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ब्याज दरें 1% पर पहुंचीं, फिर भी जापानी येन की गिरावट क्यों नहीं रुक रहीबाज़ार
2 घंटे पहले· 2

ब्याज दरें 1% पर पहुंचीं, फिर भी जापानी येन की गिरावट क्यों नहीं रुक रही

बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दर बढ़ाकर 1% कर दी, जो 1995 के बाद सबसे ऊंची है, फिर भी येन चार दशक के निचले स्तर के पास है। अमेरिका से 250 बेसिस पॉइंट्स का फासला, भारी कर्ज और महंगे हस्तक्षेप के बावजूद गिरावट थम नहीं रही।

Ravikash GuptaRavikash GuptaSenior Correspondent 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जापानी येन में तेजी का इंतजार कर रहे निवेशक सालों से जिस कदम की मांग कर रहे थे, बैंक ऑफ जापान ने आखिरकार वही किया, लेकिन वह भी काफी नहीं रहा। 16 जून को नीति निर्माताओं ने ब्याज दर बढ़ाकर 1% कर दी, जो 1995 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है और दो साल पहले तक यह लगभग नामुमकिन लग रहा था। इसके बावजूद जापानी येन में मुश्किल से कोई हलचल दिखी।

USD/JPY अब भी 162 के आसपास टिका है, यानी येन करीब चार दशकों के अपने सबसे कमजोर स्तर के पास पहुंच चुका है। टोक्यो इस साल येन को संभालने के लिए करीब ¥11.7 ट्रिलियन (73 अरब डॉलर) झोंक चुका है, कच्चे तेल की कीमतें युद्ध के दौर की ऊंचाई से तेजी से नीचे आ चुकी हैं, और जापान ने आखिरकार नेगेटिव ब्याज दरों को भी अलविदा कह दिया है। फिर भी इनमें से कोई बात इस रुझान को मोड़ नहीं पाई।

अब सवाल बदल चुका है। बात इसकी नहीं रह गई कि येन कमजोर क्यों हुआ। असली सवाल यह है कि इसकी गिरावट को रोकने में कोई चीज कामयाब क्यों नहीं हो रही।

ब्याज दरों का फासला और कैरी ट्रेड

किताबी तौर पर देखें तो जब कोई केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो उसकी मुद्रा को सहारा मिलना चाहिए। लेकिन जापान के मामले में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि दर बढ़ाने के बाद भी अमेरिका के पक्ष में करीब 250 बेसिस पॉइंट्स का फासला बना हुआ है। दुनिया भर के निवेशकों के लिए गणित बेहद आसान है, सस्ते में येन उधार लो और ज्यादा रिटर्न देने वाली डॉलर संपत्तियों में पैसा लगाओ। इसी को कैरी ट्रेड कहते हैं, और यह बड़ा फासला इसे लगातार जिंदा रखे हुए है।

प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ाने वाला रुख इस दबाव को और बढ़ा देता है, जिससे बाजार को येन के खिलाफ दांव लगाने की एक और वजह मिल जाती है।

हस्तक्षेप क्यों बेअसर साबित हो रहा

जून की शुरुआत से अधिकारियों ने येन को डॉलर के मुकाबले मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 160 के स्तर से नीचे फिसलने दिया है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि टोक्यो दोबारा बाजार में उतरने को लेकर सचमुच कितना गंभीर है। बार-बार सख्त कदम की चेतावनी देने से भी कोई फायदा नहीं होता, क्योंकि इससे वह चौंकाने वाला असर खत्म हो जाता है जो किसी भी हस्तक्षेप को धार देता है।

आंकड़े पूरी कहानी कह देते हैं। अप्रैल से मई के बीच जापान ने मुद्रा को बचाने के लिए रिकॉर्ड ¥11.7 ट्रिलियन (करीब 73 अरब डॉलर) खर्च कर डाले, फिर भी राहत बस थोड़ी देर ही टिकी और येन दोबारा गिरने लगा। इस घटना ने बाजार के कई लोगों के उस शक की पुष्टि कर दी कि जब तक अमेरिका और जापान की ब्याज दरों का फासला इतना चौड़ा है, अकेला हस्तक्षेप हालात नहीं बदल सकता।

ऊर्जा का बोझ और तेल का उतार-चढ़ाव

जापान का आयातित ऊर्जा पर भारी भरोसा उस वक्त और भारी पड़ा जब मध्य पूर्व के संकट ने कच्चे तेल को कई साल की ऊंचाई पर पहुंचा दिया, जिससे येन पर अतिरिक्त दबाव आया। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से नीचे आई हैं, लेकिन यह राहत भी मुद्रा की दिशा बदलने के लिए काफी नहीं रही।

