैं, जो पॉउंड को एक सीमित दायरा प्रदान करने की कोशिश कर रहे हैं।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की सख्त नीति और कैथरीन मान का बयान
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की सदस्य कैथरीन मान ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में ब्याज दरों को लेकर अपने आक्रामक रुख को दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुद्रास्फीति के जोखिमों से निपटने के लिए ब्याज दरों को थोड़ा ऊंचा रखना अधिक फायदेमंद रणनीति है। कैथरीन मान के अनुसार, अगर ब्याज दरें जरूरत से थोड़ी अधिक भी हो जाती हैं, तो बाद में स्थिति के अनुसार उनमें सुधार या कटौती की जा सकती है, लेकिन महंगाई को बेकाबू छोड़ देना कहीं अधिक खतरनाक होगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पिछली बैठक में उनके द्वारा 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की दर वृद्धि के पक्ष में वोट देने का मुख्य आधार यही सोच थी। उनका मानना है कि पिछली बैठक के बाद से आर्थिक गतिविधियों में कुछ मजबूती देखी गई है, जो मौद्रिक नीति को सख्त बनाए रखने के रुख को पूरी तरह से जायज ठहराती है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों का यह सख्त रवैया दर्शाता है कि यूके में मुद्रास्फीति का दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है और नीति निर्माताओं की प्राथमिकता महंगाई पर काबू पाना है।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में बढ़त और यूरो पर दबाव
सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग बढ़ने के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापता है, 0.13% की तेजी के साथ 99.78 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर की इस बढ़त का सीधा असर न केवल ब्रिटिश पॉउंड पर पड़ा है, बल्कि यूरो भी इससे अछूता नहीं रहा है।
यूरो/यूएसडी (EUR/USD) जोड़ी लगातार बिकवाली के दबाव में बनी हुई है और गिरकर 1.1600 के निचले स्तर से भी नीचे आ गई है, जो पिछले दो हफ्तों का इसका सबसे निचला स्तर है। मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की नई उम्मीदों के कारण वैश्विक निवेशक यूरो जैसी जोखिम वाली मुद्राओं से बाहर निकलकर डॉलर में शरण ले रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिका के निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों से पहले बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
कमोडिटी बाजार का हाल: सोना, कच्चा तेल और डीजल में हलचल
वैश्विक मुद्रा बाजार में जारी इस उथल-पुथल का असर कमोडिटी मार्केट पर भी साफ देखा जा सकता है। सोने की कीमतें चार हफ्ते के निचले स्तर को छूने के बाद थोड़ी रिकवरी दर्शाते हुए $4,320 प्रति औंस से ऊपर कारोबार कर रही हैं। हालांकि डॉलर में बीच-बीच में आने वाली मामूली गिरावट से सोने को सहारा मिला है, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण सोने में किसी बड़ी तेजी की संभावना सीमित दिखाई दे रही है।
दूसरी तरफ, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल में लगातार तीसरे दिन बढ़त देखी गई है और पिछले छह कारोबारी सत्रों में यह पांचवीं बार सकारात्मक बंद हुआ है। कच्चा तेल बढ़कर 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। तेल की कीमतों में इस उबाल ने दुनिया भर में महंगाई की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है, जिससे सितंबर में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के दांव और मजबूत हो गए हैं।
ईंधन बाजार में सबसे चौंकाने वाला रुझान डीजल सेगमेंट से आ रहा है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (कच्चे तेल और परिष्कृत डीजल के बीच का अंतर) इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है और इसने $102.00 प्रति बैरल का सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति को लेकर तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है।
आगामी आर्थिक आंकड़े और रोजगार रिपोर्ट का महत्व
वित्तीय बाजारों की नजर अब अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग (ADP) रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा अगस्त महीने के लिए निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन की अपनी मासिक रिपोर्ट जारी की जानी है। बाजार का अनुमान है कि अमेरिकी निजी क्षेत्र ने अगस्त में 47K (47,000) नए रोजगार जोड़े हैं, जो जुलाई में दर्ज 44K (44,000) नए पदों की तुलना में थोड़ा ही अधिक है।
इसके अलावा, शुक्रवार को आने वाली अमेरिका की आधिकारिक नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) और अगस्त जॉब्स रिपोर्ट का निवेशक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यदि अमेरिका में श्रम बाजार के आंकड़े उम्मीद से अधिक मजबूत आते हैं, तो इससे फेड को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए और प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे डॉलर इंडेक्स को और ताकत मिलेगी और GBP/USD तथा EUR/USD जैसी जोड़ी पर दबाव बढ़ जाएगा।
जीबीपी/यूएसडी का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर
तकनीकी मोर्चे पर, GBP/USD वर्तमान में 1.3500 पर कारोबार कर रहा है और 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) जो 1.3537 पर स्थित है, के नीचे बना हुआ है। जब तक यह जोड़ी 20-दिवसीय EMA के नीचे बनी रहती है, तब तक इसमें मंदी का रुख बना रहने की संभावना है। Relative Strength Index (RSI) इंडिकेटर लगभग 48 के स्तर पर खिसक गया है, जो यह दर्शाता है कि पहले बना हुआ तेजी का मोमेंटम अब खत्म हो चुका है और बाजार न्यूट्रल ज़ोन में आ गया है।
नीचे की तरफ, GBP/USD के लिए पहला मजबूत सपोर्ट लेवल 1.3418 के आसपास बनता है, जो इसके राइजिंग चैनल पैटर्न का निचला दायरा है। यदि खरीदार इस स्तर पर टिकने में सक्षम होते हैं, तो यहां से कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, ऊपर की तरफ 1.3537 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में काम कर रहा है। यदि daily candle 1.3537 के ऊपर बंद होने में सफल रहती है, तो मौजूदा गिरावट का दबाव कम होगा और मूल्य में ऊपर की तरफ सुधार देखा जा सकता है।



