कर्ज का पहाड़ जो बैंक ऑफ जापान के हाथ बांधता है

जापान का सकल सरकारी कर्ज GDP के करीब 250% पर है, जो उन्नत G7 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा है। इसके ऊपर ताकाइची की 14 साल में फैली ¥370 ट्रिलियन (2.3 ट्रिलियन डॉलर) की अभूतपूर्व सरकारी-निजी निवेश योजना ने इस बहस को फिर हवा दे दी है कि देश की माली हालत लंबे समय में टिकाऊ रहेगी या नहीं।

यह बहस तब और अहम हो जाती है जब बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने में जुटा है। ऊंची ब्याज दरें भले ही सिद्धांत में येन को सहारा दें, लेकिन ये उस सरकार के लिए कर्ज लेने की लागत भी बढ़ा देती हैं जो पहले से विकसित दुनिया के सबसे भारी कर्ज में से एक उठाए हुए है। यही वजह है कि निवेशक बार-बार पूछ रहे हैं कि केंद्रीय बैंक सरकारी खजाने पर दबाव डाले बिना आखिर कितना सख्त रुख अपना सकता है, और यही चिंता आगे किसी भी हस्तक्षेप पर भारी पड़ सकती है।

आगे क्या

टोक्यो को USD/JPY का 160 के ऊपर कारोबार करना साफ तौर पर नहीं भा रहा, लेकिन पुरानी कोशिशें दिखा चुकी हैं कि जब बुनियादी हालात नहीं बदलते, तो हस्तक्षेप येन की गिरावट को धीमा भले कर दे, उसे पलट नहीं पाता। ऐसे में अधिकारी दोबारा बाजार में उतरें तब भी येन दबाव में रह सकता है। और अगर फेडरल रिजर्व इस साल के आखिर में एक और बार ब्याज दर बढ़ाता है, तो USD/JPY 1986 के बाद पहली बार 162.00 के पार जा सकता है, जो टोक्यो के संकल्प की एक बार फिर परीक्षा लेगा।

इसका आप पर असर

  • करेंसी ट्रेडर्स के लिए: अमेरिका और जापान की ब्याज दरों का चौड़ा फासला येन कैरी ट्रेड को आकर्षक बनाए हुए है, लेकिन कोई अचानक हस्तक्षेप या फेडरल रिजर्व का कदम USD/JPY को 162 के आसपास तेजी से ऊपर-नीचे कर सकता है।
  • यात्रियों और खरीदारों के लिए: कमजोर येन से बाहरी खरीदारों के लिए जापान की यात्रा और जापानी सामान सस्ता पड़ता है, जबकि इससे जापान का अपना आयात बिल बढ़ जाता है।
  • निवेशकों के लिए: GDP के करीब 250% कर्ज के साथ बैंक ऑफ जापान आखिर कितना सख्त रुख अपना सकता है, इस पर संदेह जापानी संपत्तियों में जोखिम की एक नई परत जोड़ देता है।

सवाल-जवाब

बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें कितनी बढ़ाईं?
16 जून को दरें बढ़ाकर 1% कर दी गईं, जो 1995 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
USD/JPY अभी किस स्तर पर है?
162 के आसपास, जो येन के करीब चार दशक के सबसे कमजोर स्तर के पास है।
टोक्यो ने येन को बचाने पर कितना खर्च किया?
करीब ¥11.7 ट्रिलियन (लगभग 73 अरब डॉलर), जिसका बड़ा हिस्सा अप्रैल और मई के बीच खर्च हुआ।
दर बढ़ने के बाद भी येन को सहारा क्यों नहीं मिल रहा?
अमेरिका के पक्ष में अब भी करीब 250 बेसिस पॉइंट्स का फासला बना हुआ है, जिससे येन कैरी ट्रेड बरकरार है।
जापान का सरकारी कर्ज कितना है?
GDP के करीब 250%, जो उन्नत G7 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा है।
सानाए ताकाइची की निवेश योजना क्या है?
14 साल में फैली ¥370 ट्रिलियन (2.3 ट्रिलियन डॉलर) की अभूतपूर्व सरकारी-निजी निवेश योजना।
USD/JPY को 162 के पार कौन धकेल सकता है?
इस साल के आखिर में फेडरल रिजर्व की एक और दर वृद्धि इसे 1986 के बाद पहली बार 162.00 के पार ले जा सकती है।
#बाज़ार#जापानीयेन#बैंकऑफजापान#USD/JPY#ब्याजदरें#कैरीट्रेड#सानाएताकाइची#फेडरलरिजर्व

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